फरीदाबाद (म.मो.) हरियाणा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव महावीर सिंह ने 27 सितम्बर को जि़ला शिक्षा अधिकारी ऋतु चौधरी को रूल 8 के तहत चार्जशीट किया है। उनके इस पत्र की विशेषता यह है कि पत्र के आरम्भ में तो तारीख 17 सितम्बर व अन्त में 27 सितम्बर लिखी है। यानी प्रधान सचिव के लिये इन दस दिनों के हेर-फेर का कोई महत्व नहीं है।
अब इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य मंडलायुक्त संजय जून द्वारा प्रधान सचिव को लिखा वह पत्र है जिसमें उन्होंने ऋतु चौधरी के विरुद्ध मनगढंत व निराधार आरोप लगाए हैं। सुधी पाठक इसमें दी गई तिथियों पर विशेष ध्यान देवें।
मंडलायुक्त संजय जून ने बतौर चेयरमैन फीस व फंड रेगुलेटरी कमीशन 15 जुन 2021 को एक अद्र्ध सरकारी पत्र प्रधान सचिव महावीर सिंह को लिख कर शिक्षा अधिकारी ऋतु के विरुद्ध आरोप लगाया कि वह सही तरीके से काम नहीं करती, कहना नहीं मानती, आरटीआई का बहुत काम लम्बित पड़ा है। यहां पर समझने वाली बात यह है कि बतौर जि़ला शिक्षा अधिकारी ऋतु चौधरी प्रथम अपील ऑथोरिटी हैं न कि राज्य जनसूचना अधिकारी। बतौर अपील ऑथोरिटी उनका कोई काम लम्बित नहीं है।
जिस लम्बित काम को मंडलायुक्त जि़ला शिक्षा अधिकारी के गले में डालना चाहते हैं, वह बड़ा अजीब है। जिस एफएफआरसी के चेयरमैन मंडलायुक्त हैं उसमें फरीदाबाद, पलवल और नूह के जि़ला शिक्षा अधिकारी व जि़ला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदस्य होते हैं यानी कि टोटल छ: शिक्षा अधिकारी व एक भाड़े पर रखा चार्टेड एकाऊंटेंट सदस्य होता है। आरटीआई के मामले में चेयरमैन खुद प्रथम अपील ऑथोरिटी होते हैं और राज्य जनसूचना अधिकारी इन उक्त सात सदस्यों में से किसी एक को बनाते हैं। इस मामले में उन्होंने दिनांक 17 जून 2021 को ऋतु चौधरी को जनसूचना अधिकारी बना दिया। जबकि वे चाहते तो किसी भी जि़ला मौलिक शिक्षा अधिकारी अथवा उप जि़ला शिक्षा अधिकारी को भी यह काम सौंप सकते थे।
विदित है कि ऋतु चौधरी जि़ला शिक्षा अधिकारी प्रथम अपील ऑथोरिटी होने के साथ-साथ ‘डाईट’ व जि़ला मौलिक अधिकारी का कार्यभार भी अतिरिक्त रूप से सम्भाले हुए थीं। ऐसे में उनके लिये जनसूचना अधिकारी का काम कर पाना असम्भव था।
संजय जून ने 18 जून को प्रथम अपीलीय सुनवाई करने के लिये दो दिन पहले यानी 16 जून को जिला शिक्षा अधिकारी को बतौर जनसूचना अधिकारी बुलावा भेज दिया। यहां गौरतलब है कि 17 जून को तो उन्हें जनसूचना अधिकारी बनाये जाने का पत्र जारी होता है और 18 जून को उन्हें बतौर जनसूचना अधिकारी तलब कर लिया जाता है। जाहिर है ऐसे में शिक्षा अधिकारी को मामले से सम्बन्धित किसी बात का ज्ञान नहीं हो सकता था, लिहाज़ा उन्होंने सम्बन्धित सहायक को अपनी जगह भेज दिया। उस दिन मंडलायुक्त ने अपनी व्यस्तता के चलते दोनों पक्षों की हाजिरी लगाकर अगली डेट पत्र द्वारा सुचित कर दिये जाने का आदेश पारित कर दिया था। इस सारे मामले से स्पष्ट होता है कि ऋतु चौधरी पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हो रहा।
जहां तक ऋतु चौधरी के काम करने या न करने का सवाल है तो इसका विश्लेषण करना भी बहुत जरूरी है। ऋतु चौधरी ने जब यहां का कार्यभार सम्भाला तो उनका सारा कार्यालय अस्त-व्यस्त तो था ही, भ्रष्टाचार का भी पूरा बोलबाला था। स्कूल शिक्षक का कोई भी काम बाबू लोग बिना रिश्वत लिये करने को तैयार नहीं होते थे। इसके लिये शिक्षक प्राय: दूर-दूर से स्कूल छोड़कर बाबूओं के चक्कर ही लगाते रहते थे। जब भी किसी शिक्षक की पदोन्नति अथवा एसीपी लगनी होती थी तो उसके लिये आवश्यक वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट का फाइल में लगा होना आवश्यक होता है। लेकिन बाबू लोग शिक्षकों को तंग करने व पैसे झाडऩे के लिये उनकी रिपोर्ट को गायब कर देते थे।
ऋतु चौधरी ने आते ही सबसे पहले उन फाइलों को तलब किया जिनमें गोपनिय रिपोर्ट गायब थी। इसका समाधान करने का उन्होंने एक नया फार्मूला तैयार कर दिया। अपने जि़ले के दोनों ब्लॉक बल्लबगढ़ और फरीदाबाद में बाकायदा कैंप लगाकर अपने हस्ताक्षरों से नई गोपनिय रिपोर्ट तैयार कर दी जिससे तमाम शिक्षक बहुुत खुश हुए। उनकी यूनियन ने जब ये बात राज्य मुख्यालय में जाकर बताई तो निदेशक महोदय ने यही फार्मूला पूरे राज्य में लागू करा दिया। जाहिर है इससे राज्य भर के शिक्षक धन्य हो गये। मेडिकल बिल सेवा निवृत शिक्षक अपनी बीमारी के बिलों की वसूली के लिये बार-बार बाबूओं के चक्कर लगाने को मजबूर रहते थे। सोचिये, 70-80 साल के वृद्ध एवं बीमार लोगों के लिये इस तरह के चक्कर लगाना कितना दुखदायी हो सकता है। ऋतु चौधरी ने आते ही आदेश दिया कि किसी भी बिल पर उनसे पूछे बगैर कोई आपत्ति न लगाई जाये और तमाम लम्बित बिल उनके सामने लाये जायें। सैंकड़ों लम्बित बिलों में से तीन-तीन साल पुराने बिल भी शामिल थे। ऋतु ने इन तमाम बिलों को एक झटके में साफ करके लोगों की पेमेंट करा दी। छात्र-छात्राओं को बांटने के लिये सरकार की ओर से खरीदी गई सैंकड़ों साइकिलें उन्हें न देकर एक कमरे में बंद कर दी गई। वर्षों तक ये साइकिलें पड़ी जंग खाती रही लेकिन अंधी-बहरी सरकार के किसी भी कान पर जूं नहीं रेंगी। उन साइकिलों को ठीक-ठाक करा कर बच्चों में ऋतु चौधरी ने बीते कुछ समय पहले ही बांटा था। इसके अलावा बड़ी संख्या में पाठ्य पुस्तकें व साइंस लेबोरेट्री का सामान भी, जो वर्षों से कमरों में पड़ा सड़ रहा था, उसे भी ऋतु चौधरी ने ही आकर सम्भाला।
इसी जून-जुलाई के महीने में हरियाणा सरकार अपने स्कूलों में बच्चे के दाखिले बढ़ाने के लिये युद्ध स्तर पर प्रयासरत थी तो ऋतु चौधरी ने बिना शनिवार-रविवार देखे गांव-गांव मुहल्ले-मुहल्ले भाग-दौड़ करके पिछले वर्ष के मुकाबले 26000 छात्र अधिक भर्ती कराये जो अपने आप में एक रिकार्ड है।
इस सबके बावजूद भी प्रधान सचिव ने बिना दिमाग का इस्तेमाल किये केवल मंडलायुक्त संजय जून के कहने मात्र पर जि़ला शिक्षा अधिकारी को चार्जशीट कर दिया। क्या यही ईमानदार व मेहनती अधिकारी का इनाम है?