ट्रिपल इंजन सरकारों का विकास पागल हो गया है फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) लगातार तीसरी बार केंद्रीय मंत्री बनने के बावजूद शहर की जनता को कोई ढंग का विकास नहीं देने वाले कृष्णपाल गूजर एनआईटी की प्सायी जनता के लिए कथित 3.88 करोड़ का म्यूजिकल फाउंटेन लेकर आए हैं। खास, बात यह है कि करीब चार करोड़ कीमत वाला यह फाउंटेन चलने की गारंटी सिर्फ तीन साल तक है, यानी करीब सवा करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का खर्च। वो भी अगर चल गया तो और तीन चार महीने में चोरी नहीं हुआ तो। विकास के लिए तरस रहे एनआईटी विधानसभा में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की कमी और दूसरी जलभराव की है। नगर निगम और एफएमडीए के आंकड़ों के अनुसार एनआईटी विधानसभा क्षेत्र में करीब पंद्रह एमएलडी, (डेढ़ करोड़ लीटर प्रति दिन) जलापूर्ति की आवश्यकता है, गर्मी में तो हालात ये होते हैं कि कई मोहल्लों में दूसरे, या तीसरे दिन पानी की आपूर्ति होती है। डबुआ में रहने वाले मनीष शर्मा कहते हैं कि जब तक जनता को आधारभूत सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराई जातीं तब तक फव्वारे जैसे कार्यो पर चार करोड़ रुपये खर्च करना बेमानी है। पहले इस चार करोड़ से इलाके की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था बेहतर की जानी चाहिए थी।
अजीत पाल कहते हैं कि जनता पीने के पानी को तरस रही है और फव्वारे के लिए खास ट्रीटमेंट वाला पानी चलाया जाएगा। साधारण पानी चलाने से फव्वारे के जेट चोक होने का खतरा रहता है। कहते हैं कि एफएमडीए-नगर निगम पेयजल को विसंक्रमित करने के लिए पर्याप्त मात्रा में क्लोरीन तो डाल नहीं पाते लेकिन फव्वारे चलाने के लिए ट्रीटेड पानी का इंतजाम किया जाएगा। एनआईटी विधानसभा की दूसरी बड़ी समस्या जलभराव की है। हल्की सी बारिश में ही डबुआ, जवाहर कॉलोनी, गाजीपुर, एयरफोर्स रोड, डबुआ मंडी सब जगह घुटनों घुटनों तक पानी भर आता है। डबुआ कॉलोनी के अकबर खान कहते हैं कि अब बरसात में अंदर फव्वारा शो होगा और बाहर सड़क पर झील का आनंद लिया जा सकेगा। दरअसल, लेजर वैली पार्क के सामने की सड़क पर थोड़ी सी बारिश में इतना जलभराव होता है कि पैदल तो दूर चार पहिया वाहन भी नहीं निकल पाते।
डबुआ मंडी के पास रहने वाले संतू कहते हैं कि आम दिनों में नालियां चोक पड़ी रहती हैं, इस बार नाले साफ कराने का नाटक ही किया गया, थोड़ी दूर सफाई की गई और आगे फिर छोड़़ दिया गया, यह खेल डबुआ, जवाहर कालोनी, एयरफोर्स रोड, जनता कॉलोनी हर जगह हुआ। अधूरी सफाई से जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकती। नतीजा सबके सामने है, जुलाई में बहुत ज्यादा बारिश नहीं हुई लेकिन जलभराव की स्थिति कई कई दिन बनी रही। संतू कहते हैं कि फव्वारे चलाओ अच्छी बात है लेकिन पहले नालियों को दुरुस्त करो, जनता गंदे पानी में चलकर फव्वारा देखने तो नहीं जाएगी। राजनीति के जानकार करीब चार करोड़ के फव्वारे में भ्रष्टाचार देख रहे हैं। इन लोगो का कहना है कि सरकार सड़क, नाली-इंटरलॉकिंग गलियां, पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाओं पर खर्च नहीं कर रही, क्योंकि उनमें बहुत मोटी हिस्सापत्ती नहीं बन पाती। फव्वारे जैसे फैंसी आयटम के मनमाने रेट लगाए जाते हैं और नेता-अधिकारी एक बार में ही मोटा हाथ मारते हैं। स्मार्ट सिटी के शौचालयों की याद दिलाते हुए कहते हैं कि जो स्टेनलेस स्टील का शौचालय बाजार में साढ़े तीन लाख रुपये में उपलब्ध था उसके नाम पर टिन के शौचालय बीस लाख रुपये की दर से लगाए गए।
यही हाल इस फव्वारे का है। जो फव्वारा लेजर वैली पार्क में लगाया गया है, इंडिया मार्ट जैसी वेबसाइट पर उस जैसे फव्वारे की कीमत 35 से 50 लाख रुपये तक बताई जा रही है, जाहिर है कि इसमें मोलतोल भी होगा, जब सरकारी खरीद होगी तो जीएसटी का भी लाभ मिलेगा। कीमत के बाद इसकी स्थापना पर भी यदि एक करोड़ का भी खर्च मान लें तो सारा खेल डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का नहीं लगता है। एफएमडीए के होनहार इंजीनियर जनता की गाढ़ी कमाई का धन पानी की तरह बहा कर कितना मजबूत काम करते हैं इसका एक नमूना हार्डवेयर चौक है। यहां 36 लाख रुपये से गोल चौराहे की कार्पेटिंग की गई थी जो छत्तीस सप्ताह के भीतर ही उखडऩे लगी थी और एक साल में गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। अपनी इसी सुघड़ता को देखते हुए एफएमडीए ने करीब चार करोड़ के फव्वारे को केवल 2028 तक ही चलाने, मरम्मत करने आदि का जिम्मा लिया है।
जानकार कहते हैं कि फव्वारा दो साल चल जाए वह भी बड़ी बात है। इसमें हुई मोटी कमाई की हिस्सापती नेता-अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, अब ये लोग तो इसका आनंद उठाने आएंगे नहीं, रही जनता की बात, तो जब तक चलेगा देखेगी बंद होने पर कोई सवाल किए बिना चुपचाप बैठ जाएगी जो जनता पेयजल, जलभराव और उफनते सीवर, सड़कों पर घूमते आवारा पशु के बारे में आवाज नहीं उठा सकती वो फव्वारे के बारे में क्या आवाज उठाएगी। उसकी इस चुप्पी और सवाल न करने की कमी का फायदा उठाते हुए भ्रष्ट अधिकारी और खाऊ नेता फिर से कोई ऐसा ही प्रोजेक्ट तैयार करके जेबें भरेंगे।
कागजी निकला सीएम के नाम पर हुआ विकास भाजपा सरकार में शिष्टाचार बन चुका भ्रष्टाचार इतना बढ़ चुका है कि प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री नायब सैनी के कार्यक्रमों के नाम पर भी जमकर लूट मचाई जा रही है। करीब दस करोड़ की जमीन उपहार में देकर टिकट का जुगाड़ करने वाले सतीश फागना की जीत की खुशी में सीएम नायब सैनी की 4 मई को डबुआ मंडी में जन आभार रैली का आयोजन किया गया था। सीएम आने थे तो डबुआ की सारी सड़कें लाखों रुपये खर्च कर रातोंरात चकाचक कर दी गईं। पीएम मोदी और सीएम सैनी के जुमलों की तरह ये सड़कें पहली ही बारिश में उखड़ गईं। बताया जा रहा है कि डबुआ मंडी को मुख्य मार्ग से जोडऩे वाली सड़क की सिर्फ पुलिया के पास पैचवर्क करने में पांच लाख रुपयों से ज्यादा खर्च किए गए, इसी तरह जनता कॉलोनी की ओर, डबुआ फल मंडी वाली सड़कों के पैचवर्क में बीसियों लाख खर्च कर दिए गए। महज दो महीने में जनता की गाढ़ी कमाई के ये बीसियों लाख बर्बाद हो गए, जाहिर है पैचवर्क चीख चीख कर बता रहा है कि कमीशनखोर अधिकारी-नेता और ठेकेदार ने मिलकर सारा पैसा हजम कर लिया और दिखावे का पैचवर्क किया।