फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) आला अधिकारियों और विधायकों के तलुए चाटने और विकास कार्यों में उनके लिए मोटी हिस्सापत्ती जुटाने में माहिर नगर निगम के एक्सईएन नितिन कादियान की हालत आजकल धोबी के कुत्ते की तरह हो गई है। दरअसल वह चक्की के दो पाट यानी विधायक अदलखा और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को पटाने की कोशिश कर रहा था, समझा जा सकता है कि चक्की के पाटों के बीच फंसने पर गेहूं को पिसना ही पड़ता है, यही कादियान के साथ हो रहा है।
सब जानते हैं कि बडख़ल विधायक धनेश अदलखा केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर गुट का है। गूजर और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के बीच की टशन जगजाहिर है। नगर निगम मुख्यालय बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में होने के कारण भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड बनाने वाला धनेश अदलखा खुद को निगम का बॉस समझता है और निगमायुक्त से लेकर चीफ इंजीनयिर, एक्सईएन, एसडीओ, जेई आदि को सीधे फोन कर आदेश देता है। आला अधिकारियों के लिए सोने के बिस्कुट, महंगी जॉनीवाकर शराब, आईफोन, पांच लाख के लहंगे आदि की व्यवस्था कराने में माहिर कादियान को भ्रष्टाचार शिरोमणि धनेश अदलखा की शरण में जाने से करोड़ों के वारे न्यारे करने की संभावनाएं नजर आईं तो वह भी एसडीओ सुरेंद्र हुड्डा, अमित चौधरी की तरह अदलखा की गोद में जा बैठा था।
नगर निगम में अदलखा की बढ़ती दखलंदाजी को खत्म करने के लिए विपुल गोयल ने बीते तीन-चार महीने पहले कई एक्सईन, एसडीओ, जेई आदि को फरीदाबाद से बाहर भिजवाया था। खेले खाए एसडीओ सुरेंद्र हुड्डा और अमित चौधरी ने वक्त की नजाकत देख कर तुरंत पाला बदल लिया और कैबिनेट मंत्री की शरण ली। हाल ही में सुरेंद्र हुड्डा को किसी महफिल में अपने खास लोगों के बीच यह कहते हुए सुना गया कि मंत्री के पीए प्रशांत तो ट्रांसफर रुकवाने के लिए बीस लाख से नीचे पर राजी नहीं था, बड़ी मुश्किल में पंद्रह लाख रुपये देकर जान छुड़ाई, अमित चौधरी को भी यहीं बने रहने के लिए बारह से पंद्रह लाख रुपये प्रशांत साहब को देने पड़े।
हुड्डा की बातों में कितनी सच्चाई है यह तो प्रशांत और सुरेंद्र हुड्डा ही जानें, क्योंकि ऐसे मामलों में न तो लेने वाला कहता है कि उसने लिया और न ही देने वाला कुबूल करता है कि दिया, लेकिन हुड्डा और अमित चौधरी का ट्रांसफर रुक जाना दाल में कुछ काला होने की ओर इशारा कर रहा है। खैर, हुुड्डा और चौधरी तो विपुल गोयल की गोद में जा बैठे लेकिन सूखा नशा करने के आदी नितिन कादियान को अदलखा ने कहा कि कैबिनेट मंत्री क्या होता है मैं तुम्हारा तबादला रुकवाता हूं, बस इस पर कादियान अदना से विधायक को कैबिनेट मंत्री से ज्यादा ताकतवर समझ बैठा। उसका अंदाजा कुछ ठीक भी निकला, जब अदलखा ने सीएम नायब सैनी के पैर पकड़ कर अपने कमाऊ और बोझा ढोऊ गधे को बचाने की गुहार लगाई। सीएम ने नितिन कादियान के लिए नॉट टू बी ट्रांसफर पत्र लिख दिया। पत्र पाकर तो कादियान अदलखा को भगवान मान बैठा और उसके लिए खुल कर खेल करने लगा।
बताया जा रहा है कि इधर जब विपुल गोयल को अदलखा के खेल का पता चला तो उसने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर नितिन कादियान को सबक सिखाने का पक्का बंदोबस्त कर दिया। कैबिनेट मंत्री के इस अमोघास्त्र के आगे सीएम का एनटीबीटी लैटर भी बेअसर साबित हुआ और अदलखा को भी अपनी शक्तियों की औकात पता चल गई। बताया जा रहा है कि निगम की बहुत मोटी कमाई और महंगे सूखे नशे का मुफ्त इंतजाम होने के कारण कादियान बेचैन हो उठा और फरीदाबाद नगर निगम नहीं छोडऩे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गया। अदलखा की औकात तो उसे पता चल ही गई, चहेते ठेकेदारों ने समझाया कि जाकर विपुल गोयल के पैर पकड़ ले अगर बचना चाहता है।
समझने वाली बात है कि करोड़ों रुपये के गढ़ में बने रहने के लिए खाली हाथ तो किसी को भी राजी नहीें किया जा सकता। बताया जा रहा है कि इस बार भी कैबिनेट मंत्री का पीए प्रशांत आगे आया और पच्चीस से तीस लाख रुपये में बात बनी, लेकिन केवल रुपये ही काफी नहीं थे, यह भी शर्त रख दी गई कि अगर फरीदाबाद नगर निगम में रुकना है तो बडख़ल विधानसभा छोडऩी होगी, यानी वहां किसी तरह का काम नहीं मिलेगा। मरता क्या न करता, राजी होना पड़ा। अब बताया जा रहा है कि कादियान की इस हरकत से विधायक धनेश अदलखा भी उससे नाराज हो गया है, कैबिनेट मंत्री तो पहले से ही नाराज था, यानी बेचारा कादियान घर का रहा न घाट का।