जारी रहेंगे नगर निगम में घोटाले, अधिकारियों ने वसूली के लिए प्यादे सेट किए

जारी रहेंगे नगर निगम में घोटाले, अधिकारियों ने वसूली के लिए प्यादे सेट किए
December 23 06:34 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दो सौ करोड़ रुपये के घोटाले बाद भी नगर निगम में आला अधिकारियों से लेकर छोटे कर्मचारियों द्वारा लूट का दौर जारी है। हालांकि, आला अधिकारियों ने अब हिस्सापत्ती लेने के कुछ अतिरिक्त तरीके ईजाद कर लिए हैं। पहले सारा खेल नकदी में ही होता था लेकिन अब सोने के बिस्कुट, महंगी ज्वैलरी आदि गिफ्ट के रूप में वसूले जा रहे हैँ। हालांकि यह तरीका नया नहीं है लेकिन अधिकारियों की नजर में ज्यादा सुरक्षित समझा जा रहा है। जिस तरह दो सौ करोड़ घोटाले में शामिल ठेकेदार सतबीरा ने मंत्री मूलचंद को नकदी न देकर महंगी कार गिफ्ट की थी उसी तर्ज पर अधिकारी भी अब कैश न लेकर सोने के बिस्कुट, ज्वैलरी आदि गिफ़्ट के रूप में वसूल रहे हैं। यह वसूली भी वह सीधे नहीं करते बल्कि इसके लिए भी उन्होंने प्यादे पाल रखे हैं। ये प्यादे और कोई नहीं नगर निगम के ही जेई, क्लर्क, चपरासी जैसे छोटे कर्मचारी हैं। आला अधिकारियों तक गिफ़्ट पहुंचाने के एवज में उन्हें भी छोटी मोटी बख्शीश मिल जाती है। कहने को तो ये छोटे कर्मचारी हैं लेकिन मोटे क्लाइंट से सेटिंग, डीलिंग यही करते हैं अधिकारी नहीं।

नगर निगम में अधिकारियों और उनके प्यादे कर्मचारियों की चर्चाएं गर्म हैं, कौन से अधिकारी से काम कराने के लिए किस कर्मचारी के पास जाना है यह सबको मालूम है। खुद को ईमानदार साबित करने के लिए निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने कुछ महीनों पहले आदेश जारी किया था कि कोई भी जेई, क्लर्क या अधिकारी सीधे उनके पास फाइल लेकर नहीं आएगा। सारी फाइलें संयुक्त आयुक्त या अतिरिक्त निगमायुक्त (एसीएमसी) के कार्यालय से ही उन तक भेजी जाएं। उनके आदेश की बहुत तारीफ हुई थी कि इससे भ्रष्टाचार खत्म होगा लेकिन भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि इसका मकसद रेट बढ़ाना था। अब फाइनेंस कंट्रोलर (एफसी) दिनेश ही ठेकेदारों के भुगतान की फाइलें लेकर निगमायुक्त के पास जाते हैं।

एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एफसी पहले दो प्रतिशत हिस्सा लेते थे लेकिन कुछ दिन पहले ही उन्होंने रेट तीन प्रतिशत यह कहते हुए कर दिया कि एक प्रतिशत मैडम का है। चर्चा यह भी है कि यह हिस्सा कैश में न होकर सोने के गहने या बिस्कुट के रूप में पहुंचाया जाता है। निगम के अधिकारी और ठेकेदार आपस में हंसी ठिठोली करते हुए सुने जा रहे हैं कि भई मैडम तो सोने के बिस्कुट खा रही हैं।

एफसी ने एक प्रतिशत रेट बढ़ाया तो एसीएमसी गौरव आंटिल के कार्यालय में तैनात उनके पीए अशोक सप्रा ने भी रेट आधा प्रतिशत से बढ़ा कर एक प्रतिशत कर दिया। दूसरे एसीएमसी रवींद्र एन पाटिल के कार्यालय में यह काम सफाईकर्मी से परीक्षा पास करने की शर्त पूरी किए बिना ही निरीक्षक बना प्रेम कुमार बाखूबी कर रहा है। नियमों को ताक पर रख कर सीएलयू करने, संरक्षित अरावली में भू माफिया को एलओआई जारी करने वाले भ्रष्टाचारी चीफ टाउन प्लानर सतीश पाराशर ने दोबारा चार्ज संभालते ही अपने चहेते क्लर्क बिंटू को लगा लिया। बताया जा रहा है कि प्लानिंग ब्रांच में काम करने वाला बिंटू वर्तमान में सीटीपी सतीश पाराशर के लिए मोटी कमाई वाले क्लाइंट तलाश कर ला रहा है। सैनिक कॉलोनी के आसपास की जमीन को लेकर कई भूमाफिया आजकल बिंटू को साध रहे हैं।

भ्रष्टाचार के अनेकों कारनामे अंजाम देने वाला और मंत्री गूजर के ‘बेटे’ एक्सईएन ओमदत्त के लिए लेनदेन का काम उसका चहेता क्लर्क मुकेश शर्मा कर रहा है। ओमदत्त का इतना विश्वासपात्र है कि जहां उसका ट्रांसफर होता है मुकेश को भी वहीं बुला लेता है। मुकेश को इतनी शक्ति दे रखी है कि वह ठेकेदार का बिल खुद ही बना कर तैयार कर देता है, अब चाहे जेई-एई ने कोई गड़बड़ी पाकर भुगतान में कटौती की हो लेकिन मुकेश वह सब साफ कर पूरे भुगतान वाला बिल तैयार कर देता है, यानी ठेकेदार खुश, ओमदत्त भी खुश और मुकेश भी, जेई आदि नाराज हों तो होते रहेंं।

ओमदत्त को एसीएमसी के पीए अशोक सप्रा के जरिए निगमायुक्त तक का समर्थन प्राप्त है इसलिए किसी की उसके खिलाफ शिकायत करने की भी हिम्मत नहीं होती। ओमदत्त का दूसरा चेला क्लर्क बीरू है, यह वही बीरू है जो ओमदत्त के चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया लॉक करने, करोड़ों के टेंडर का शीर्षक चंद लाख रुपये करने का आरोपी है। ओमदत्त ने उसे फिर यही काम सौंपा है। बताया जा रहा है कि बीरू ही ठेकेदारों से हिसाब किताब कर सबके हिस्से ईमानदारी से पहुंचाता है। जेई शिव कुमार भी ओमदत्त की टीम का हिस्सा और उसका कलेक्शन एजेंट बताया जा रहा है।

बल्लबगढ़ जोन के एक्सईएन ओपी कर्दम का खास ट्यूबवेल हेल्पर गुलाब कर्दम है। कहने को तो ये ट्यूबवेल हेल्पर है लेकिन आज तक किसी ट्यूबवेल पर ड्यूटी नहीं लगी। बल्लबगढ़ निगम कार्यालय में बाकायदा एक अधिकारी की तरह कार्यालय बना रखा है, हालांकि मज़दूर मोर्चा में खबर छपने के बाद उसके नाम की तख्ती तो कार्यालय से हटा दी गई लेकिन सारे काले कारनामे वैसे ही जारी हैं। बिना गुलाब कर्दम के इस जोन में कोई भी काम नहीं होता। तैनाती के बाद से वहीं जमे हुए गुलाब को लूट कमाई के सारे रास्ते अच्छी तरह से मालूम हैं और वह एक्सईएन को ईमानदारी से हिस्सापत्ती पहुंचाता रहता है इसलिए ‘खट्टर-सैनी की भ्रष्टाचार मुक्त सरकार’ में आज तक उसे हटाया नहीं गया है।

ओल्ड और तिगांव जोन की तोडफ़ोड़ शाखा में रिश्वतखोरी के आरोपी डेविड नागर को फिर से लगाया गया है। दिखावे के लिए उसे कंप्यूटर पर बैठाया गया है लेकिन तोडफ़ोड़ का नोटिस जारी कर मामला सेटल करने और नोटिस फाड़ कर फेकने में महारत होने के कारण उसे तोडफ़ोड़ शाखा में ही रखा गया है। तोडफ़ोड़ अभियानों में भी वही सबसे आगे रहता है और सौदेबाजी के लिए उपलब्ध रहता है। अधिकारियों की शह होने के कारण शनिवार-रविवार यानी छुट्टी के दिन भी तोडफ़ोड़ और हटाने के नाम पर रेहड़ी पटरी वालों, दुकानदारों से मोटी वसूली का खेल किया जाता है।

दो सौ करोड़ के घोटाले में नामजद आरोपी अकाउंट ब्रांच क्लर्क नवीन रत्रा फिर से अपने पुराने हाथ दिखा रहा है। भ्रष्टाचारी परंपरा के अनुसार अकाउंट ब्रांच में प्रत्येक अधिकारी के हस्ताक्षर के रेट तय हैं, यह पूरे बिल का करीब पांच प्रतिशत होता है। ठेकेदार यह सारी रकम नवीन रत्रा के हाथ में एकमुश्त पकड़ा देता है। उनका काम अधिकारी से हस्ताक्षर लेने के बाद उनका हिस्सा देकर ठेकेदार को भुगतान दिलाना होता है। ईओ ब्रांच की प्रमुख सृष्टि बब्बर के लिए क्लर्क अरुण डील करता है।
नगर निगम में हिस्सा पत्ती और बख्शीश वाले अधिकारियों कर्मचारियों की फेहरिस्त तो वैसे बहुत लंबी है, समझा जा सकता है कि जिस संस्थान में आला अधिकारी सोने के बिस्कुट खा रहे हों वहां छोटे अधिकारी-कर्मचारी अपनी हैसियत के मुताबिक शुकराना-नजराना लिए बिना काम कैसे करेंगे, उनका भी तो नाहक हक बनता ही है।
एसई का प्यादा वीरसिंह जेई अपने आका के लिए दलाली का काम करता है। बेचारा करे भी क्यों न, उसकी नौकरी ही एसई की दया पर चल रही है। एसई का दूसरा एजेंट राजेश नंदन है, सूत्र बताते है की राजेश नंदन का काम केवल चापलूसी करना और एक दूसरे की चुगली कर अपनी सीट बचाए रखना है।

राजेश नंदन का ख़ुद का कोई वजूद नहीं है वह केवल अपने आका की चापलूसी कर टिका हुआ है और उसके लिए पैसे इकठा करता घूमता है। एक्सईएन नितिन कादियान ने भी सौरभ व लोकेश नाम के दो गुर्गे पाल रखे है जो की निगम मुख्यालय में दो बार शराब पीते पकड़े भी गए है जिन्हे नौकरी से बर्खास्त तक कर दिया गया था परंतु अपनी दलाली के हुनर के कारण ही बहाली पाई और नितिन कादयान के कलेक्शन एजेंट बने घूम रहे हैं। यह भी चर्चा है कि जेई अंकित गोयल दलाली और लूट कमाई का हिस्सा एसडीओ अमित चौधरी के जरिए चीफ इंजिनर बीके कर्दम तक पहुंचाता है। फजऱ़्ी डिग्री धारक एक्सईएन पद्म भूषण भी अपने दो गुर्गों कपिल व संदीप जेई के माध्यम से कमाई कर रहा है। गूजर का आशीर्वाद प्राप्त परवीन बैसला और हर्षवर्धन चपराना तो संयुक्त आयुक्त से सीधे डील कर रहे हैं।

प्रशासन में भ्रष्टाचार आम होना भाजपा सरकार के शासन की सच्चाई बन चुका है। खट्टर तो भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटते थे, नए सीएम को तो जैसे भ्रष्टाचार नजर ही नहीं आ रहा है। नगर निगम में दो सौ करोड़ के घोटाले के बाद 2020 में 58 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ, राजा नाहर सिंह स्टेडियम, सेक्टर 12 में नगर निगम मुख्यालय की अधूरी इमारत, ग्रीन बेल्ट में पौधरोपड़ के नाम पर करोड़ो की हेरफेर की शिकायत पूर्व विधायक नरेंद्र गुप्ता द्वारा किए जाने के बावजूद न तो खट्टर ने कोई कदम उठाया न ही सैनी ऐसा कुछ करते दिखते हैं।

भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों को सबक सिखाने के लिए उनके तबादले करने के बजाय उन्हें फिर से नगर निगम में ही लगाया जा रहा है। भ्रष्टाचारी एक्सईएन ओमदत्त और सीटीपी सतीश पाराशर इसके उदाहरण हैं। सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार के दस साल के कार्यकाल के दौरान प्रशासन में भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार हो चुका है। अधिकारियों-नेताओं को कमीशन मिलता रहे आम जनता और विकास जाएं भाड़ में।

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Mazdoor Morcha
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