पवन बंसल मज़दूर मोर्चा ब्यूरो करनाल। करनाल निवासी रजत राणा नामक युवक और उसके दोस्त साइल काकू व आजाद शर्मा सोशल मीडिया पर ऊंट ब्रेकिंग न्यूज़ और सात फुटा ब्लैकमेलर आदि पोस्ट डाल कर एक दूसरे से मजाक कर रहे थे। उनकी पोस्ट से करनाल का कोई पत्रकार या सोशल मीडिया प्लेटफार्म चलाने वाले की भावनाएं आहत नहीं हुईं। करनाल ब्रेकिंग न्यूज संचालक कमल मिड्ढा की भावनाएं इन पोस्टों को पढऩे के बाद न जाने क्यों आहत हो गईं और उन्होंने नौ जून सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस को दी गई शिकायत में कमल मिड्ढा ने बताया कि वह करनाल ब्रेकिंग न्यूज नाम का सोशल मीडिया प्लेटफार्म चला रहा है। करीब डेढ़ महीने से एक व्यक्ति उसे और उसके परिवार को निशाना बना रहा है, कभी ऊंट ब्रेकिंग न्यूज लिख कर तो कभी सात फुटा ब्लैकमेलर लिख कर, यह व्यक्ति उसे और उसके परिवार को बदनाम करने के लिए षणयंत्र करते हुए लगातार तीन- तीन, चार-चार पोस्ट डाल रहा है। यह व्यक्ति उसके बड़े भाई रमेश मिड्ढा के खिलाफ भी आपत्तिजनक पोस्ट डालता रहता है, सत्ताधारी पार्टी भाजपा से जुड़े रमेश मिड्ढा व्यवसायी हैं। मांग की गई थी कि कम से कम डीएसपी रैंक के अधिकारी द्वारा जांच कराई जाए। इस प्रकरण में आरोपी अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ दो साथी साइल काकू और आजाद शर्मा भी शामिल हैं।
अब मामला क्योंकि पत्रकार महोदय का था तो पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) किसी व्यक्ति को सम्मान या प्रतिष्ठा का नुकसान पहुंचाने की धमकी देना, 353(1) किसी व्यक्ति या वर्ग के खिलाफ उकसाना और 356(2) मानहानि के तहत केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने रजत राणा और आजाद शर्मा को जांच के लिए बुला लिया। हालांकि सभी धाराओं में सात साल से कम कैद की सजा है इसलिए थाने से ही जमानत मिल सकती थी लेकिन मामला क्योंकि हाई प्रोफाइल लग रहा था तो पुलिस ने आजाद शर्मा को तो थाने से बेल दे दी लेकिन रजत राणा को नहीं देकर उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटका दी। रजत ने 16 जून को एडिशनल सेशन जज रामावतार पारीक की कोर्ट में जमानत की अपील की। 19 जून को हुई सुनवाई में दोनों पक्ष सुनने के बाद जज ने कमल मिड्ढा के वकीलों से पूछा कि आरोपी ने तो किसी का नाम लिया ही नहीं है तो फिर तुम्हारे मुवक्किल की मानहानि कैसे हो गई? जज के सवाल का जवाब वकीलों के पास नहीं था। जज ने जमानत देते हुए रजत राणा को पुलिस जांच में सहयोग करने का आदेश दिया।
रजत राणा और उसके दोस्तों को तो जमानत मिल गई लेकिन समाज और पत्रकार बिरादरी में कमल मिड्ढा प्रकरण की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि कमल मिड्ढा ईमानदारी से काम करते हैं और ब्लैकमेलिंग नहीं करते हैं तो उन्हें रजत राणा या उनकी तरह के किसी भी व्यक्ति की पोस्ट से आहत नहीं होना चाहिए था। रजत राणा ने तो उनका नाम नहीं लिया लेकिन एफआईआर दर्ज कराकर कमल मिड्ढा ने मानो खुद ही कुबूल कर लिया है कि रजत उन्हें ही सात फुटा ब्लैकमेलर और ऊंट ब्रेकिंग कहते हैं, जबकि रजत इससे इनकार करते हैं। पत्रकारों का कहना है कि कमल मिड्ढा ने एफआईआर दर्ज करा कर खुद ही बदनामी मोल ली है।