धान खरीद घोटाले की फाइल कैसे हुई गायब:मान

धान खरीद घोटाले की फाइल कैसे हुई गायब:मान
April 06 17:27 2026

करनाल(जेके शर्मा) करनाल जिले में धान खरीद से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले के बीच अब ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। घोटाले से संबंधित अहम फाइल के डीसी कार्यालय से गायब होने की खबर ने न केवल जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिला प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही को भी सीधे कटघरे में ला खड़ा किया है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा है कि धान खरीद व्यवस्था में जिला उपायुक्त चेयरमैन की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसानों की फसल, सरकारी खरीद और हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन से जुड़े मामले की फाइल का सीधे डीसी कार्यालय से गायब होना साधारण प्रशासनिक चूक मानने से इनकार किया जा रहा है। किसान संगठनों ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने जिला प्रशासन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जब इतने बड़े धान घोटाले की चर्चा पहले से पूरे प्रदेश में हो रही थी, तब उससे जुड़ी फाइल का गायब होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत की कमाई से जुड़े इस मामले में यदि रिकॉर्ड ही सुरक्षित नहीं हैं, तो पूरी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

रतन मान ने कहा कि हजारों करोड़ के कथित धान घोटाले के बाद अब डीसी कार्यालय से फाइल गायब होना प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता और मिलीभगत है। जिला प्रशासन को बताना होगा कि रिकॉर्ड किसकी निगरानी में था, किस स्तर पर रखा गया था और आखिर यह कैसे गायब हुआ। किसान यह जानना चाहते हैं कि कहीं जि मेदारों को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही। सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार गायब हुई फाइल में धान खरीद, भुगतान, स्टॉक सत्यापन, परिवहन रिकॉर्ड और प्रशासनिक नोटिंग जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल थे। ऐसे में फाइल के गायब होने से पूरे मामले की जांच की दिशा और निष्पक्षता पर गहरा असर पड़ सकता है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि प्रशासन के मुख्य कार्यालय से ही इतने अहम दस्तावेज गायब हो जाते हैं, तो किसानों को न्याय और पारदर्शिता का भरोसा कैसे दिया जा सकता है। जिले में इस मुद्दे को लेकर किसानों में भारी रोष है और इसे बड़े आंदोलन का रूप देने की भी चेतावनी दी गई है।

रतन मान ने साफ कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई और जि मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो किसान संगठन सडक़ों पर उतरने को मजबूर होंगे। फाइल में थे सत्तासीन नेताओं के नाम रतन मान ने कहा कि जानकारी मिली है कि इस फाइल में सत्तासीन नेताओं के राइस मिलों की गड़बडिय़ों का लेखजोखा भी था। उन्होंने पावर की आड़ में जमकर लूट मचाई और अपने राइस मिलों में फर्जी धान की खरीद दिखाकर घोटाला किया। राजनीतिक लोगों के नाम उजागर न हों इसलिए भी फाइल को गायब किया गया है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि हजारों करोड़ के धान घोटाले की फाइल आखिर डीसी कार्यालय से ही क्यों गायब हुई? धान खरीद के चेयरमैन होने के नाते डीसी क्या जवाब देंगे? रिकॉर्ड की सुरक्षा और निगरानी किस अधिकारी के जिम्मे थी? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या सच दबाने की कोशिश? किसानों के हक और सार्वजनिक धन की जवाबदेही कौन तय करेगा? धान घोटाले के बाद फाइल गायब होना सिर्फ चूक नहीं, पूरे प्रशासन पर गंभीर सवाल है। किसान सच सामने आने तक चुप नहीं बैठेंगे।

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Mazdoor Morcha
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