हिंदुओं को जगाने का खर्च दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, हिन्दू है कि जाग नहीं रहा…

हिंदुओं को जगाने का खर्च दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, हिन्दू है कि जाग नहीं रहा…
October 16 04:33 2021

                                    विवेक कुमार

‘अच्छी सड़कें चाहिए तो पैसे देने होंगे’ यह कहना है सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सर्वे- सर्वा नितिन गडकरी का। नितिन गडकरी ने यह भी बताया है कि रोजाना 37 किलोमीटर की सड़क बना कर उन्होंने विश्व में भारत का झण्डा गाड़ दिया है। इन सब बातों के बीच जनता ने दांतों तले उंगली दबाई और मंत्री जी द्वारा मारी गई लफ्फाजियों को कंठस्थ कर व्हाट्सएप्प में भेजना शुरू किया। नेताओं द्वारा जो नहीं बताया जाता या यों कहें कि जो जनता नहीं जानना चाहती उसे जानना बहुत जरूरी है।

बीते 1 अक्तूबर को मैं अपने दो अन्य दोस्तों 63 वर्षीय प्रोफेसर बसंत और 70 वर्षीय विकास नारायण राय के साथ ऋषिकेश के ट्रिप पर चला गया। अपनी निजी गाड़ी से दिल्ली से ऋषिकेश तक के हाइवे पर फास्ट टेग लगे होने के बावजूद टोल गेट पर लंबी कतारों में इंतजार किया। एक रात ऋषिकेश में बिताने के बाद भारत सरकार की ऑल वेदर रोड का जायजा लेने के लिए हमने आगराखाल के पास स्थित खाड़ी गाँव में जाने की यात्रा आरंभ की। लगभग 50 किमी के इस सफर में दर्जनों जगह पहाड़ दरके हुए थे। पहाड़ दरकना यों तो कोई अचंभे वाली बात नहीं है पर इस रूट पर दरके पहाड़ अपने साथ हुई सरकारी बर्बरता को पूरे दम से बता रहे थे।

नरेंद्र नगर से फकोट तक के पूरे रास्ते में पहाड़ों के सिरे उधड़े पडे थे। स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था कि जिन विस्फोटकों के इस्तेमाल से पहाड़ तोड़ेे गए और फिर मलबा साफ करके सड़क का चौड़ीकरण किया गया है उसकी धमक अभी कई वर्षों तक सुनाई देती रहेगी। कहने का मतलब है कि हिमालय के तीन मुख्य भागों में एक शिवालिक जो कि सबसे निचला भाग है, में बरसात बाकी हिमालय के मुकाबले में अधिक है। विस्फोटकों के प्रयोग ने बेशक पहाड़ के सामने के हिस्से को काटकर सड़क चलने लायक कर दी है पर उस विस्फोट ने पहाड़ में भीतर तक कितनी हलचल पैदा की है इसका कोई हिसाब मंत्री जी ने नहीं लगाया न ही लगाने की जरूरत समझी।

इस लापरवाही और अधिक से अधिक सड़क बनाने के फितूर ने आमजन के जीवन को खतरे में डाल दिया है साथ ही पहाड़ को भी। हमारी यात्रा के दौरान दर्जनों जगह सड़क पूरी-पूरी टूट कर खाई में गिरी मिली। इतना ही नहीं पहाड़ से गिरे मलबे के ढेर को कई स्थानों पर बतौर सड़क प्रयोग करने पर मजबूर होना पड़ा। पहाड़ चलते-फिरते कभी भी दरक रहे थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क को चौड़ा करने का क्रम बेशक सरकार की तरफ से पूरा हो चुका है पर पहाड़ रोज कुछ न कुछ मलबा सड़क पर भेज कर हमें बताते हैं कि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।

नरेंद्र नगर पार करके ज्यों ही हम आगरखाल के लिए बढ़े तो पाया एक बादल ने पूरे पहाड़ को अपनी गिरफ्त में ले रखा है जिस वजह से लगभग जीरो विजिबिलिटी हो गई। ऐसे में सड़क किनारे और बीच में बनी सफेद मार्किंग ही एकमात्र सहारा था। घटिया स्तर की सड़क होने के नाते जगह-जगह सड़क खाई में जा गिरी थी और उसके साथ ही मार्किंग की रेखाएं भी नदारद थीं। ऐसे में गाड़ी चलाना जान देने से कम नहीं था। शाम को वापस आते समय भी पहाड़ बादलों की गिरफ्त में ही था और मार्किंग के अभाव में गाड़ी चलाने में स्थानीय ड्राइवरों तक के पसीने छूट रहे थे तो हम दिल्ली वालों की औकात ही क्या थी।

दरअसल तेज रफ्तार सड़क बनाने का फितूर और एक दिन में अधिक सड़क बनाने का जो अफीम गडकरी ने सूंघा हुआ है उसके पीछे करोड़ों रुपयों की खुशबू है। बताते चलें के यूपीए सरकार में सड़क परिवहन मंत्री रहे स्वर्गीय ऑस्कर फर्नांडीस एवं कमलनाथ के जमाने से प्रति किलोमीटर एक करोड़ की उगाही का आरोप लगता रहा है, जबकि उस समय 11 किमी सड़क रोजाना बनने का दावा था। आज यूपीए के मुकाबले तीन गुना से अधिक सड़क निर्माण है तो जाहिर है कमाई भी तीन गुना से अधिक हो चुकी है। इस तरह नितिन गडकरी भाजपा और संघ के कमाऊ पूत बने हुए हैं।

दरअसल यदि आप किसी सिविल ठेकेदार से यह पूछें कि वो एक सड़क या हाउसिंग सोसाइटी में क्या बनाना अधिक पसंद करेगा तो अधिकतर का जवाब सड़क ही होगा। इसके पीछे कारण है सड़क के नाम पर कुछ भी कह कर पैसा ले सकने का स्कोप। निगम के अधिकारी सड़क के गड्ढे भरने के नाम पर नई सड़क से ज्यादा के बिल बना लेते हैं अपनी पूरी नौकरी के दौरान। जहां-तहाँ टोल लगा कर नेता कमा लेते हैं और जनता यह तक नहीं पूछती कि क्या हुआ तेरा वादा?

दरअसल नितिन गडकरी सड़कें बना कर भाजपा के हीरो बने हुए हैं पर सच्चाई उन्ही के मंत्रालय के आंकड़ों से एकदम अलग दिखती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ‘भारत में सड़क दुर्घटना रिपोर्ट-2018’ जारी करते हुए बताया था कि सड़क दुर्घटनाओं के मामले में अमेरिका और जापान के बाद दुनिया में भारत तीसरे नंबर पर है। जबकि मौतों के मामले में 199 देशों की सूची में भारत पहले स्थान पर काबिज है। 2015 में हुए ब्राजीलिया कांफ्रेंस में भारत ने भी शपथ ली थी कि 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं को आधा करेंगे जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय ने ही अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सड़क दुर्घटना से होने वाली कुल मौतें 2011 से 2018 में हुई मौतों से 2.3 प्रतिशत बढ़ी हैं। इसमे 30.2 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं नेशनल हाईवे पर हुई हैं।

हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख सडक हादसों में हुई मौतों में 64.4 प्रतिशत मौतें सिर्फ तेज रफ्तार के कारण ही हुई हैं। जबकि तेज रफ्तार के नाम पर आधे-अधूरे हाईवे और एक्स्प्रेस वे बना कर गडकरी जेब तो गरम कर रहे हैं पर अपने ही कही हर बात को उनकी मंत्रालय के आँकड़े एक नई तस्वीर दिखा रहे हैं।

वर्ष 2017-18 में भारतमाला परियोजना कार्यक्रम शुरू हुआ जिसके तहत 34800 किमी नैशनल हाईवे बनाने का प्लान है। इसमे कुल अनुमानित लागत 5,35000 करोड़ रुपये है। वर्ष 2019-20 में सबसे अधिक 3979 किमी सड़क बनाने का भी रिकार्ड दर्ज किया गया पर यह नहीं बताया गया कि रोजाना कितनी सड़क टूटी और कितने लोगों ने अपनी जान सड़क के अधूरे कार्य व खराब गुणवत्ता के कारण गंवाई।

रफ्तार के नाम पर फास्ट टैग लगा कर पैसे वसूलने का क्रम गडकरी ने ऐसा फैलाया है कि जनता अब एक दिन में केवल फास्ट टैग से ही 104 करोड़ रुपया सरकारी खाते में जमा कर रही है। इसमे कैश और फर्जी काटे गए पैसों का हिसाब का कोई पता नहीं। जबकि ईंधन पर रोड सेस और गाड़ी लेते समय रोड टैक्स भेड़ सी भोली जनता जमा करती है, इसके बावजूद हिंदुओं को जगाने का खर्च हर जगह बढ़ता जा रहा है। इतना पैसा देने के बाद भी सच है कि भारत में कोई भी सड़क 100 किमी प्रति घंटे से अधिक चलने लायक नहीं है।

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Mazdoor Morcha
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