करनाल (मज़दूर मोर्चा) कुकुरमुत्तों की तरह नित नए उगने वाले हिन्दूत्व वादी संगठनों ने एक नया नाम, ‘जागों हिन्दू जागो सेना’ नाम से यहां प्रकट हुआ है। दिल्ली धमाके को लेकर इसने 13 नवम्बर को जिला सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए जम कर साम्प्रदायिक जहर उगला। इन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि दिल्ली कार बम ब्लास्ट की घटना के विरोध में एक जोरदार रोष प्रदर्शन आयोजित किया गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि दिल्ली कार बम ब्लास्ट में निर्दोष हिंदुस्तानी नागरिकों की हुई हत्या राष्ट्र के खिलाफ एक साजिश है। यह घटना हिंदुस्तान-विरोधी गजवा-ए-हिन्द की सोच का हिस्सा है, जिसे पूरे देश को एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए। संगठन प्रमुख ने कहा कि दिल्ली बम ब्लास्ट से यह साफ हो चुका है कि आतंकवादियों का नेटवर्क अब भारत में गहरी जड़ें जमा चुका है। डॉक्टर पेशे से जुड़े गिरोह सहित कई विदेशी नेटवर्क भारत में सक्रिय हैं, जो सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
इन ‘देशभक्तों’ ने यह नहीं बताया कि वोट पाने के नाम पर पुलवामा कांड कराने वालों को क्या कहा जायेगा। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि उस कांड के दोषी कौन थे और उनके विरूद्ध क्या कार्रवाई की गई। इस बात की क्या गारंटी है। दिल्ली विस्फोट के पीछे भी कोई राजनीतिक षडयंत्र नहीं है? स्थानीय निगरानी की अपील करनाल समेत हरियाणा के सभी प्रमुख शहरों में संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। संगठन ने कहा कि बाहरी राज्यों से आकर बसने वाले लोगों की गहन जांच, पहचान और सत्यापन किया जाना चाहिए ताकि किसी भी साजिश को समय रहते विफल किया जा सके। यहां सवाल पैदा होता है कि क्या पुलिस अभी तक अपने इस दायित्व को नहीं निभा रही थी। यदि ऐसा है तो इसके लिए भाजपा सरकार नहीं तो कौन जिम्मेदार है।
देशव्यापी आतंक नेटवर्क पर चिंता व्यक्त संगठन ने यह भी कहा कि स्क्रिप्टेड आतंकी मॉड्यूल — जो पाकिस्तान से पुलवामा, फिर उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक सक्रिय रहा — अब भारत के कई हिस्सों में फैल चुका है, जो बेहद चिंताजनक है। हरियाणा की फरीदाबाद समेत कई जगहों पर भी ऐसे नेटवर्क के ऑपरेशन के संकेत मिल चुके हैं। सवाल फिर वही पैदा होता है कि आखिर सरकार इस मामले में कर क्या रही है। क्या यह उसका दायित्व नहीं है कि ऐसे मामलों से समय रहते निपटें?