फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एचएसवीपी के रिश्वतखोर-दागी जेई-एसडीओ लूट कमाई के लिए अपने अधिकारियों तक को ठेंगे पर रखते हैं। रखें भी क्यों न, जब रिश्वतखोरी का मोटा हिस्सा उच्चाधिकारियों और शीर्ष नेताओं को पहुंचाएंगे तो फिर उनकी क्यों सुनेंगे। प्राधिकरण की सर्वे शाखा के एसडीओ राजपाल और जेई विजय राठौर ईओ एचसीएस नवीन कुमार के बार बार कहने पर भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे, लगता है इसके उलट अवैध निर्माणकर्ताओं को शिकायत का हवाला देकर जल्द काम पूरा करने की हिदायतें दी जा रही हैँ, क्योंकि इधर शिकायत हुई उधर निर्माणकार्य और तेजी से होने लगता है।
सुधी पाठकों को याद होगा कि स्टेट विजिलेंस ने ग्रीन बेल्ट पर बनाए गए अवैध शराब ठेके को बचाने के एवज में डेढ़ लाख रुपये रिश्वत लेते प्राधिकरण के जेई नरेश को सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। नरेश एसडीओ राजपाल के मातहत ही था, सूत्रों के अनुसार नरेश ने रिश्वत की रकम ऊपर के अधिकारी तक को देने की बात कुबूल की थी, इसके बाद से एसडीओ राजपाल अंडरग्राउंड हो गया यहां तक कि उसने नया फोन नंबर भी ले लिया और कई महीने कार्यालय ही नहीं आया था। चर्चा है कि नरेश वाले मामले में विजिलेंस की ‘जांच पूरी कराने’ के बाद राजपाल काम पर लौटा है। इस घटना के बाद से उसका आत्मविश्वास इतना बढ़ गया है कि वह ईओ नवीन कुमार जैसे अधिकारी की भी नहीं सुन रहा है। प्राधिकरण में यह भी चर्चा है कि एसडीओ साहब ने अपने मातहत जूनियर इंजीनियरों को ओसी, कंप्लीशन, कंपाउंडेबल फीस आदि जिस तरह से भी कमाई हो सकती है करने की खुली छूट दे रखी है। उनका इशारा मिलते ही जेई प्राधिकरण की जमीनों पर अवैध कब्जा, अतिक्रमण करवा कर महीना वसूलने, निर्माणाधीन इमारतों की कंपाउंडेबल फीस में खेल कर ऊपरी कमाई करने में जुट गए हैं। इनके अलावा सिंगल स्टोरी कंप्लीशन, अधूरे निर्माण पर ही ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने, सरकारी प्लॉट और सड़कों पर अवैध कब्जे करा वसूली करने के काम तो पहले से ही चल रहे हैं।
प्राधिकरण के सेक्टरों की हालत खराब है, पब्लिक कॉरिडोर पर अवैध कब्जे कर दुकानदार या तो मोटा किराया वसूल रहे हैं या अपना ही धंधा दुकान के बाहर तक फैलाए हुए हैं। सेक्टर 46 मार्केट में विधायक मूलचंद शर्मा के मिलन होटल ने तो पब्लिक कॉरिडोर को चाट कार्नर ही बना डाला है, दुकान के बगल की खाली सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर कैफेटेरिया की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। मिलन होटल ही नहीं इस मार्केट में लगभग सभी दुकानों का यही हाल है। इसी तरह सेक्टर 21 मार्केट में 27 गज की दुकान के आगे सौ गज तक अतिक्रमण किया जाना आम है। यहां बीकानेर मिठाई वाले ने पब्लिक कॉरिडोर को अपना काउंटर रखने की जगह बना डाला है।
सेक्टर 21 सी मार्बल का भी हाल खराब है। यहां सरकारी जमीन बाकायदा अस्थायी फेंसिंग से कब्जा कर किराए पर उठा कर लाखों रुपये महीने वसूले जा रहे हैं। 27 गज के प्लॉट वालों ने सामने दो सौ से तीन सौ गज पार्किंग और ग्रीन बेल्ट तक पर कब्जा कर रखा है। 250 गज के डबल स्टोरी शॉप प्लॉटों में सिंगल स्टोरी पर ही कंप्लीशन दे रखी है। प्राधिकरण के जेई विजय राठौर हों या एसडीओ राजपाल शिकायत दर शिकायत के बावजूद कहीं झांकने भी नहीं जाते। यहां तक कि अवैध निर्माण की शिकायतों पर निर्माणकर्ता पर काम जल्दी पूरा करने का दबाव बनाया जाता है और शिकायत का हवाला देकर रेट और बढ़ा दिए जाते हैं। इसी तरह बडख़ल झील चौक सेक्टर 21डी में कोर्ट में विचाराधीन जमीन पर अवैध कब्जे पक्के निर्माणों में तब्दील हो रहे हैं, बताते चलें कि यह जमीन हुडा ने बाकायदा मुआवजा देकर अधिग्रहीत की थी लेकिन कुछ लोग अदालत चले गए थे जिस कारण हूडा इस पर कोई निर्माण नहीं कर रहा था। यही हाल सेक्टर 48 में भी हूडा की जमीनों पर कब्जे भी पक्के निर्माण में तब्दील हो रहे हैं।
बार बार शिकायत किए जाने पर ईओ नवीन कुमार का जवाब है कि उनके पास बहुत से अन्य कार्य हैं इसलिए वह शिकायतों को एसडीओ तक पहुंचा देते हैं और शिकायतकर्ता से बात कर उसकी समस्या सुलझाने का आदेश भी देते हैं। राजपाल उनकी बातों पर कोई कार्रवाई नहीं करते, इसके दो ही कारण हो सकते हैं। एक यह कि राजपाल ऊपरी कमाई की हिस्सापत्ती उन तक पहुंचा देते हैं इसलिए, दूसरा राजपाल अपने अधिकारी को कुछ समझते ही नहीं इसलिए। जो भी बात हो लेकिन शिकायतों का निस्तारण न होने के बावजूद ईओ नवीन कुमार द्वारा एसडीओ साहब के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न करना प्राधिकरण में लूट-कमाई, भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की ओर इशारा कर रहा है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार प्राधिकरण में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट घोटाला बहुत बड़ा है, यदि गंभीरता से जांच की जाए तो भ्रष्टाचार सामने आ जाएगा। मुख्य मंत्री के सीधे नियंत्रण में चलने वाली स्टेट विजिलेंस भ्रष्टाचार रोकने के लिए चारों ओर हाथ पांव मारती हैं लेकिन ओसी घोटाले की ओर उसका ध्यान नहीं है। सूत्र कहते हैं कि विजिलेंस के अधिकारियों को प्राधिकरण में हो रहे घोटालों की भलीभांति जानकारी है लेकिन अधिकतर अधिकारी हूडा के ही सेक्टरों में रहते हैं। इन अधिकारियों के प्राधिकरण में निजी के साथ ही रिश्तेदारों, सिफारिशियों के भी काम होते रहते हैं इसलिए आंखें बंद किए रहते हैं। प्राधिकरण में तैनात भ्रष्ट अधिकारियों के कारण हूडा सेक्टरों की हालत और आधारभूत ढांचा तो बेकार हो ही रहा है, नियमों का पालन करने वाले आम नागरिकों के अधिकारों का भी हनन हो रहा है। लगता है कि भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकारों में यह भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार हो चुका है।