डॉ. रामजीलाल पृष्ठभूमि भारत में, गोपाल कृष्ण गोखले ने 18 मार्च, 1910 को विधान परिषद में ”नि:शुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा” का प्रस्ताव रखा, लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया। वर्ष 2002 के 86वें संशोधन अधिनियम ने बाद में संविधान में अनुच्छेद 21(A) जोड़ा, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अनिवार्य कर दी गई। बच्चों के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (2009)1अप्रैल, 2010 को लागू हुआ। भारत को सार्वभौमिक शिक्षा लागू करने में 100 वर्ष लग गए। हरियाणा में स्कूलों की कुल संख्या 23,924 है। इनमें 14,338 सरकारी स्कूल, 8499 प्राइवेट स्कूल, तथा 707अन्य स्कूल हैं। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस(यूडीआईएसई) 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार 23,494 निजी और सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगभग 57.8 लाख हैं। हरियाणा के सभी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या लगभग 2.6 लाख है।
सविस्तार हरियाणा में सरकारी स्कूल :14,338+707अन्य स्कूल हरियाणा के सरकारी स्कूलों की तीन श्रेणियां—प्राथमिक स्कूल, माध्यमिक स्कूल तथा माध्यमिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। भारत सरकार के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष कुमार ने हरियाणा भाजपा के राज्यसभा सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीपी वत्स के अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के पिछड़े खंडों में 139 सीबीएसई पैटर्न वाले अंग्रेजी माध्यम स्कूल, 1418 अंग्रेजी माध्यम वाले बैग-मुक्त प्राथमिक स्कूल और 36 आरोही मॉडल स्कूल हैं। इनके अतिरिक्त कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल हैं.केंद्र की पीएम-श्री योजना के तहत हरियाणा प्रदेश में 299 प्राइम मिनिस्टर स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) हैं। जबकि पूरे भारत में यह संख्या 13070 है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लैब, आईसीटी अवसंरचना, लाइब्रेरी, साइंस लैब, मूल्य आधारित शिक्षा आदि जैसी सुविधाएं हैं। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार 23,494 निजी और सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगभग 57.8 लाख हैं। हरियाणा के सभी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या लगभग 2.6 लाख है।
हरियाणा में निजी स्कूल – 8,499 हरियाणा में 8,499 प्राइवेट स्कूल हैं, जिन्हें साफ़ तौर पर तीन कैटेगरी में बांटा गया है। पहली कैटेगरी में वे मान्यता प्राप्त स्कूल हैं जो ज़रूरी स्टैंडर्ड पूरे करते हैं। दूसरी कैटेगरी में वे मान्यता प्राप्त स्कूल शामिल हैं जिन्हें सरकारी मदद मिलती है, कुल चार। तीसरी कैटेगरी में वे स्कूल हैं जिन्हें मान्यता नहीं मिली है, जिनकी संख्या 1,032 है। इन मान्यता नहीं मिले स्कूलों को सरकार ने स्टूडेंट्स को 2025 के एग्जाम में बैठने की इजाज़त दी है। इसके अलावा, वे अपने स्टूडेंट्स को एग्जाम में आसानी से बैठने के लिए मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन दे सकते हैं। उन्हें हर साल लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, साथ ही जिला अधिकारियों और शिक्षा मंत्रालय के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं, जिसकी वसूली छात्रों से फीस के रूप में की जाती है। हरियाणा के 8499 प्राइवेट स्कूलों की तीन श्रेणियां —प्राथमिक स्कूल, माध्यमिक स्कूल तथा माध्यमिक सीनियर सेकेंडरी हैं।
शिक्षा अधिकार कानून और हरियाणा सरकार के नियम 134्र हरियाणा सरकार के नियम 134्र के तहत, प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी से क्लास फस्र्ट तक शिक्षा अधिकार कानून के तहत व क्लास 2 से12 तक 134 ए के तहत गरीब बच्चों के नामांकन के लिए निजी स्कूलों को अनुदान दिया जाता है। सरकार इस नियम का ढिंढोरा तो पीटती है, लेकिन सरकार और उसके उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की हकीकत तब उजागर होती है जब हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि मंडल ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को रोष प्रकट करते हुए बताया कि शैक्षिक वर्ष 2015-16 से वर्ष 2025-26 तक के दस वर्षों के बकाया? 600 करोड़ का आवंटन किया जाना चाहिए। यह आश्चर्य जनक तथ्य उजागर हुआ है कि हरियाणा सरकार ने वर्ष 2015-16 से वर्ष 2025-2026 तक की दस वर्षों की अवधि में 9वीं से 12वीं कक्षाओं की फीस का निर्धारण नहीं किया व पोर्टल बंद पड़े हैं।
सरकारी स्कूलों की संख्या में 29 प्रतिशत गिरावट बनाम निजी स्कूलों की संख्या में 12 प्रतिशत की वृद्धि भारत के अन्य राज्यों की तरह, हरियाणा में भी सरकारी हाई स्कूलों की संख्या में गिरावट आई है और निजी स्कूलों की संख्या में वृद्धि हुई है। वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, हरियाणा ने, वर्ष 2025 में एक आरटीआई क्वेरी का जवाब देते हुए लिखा कि वर्ष 2018 से वर्ष 2025 तक सात साल की अवधि में सरकारी हाई स्कूलों की संख्या में काफी गिरावट आई है। सरकारी हाई स्कूलों की संख्या वर्ष 2018 में 1,207 से घटकर वर्ष 2025 में 858 हो गई। जबकि हरियाणा में निजी हाई स्कूलों की संख्या वर्ष 2018 में 1,877 से बढ़कर वर्ष 2025 में 2,096 हो गई। अन्य शब्दों में हाई स्कूलों की संख्या में 29 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि निजी स्कूलों की संख्या में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सरकारी हाई स्कूलों की संख्या में गिरावट का मुख्य कारण अपग्रेडेशन है। परिणामस्वरूप, सन 2018 में 2,110 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थे। सन 2018 से सन् 2025 तक अपग्रेडेशन के बाद, यह संख्या बढ़ कर सन् 2025 में 2,522 हो गई है। उधर दूसरी ओर, सन् 2018 में 1,979 निजी स्कूल थे, जबकि सन् 2025 तक यह संख्या बढ़कर 4,057 हो गई। यह वृद्धि दो गुणा से अधिक है। दूसरे शब्दों में, सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की संख्या में केवल 412 की वृद्धि हुई, जबकि 2,078 निजी विद्यालय और खुल गए।
एकल-शिक्षक विद्यालय: सन् 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 1,04,125 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहाँ प्रत्येक विद्यालय में केवल एक शिक्षक है. यह संख्या 2016-17 शैक्षणिक वर्ष में 92,275 से बढ़कर अब 1,04,125 हो गई है। शैक्षणिक वर्ष 2024-2025 के लिए एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (ष्ठढ्ढस्श्व+) की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 3.386 मिलियन छात्रों का प्रबंधन प्रत्येक विद्यालय में एक ही शिक्षक द्वारा किया जाता है। उत्तर प्रदेश में 9,508 एकल-शिक्षक विद्यालय व दिल्ली में 771 हैं। हरियाणा में शैक्षणिक सत्र वर्ष 2023 -24 में 867 एकल शिक्षक स्कूल थे व इनमें विद्यार्थियों की संख्या में, 40,828 थी। परंतु शैक्षणिक सत्र वर्ष 2024-25 में एकल शिक्षक स्कूलों की संख्या ऊंची छलाग लगा कर1066पहुंच गई तथा इनमें 43,400 विद्यार्थी ‘”शिक्षा” ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा का मूल उदेश्य विद्यार्थियों का सर्वागीण विकास करना है। क्या एकल शिक्षक स्कूलों में यह संभव है? क्या वह सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और उत्कृष्ट शिक्षा दे सकता है? क्या वह सभी विषय पढ़ा सकता है?
शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ सरकार द्वारा 36 ऐप और पोर्टल लागू किए जाने के कारण, उन पर गैर- शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा है। एक जानकारी के अनुसार, स्कूलों में एक शिक्षक को 100 से ज़्यादा शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्य करने पड़ते हैं। अगर वह उन कार्यों को सिर्फ़ स्कूल में अपनी ड्यूटी के दौरान ही पूरा करता है, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, इसलिए उसे घर पर ही समय बिताना पड़ता है, जिससे वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ ठीक से नहीं निभा पाता। अगर वह छुट्टी पर चला जाता है या सरकारी काम से ड्यूटी पर चला जाता है, तो स्कूल पर ताला लग जाता है। इस समय हरियाणा के सभी एकल -शिक्षक स्कूलों के43,400 बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर रहे हैं, जो कि संवैधानिक अधिकार का सरासर उल्लंघन है।
शिक्षकों की कमी : शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक रिक्तियां : 21 हजार से अधिक हरियाणा में स्वीकृत शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या लगभग 115,325 है। इनमें से, मार्च 2025 तक लगभग 99,666 पद भरे जा चुके थे। इसके बावजूद भी राज्य भर में 6प्राथमिक (पीआरटी: 2,557 रिक्तियां), प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी 4,583 रिक्तियां) और स्नातकोत्तर (पीजीटी 8,519 रिक्तियां)8 लगभग 15,659 पद रिक्त रह गए। इतना ही नहीं, हरियाणा के स्कूलों में हेड मास्टर के 157 पद, प्रिंसिपल के 574 पद, क्लेरिकल स्टाफ के 686 पद और क्लास 1 वी के 3254 पद खाली हैं। इस प्रकार शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक रिक्तियां 21 हजार से अधिक हैं। हरियाणा में बेरोजगार युवाओं की लगातार बढ़ती फौज के बावजूद भी स्कूलों और सरकारी विभागों में नियुक्तियां न करना जनहित में नहीं है। (समाज विज्ञानी,पूर्व प्राचार्य दयाल सिंह कॉलेज)