सत्यवीर सिंह “मैं वो आज़ादी चाहता हूँ, जिसमें गऱीब, सुकून की जि़न्दगी जिएँ. मैं ख़ुदा से दुआ मांगता हूँ कि जल्दी ही वो दिन आए, जब अब्दुल्ला मिस्त्री, धनिया मोची और किसान, खालिक -उज्ज़मान जगत नारायण मुल्ला (सरकारी वकील) और लखनऊ की छत्तर मंजि़ल (अवध के नवाब का महल) में बैठे राजा साहेब महमूदाबाद के सामने, ठाठ से कुर्सियों पर बैठे नजऱ आएं.” अमर शहीद अशफाकुल्लाह खान आज हमारा देश अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ाद है. लेकिन, क्या गरीब आज सुकून की वो जि़न्दगी जी रहे हैं, जिसका ख़्वाब हमारे शहीदों ने देखा था और जिसके लिए वे हंसते हुए फांसी चढ़े थे? क्या आज आज़ाद भारत में, अब्दुल्ला मिस्त्री, धनिया मोची और हमारे किसान सम्मानपूर्ण जि़न्दगी जी रहे हैं, जैसा हमारी गौरवशाली क्रांतिकारी विरासत के अलंबरदारों ने सोचा था? क्या आर्थिक आज़ादी के बिना आज़ादी की जंग अधूरी नहीं है? अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाकुल्लाह खान, अपनी आखिऱी साँस तक अपने-अपने मज़हब मानते रहे, लेकिन मज़हब, उनके क्रांतिकारी लक्ष्य हांसिल करने में लेसमात्र भी रूकावट नहीं बना. आज जब हमारी उस गंगा-जमुनी तहज़ीब को तार-तार किया जा रहा है, तो क्या हम शहीदों के ख़्वाब बिखरते हुए, उस प्यारी बगिया को लुटते-फुंकते हुए चुपचाप देखते रहें? आज के वक़्त में हमारा क्या फज़ऱ् है? अमर शहीदों के शहादत दिवस पर, उनकी तस्वीरों को फूल मालाएँ चढ़ाना, उनकी याद में चंद नारे लगाना, क्या उन्हें सही माने में याद करने के लिए काफ़ी है?
इन चंद सवालों पर चर्चा करते हुए, अपने विचार रखते हुए, फऱीदाबाद के मज़दूरों और मज़दूर कार्यकर्ताओं ने काकोरी के अमर शहीदों को उनकी शहादत की पूर्व संध्या, 18 दिसंबर को शिद्दत से याद किया. क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा, फरीदाबाद के आह्वान पर, आज़ाद नगर मज़दूर बस्ती, सेक्टर 24 स्थित ‘चन्द्रिका प्रसाद स्मारक सामुदायिक भवन’ में दोपहर 2 बजे एक शानदार मज़दूर सभा संपन्न हुई, जिसमें फऱीदाबाद के आलावा दिल्ली के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र कार्यकर्ताओं, कॉमरेडस हरेन्द्र, पारुल, शालिनी और साथ ही ‘इंडियन पब्लिक सर्विस एम्प्लाइज फेडरेशन (IPSEF)’ की दिल्ली ईकाई के सचिव कॉमरेड राकेश भदौरिया ने सक्रिय रूप से भी भाग लिया और अपने बहुमूल्य विचार रख मज़दूरों का हौसला बढ़ाया.
हॉल को लाल झंडों और अमर शहीदों के विचारों के कोटेसन द्वारा सजाया गया था. सभा का संचालन क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा के अध्यक्ष कॉमरेड नरेश ने किया. फऱीदाबाद से प्रकाशित लोकप्रिय साप्ताहिक मज़दूर मोर्चा के संपादक कॉमरेड सतीश कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा, कि अगर हम अपने अमर शहीदों के प्रति सही में सम्मान प्रकट करना चाहते हैं तो हमें अपने इर्द-गिर्द समस्याओं के प्रति संवेदनशील और जागरुक होना होगा. दिल्ली में ‘न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन’ से सम्बद्ध साथी एम एम चन्द्रा ने मज़दूरों को भरोसा दिलाया, कि वे उनके आन्दोलनों में हमेशा उनके साथ रहेंगे. उसी प्रतिष्ठित संस्थान की संपादक महिला साथी आरिफ़ा ने महिलाओं को शिक्षित और जागरुक होने के लिए प्रेरित किया. वे आजकल मज़दूरों के बच्चों को निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा देने का कोर्स चला रही हैं. उन्होंने बताया कि कम पढ़े होने के बावजूद भी कैसे गरीब परिवारों के बच्चे अपनी मेहनत और लगन से सप्ताह भर में ही कम्प्यूटर पर काम करना सीख जाते हैं.
आज़ाद नगर में, अगस्त महीने में, रेलवे लाइन पर वहशी और हृदयविदारक ज़ुल्म में अपनी मासूम बच्ची खो चुकी, महिला मज़दूर साथी ने भी अपनी वेदना बहुत मार्मिक शब्दों में साझा की. क्रा म मो के सचिव कॉमरेड सत्यवीर सिंह, उपाध्यक्ष कॉमरेड रामफल जांगड़ा, उप-सचिव कॉमरेड विजय सिंह, मज़दूर साथी अरविंद, सुभाष, खुशाली अहिरवार, लखानी फैक्ट्री के संघर्षरत मज़दूर साथी रजनीश, भूपेन्द्र और भरत ने भी अपने विचार रखे. कॉमरेड विजय द्वारा गाए क्रांतिकारी गीत, ज़ोरदार नारों और काकोरी के अमर शहीदों के सपनों का भारत बनाने की ज़द्दोज़हद में समर्पित होने के अहद के साथ शाम 6 बजे सभा संपन्न हुई.