हूडा में जारी है अवैध निर्माण और निर्माणाधीन को कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने का खेल

हूडा में जारी है अवैध निर्माण और निर्माणाधीन को कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने का खेल
November 10 08:00 2024

फऱीदबाद (मज़दूर मोर्चा) मोटी कमाई के लिए अवैध निर्माण कराने का खेल केवल नगर निगम में ही नहीं चल रहा है, हूडा में तो अवैध निर्माण अर्ध निर्मित भवनों को बाकायदा प्रमाणपत्र भी जारी किया जा रहा है। यह खेल बिल्डर, दलाल आर्किटेक्ट और अधिकारियों की मिलीभगत से जारी है।

हू्डा के नियमानुसार उसके सेक्टर में कोई भी निर्माण पास कराए गए नक्शे के आधार पर ही होना चाहिए। नक्शे में बताए गए से कम निर्माण करने या अतिरिक्त या अवैध निर्माण होने पर कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं जारी किया जाता है, साथ ही छोटे-मोटे बदलाव पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। हूडा में सक्रिय दलाल अवैध-अतिरिक्त निर्माण करने वालों को प्राधिकरण की फीस या जुर्माने की रकम से आधे खर्च करने पर ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट उपलब्ध करवा रहे हैं। दलालों के कारण बिल्डर फ्लोर, डबल स्टोरी शॉप, गेस्टहाउस, स्कूल ,नर्सिंग होम में धड़ल्ले से अवैध निर्माण चल रहा है।

सेक्टर 21 सी के प्लॉट नंबर में 597 से चार मंङ्क्षजला इमारत बनाई गई है, फ्लोर एरिया रेश्यो का उल्लंघन तो किया ही गया है ओपन एरिया को भी घेर लिया गया है। बताया जा रहा है कि इस भवन को मामा राजपाल का संरक्षण प्राप्त है इसीलिए हूडा अधिकारी इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि यह मामा राजपाल की ही बेनामी प्रॉपर्टी है इसे बिल्डर फ्लोर के रूप में बेचा जाएगा।

इसी तरह सेक्टर 17 में प्लॉट नंबर 1285 में भी अवैध निर्माण किया गया है। सूत्रों के अनुसार इसके मालिक को नोटिस जारी किया गया है लेकिन दलालों की मेहरबानी से खानापूर्ति के बाद मामला सुलटा लिया जाएगा।

इसी सेक्टर की मार्बल मार्केट में कई निर्माणाधीन इमारतों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है। कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने के कारण कई इमारतों में नक्शे का उल्लंघन कर बेसमेंट बनाया गया है। नियमानुसार ग्राउंड फ्लोर (भू-तल) और पब्लिक कॉरिडोर (बरामदा) समतल होने चाहिए। इसके विपरीत अतिक्रमण कर पब्लिक कॉरिडोर में सीढिय़ां बनाई गई हैं। बरामदे में अतिक्रमण करने पर भारी जुर्माना लगाने और निर्माण तोड़े जाने का प्रावधान है।

दो मंजिला दुकान में केवल एक तल का ही निर्माण किया गया, नियमानुसार दूसरी मंजिल पूर्ण नहीं होने तक सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा सकता लेकिन मिलीभगत से उसे भी कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता पवन मिश्रा ने बताया कि पहले भी इसकी शिकायत की गई थी। तब भी विभाग ने सर्वे कराया था और आर्किटेक्ट-कर्मचारियों की मिलीभगत से महकमे को वित्तीय हानि पहुंचाने की बात सामने आई थी लेकिन मामला दबा दिया गया। उनके अनुसार सेक्टर 21 सी तो वर्तमान उदाहरण है। हूडा के सेक्टरों में बनाए गए बड़े बड़े नर्सिंग होम में नक्शे से कहीं अधिक निर्माण किया गया है, पार्किंग एरिया का इस्तेमाल कार्यालय, या स्टाफ रूम की तरह किया जाता है, खुले हुए क्षेत्र पर भी छत डाल कर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। स्कूलों में भी कॉरिडोर, मैदान आदि का अतिक्रमण कर कमरे, कार्यालय आदि बना डाले गए हैं। शौचालयों के लिए निर्धारित जगह का भी अतिक्रमण कर उसे स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। बिल्डर फ्लोर में स्टिल्ट पार्किंग की जगह से लेकर फ्लोर एरिया रेश्यो का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। इसके बावजूद अधिकतर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। सर्टिफिकेट जारी करने के रेट कई बिंदुओं पर निर्भर करते हैं। जैसे कि निर्माण आवासीय में हो रहा है या व्यावसायिक भवन में, किस क्षेत्र में हो रहा है, कितने क्षेत्रफल में हो रहा है। रेट पचास हज़ार से लेकर कई लाख रुपयों तक जाता है। शिकायत होने पर छोटा मोटा जुर्माना लगा कर मामला सुलटा लिया जाता है।

दरअसल, अवैध निर्माण और कंप्लीशन का यह खेल सत्तापक्ष के नेताओं के संरक्षण में पूरे शहर में चल रहा है। हूडा सूत्रों के अनुसार अधिकतर निर्माण किसी न किसी नेता या उसके खास व्यक्तियों द्वारा कराया जा रहा है। सत्ता के दबाव में मजबूरन कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करना पड़ता है।

सत्ता से जुड़ा मामला होने के कारण यह तो तय होता है कि जांच की कार्रवाई नहीं होगी। काम के एवज में बिल्डर, अवैध निर्माणकर्ता से वसूली की जाती है, इस रकम की हिस्सापत्ती ऊपर तक पहुंचाई जाती है। पवन मिश्रा ने सीएम नायब सैनी को पत्र लिख कर कंप्लीशन सर्टिफिकेट के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार की जांच करा कर दोषी आर्किटेक्ट के लाइसेंस रद्द कराने और दलालों पर अंकुश लगाने की मांग की है।

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Mazdoor Morcha
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