जिनको बांध सके न बन्धन…

जिनको बांध सके न बन्धन…
February 13 09:55 2026

डॉ. रामवीर 
जिनको बांध सके न बन्धन
न ही रोक सकें बाधाएं
हम ऐसे स्वच्छन्द विहग हैं
मुक्त गगन में ही सुख पाएं।

हम अपनी मर्जी के मालिक
मर्जी हो तो गीत सुनाएं
क्रीतदास बनने की हमने
नहीं निभाईं परम्पराएं।

हम अपनी पर आ जाएं तो
नभ को धरती पर ले आएं
जिसको लोग असम्भव कहते
उसको सम्भव कर दिखलाएं।

अन्यों का अधिकार छीन कर
सारे भूमण्डल पर छाएं
आज तलक हमने नहीं पालीं
ऐसी हेय अशुभ इच्छाएं।

तुच्छ स्वार्थों के कारण जो
करते रहते दाहिने बांए
ऐसे राजनीति के रोगी
कभी हमारे मन न भाए।

हम तैयार सदा रहते हैं
आपद् में कोई हमें बुलाए
हमें सामने पा कर प्राय:
संकट स्वयं निकट न आए।

  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles