फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एसीबी (भ्रष्टाचार निरोध ब्यूरो) के एसपी अनिल का तबादला हो गया और उनकी जगह भारती दबास ने कार्य-भार सम्भाल लिया है। इस अदला-बदली को ‘मज़दूर मोर्चा’ के गतांक में ‘रिश्वतखोरी की जांच में ही हो गई रिश्वतखोरी!’ शीर्षक से प्रकाशित खबर से जोड़कर देखा जा रहा है। गतांक में प्रकाशित खबर में बताया गया था कि भारत कॉलोनी गांव के निवासी राजू ने डीटीपी कार्यालय में 23 जून को उसका मकान नहीं तोड़े जाने का विरोध प्रकट किया था। इस पर डीटीपी राहुल सिंगला ने पीडि़त को कहा कि वह उसके ड्राइवर इरशाद से जाकर बात कर ले। इसी बात को, तोड़-फोड़ के लिए नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट मुसफीक ने भी दोहराते हुए पीडि़त को ड्राइवर से मिलने के लिए कहा था।
दफ्तर के बाहर बैठे ड्राइवर से जब पीडि़त ने मुलाकात की तो उसने सात लाख रुपये की मांग रखी। जिसको दे पाने में पीडि़त ने असमर्थता जताई। कुछ देर सौदेबाज़ी के बाद फिलहाल एक लाख और बाकी बाद में देने की बात तय हो गई तो पीडि़त एक लाख रुपये लाने की बात कह कर चला गया। रुपये लाने के साथ-साथ उसने एसीबी में भी शिकायत दर्ज करा दी। इस पर कार्रवाई करते हुए एसीबी ने ड्राइवर इरशाद को एक लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
पूरे मामले में साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि ड्राइवर, जो खुद ठेकेदारी में कच्ची नौकरी कर रहा है, की कोई औकात नहीं कि वह सात लाख रुपये की मांग कर सके। उसके पास कोई अधिकार नहीं कि वह किसी का कुछ बना या बिगाड़ सके। दूसरी ओर पीडि़त के अनुसार डीटीपी ने खुद उसे ड्राइवर के पास भेजा था। इससे स्पष्ट हो जाता है कि डीटीपी ने खुद रुपये मांगने के बजाय यह काम अपने ड्राइवर के द्वारा कराया था। इसी के आधार पर एसीबी ने डीटीपी को गिरफ्तार करने की पूरी तैयारी कर ली थी। लेकिन आखिरी वक्त में एसीबी ने पैतरा बदलते हुए मामले को केवल ड्राइवर तक ही सीमित रखने का विचार बनाया। इसी पैंतरेबाजी को लेकर, डीटीपी द्वारा एक करोड़ की रिश्वत दिए जाने की चर्चा गर्म हो गई। हो सकता है ये चर्चा गलत हो। लेकिन मामले के हालात पीडि़त के बयान तथा खुद ड्राइवर की हैसियत ये मानने को मजबूर करती है कि एक करोड़ की चर्चा में दम तो है। वैसे भी ड्राइवर पर बनाया गया यह केस अदालत में कहीं ठहरने वाला नहीं है। इसके बदले यदि ड्राइवर को सरकारी गवाह बना कर डीटीपी को लपेटा जाता तो केस शत-प्रतिशत श्रेय चढऩे वाला होता। अब देखना है कि नई एसपी मैडम भारती दबास केस को किस दिशा में लेकर जाती हैं?