फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ग्रीन बेल्ट में बने शराब ठेकों को बचाने के एवज में डेढ़ लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार तो हूडा का जेई नरेश हुआ है लेकिन एसडीओ सहायक अभियंता राजपाल तब से भूमिगत है। उसका सभी संपर्क समाप्त कर गायब होना हूडा कर्मचारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि राजपाल ने भी सर्वे ब्रांच में रहकर जमकर गड़बडिय़ां की हैं और उसे डर है कि कहीं जेई नरेश उसका नाम न ले ले। यदि सैनी की विजिलेंस कामचलाऊ जांच न करके गहन छानबीन करे तो हूडा में भवन कंप्लीशन, ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट आदि के नाम पर चलने वाला बड़ा रैकेट पकड़ा जा सकता है लेकिन पकड़ेंगे नहीं क्योंकि माल मलाई में ऊपर तक के सभी लोग बराबर के हिस्सेदार हैं।
दरअसल, राजपाल हूडा के उस सर्वे ब्रांच का एसडीओ है जिसको महकमे के अधिकारियों की ऊपरी कमाई वाली सबसे बड़ी ब्रांच माना जाता है। जेई नरेश भी राजपाल के मातहत रहकर वसूलियां कर रहा था। जानकार बताते हैं कि सर्वे ब्रांच की मिलीभगत से हूडा के बिल्डर फ्लोर और स्टिल्ट प्लस चार फ्लोर वाली इमारतों में एफएआर का जमकर उल्लंघन किया जाता है, बिल्डर इस खुले एरिया मे बच्चा फ्लैट और पार्किंग एरिया में चूहा फ्लैट बना कर करोड़ों कमा रहे हैं। जाहिर है कि यह सब सर्वे ब्रांच के नरेश जैसों द्वारा वसूली किए जाने के बाद ही संभव हो पाता है।
ऊपरी कमाई का मोटा खेल कंपाउंडेबल फीस के नाम पर होता है। बताया जाता है कि खाऊ अधिकारी अतिरिक्त निर्माण के लिए नाम मात्र की कंपाउंडेबल फीस की रसीद काटते हैं और पूरे शुल्क की आधी रकम मेज के नीचे से वसूली जाती है। बिना या अधूरे निर्माण के लिए ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट, ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी कर बहुत मोटी कमाई भी होती है। हूडा के लगभग सभी सेक्टरों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण के अलावा रेहड़ी पटरी दुकानदारों से हफ्ता वसूली के जरिए अच्छी खासी कमाई होती है। यदि राजपाल के कार्यकाल में हूडा द्वारा जारी किए गए ओसी, कंप्लीशन सर्टिफिकेट आदि की गहनता से जांच की जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। यदि विजिलेंस गंभीरता से जांच करेगी तो भ्रष्टाचार की कड़ी काफी ऊपर तक पहुंची नजर आएगी।