करनाल (मज़दूर मोर्चा) करनाल में धान घोटाले की जड़े कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले में खुद शिकायतकर्ता रहे बड़े अधिकारी ही अब आरोपों के घेरे में हैं। हैफेड के जिला प्रबंधक (डीएम) कृपाल सिंह पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
डीएम पर आरोप है कि उन्होंने धान सीजन के दौरान तैनात रहे हैफेड प्रबंधकों से कमीशन के रूप में मोटी रकम वसूली थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए डीएम कृपाल सिंह ने एएसजे रजनीश – कुमार शर्मा की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सरकारी पक्ष और आरोपी पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी अधिकारी की को खारिज कर दिया। उप जिला न्यायवादी सचिन कुमार ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट के समक्ष मजबूत साक्ष्य रखे गए, जिसके आधार पर कोर्ट ने जमानत न देने का फैसला सुनाया। फिलहाल, जमानत याचिका खारिज होने के बाद पुलिस कृपाल सिंह की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। कोर्ट द्वारा धान घोटाले से जुड़े अन्य मामलों में भी तेजी से सुनवाई की मामले की पृष्ठभूमि काफी चौंकाने वाली है। नवंबर 2025 में सीएम फ्लाइंग ने असंध की राधे-राधे राइस मिल और अग्रवाल एंड सन्स राइस मिल में फिजिकल वेरिफिकेशन की थी। इस दौरान करीब 9 करोड़ रुपये की कीमत का हजारों क्विंटल धान कम पाया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले के सामने आने पर 11 नवंबर को खुद डीएम कृपाल सिंह ने ही एफआईआर दर्ज करवाई थी। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि कृपाल सिंह ने निसिंग और असंध मंडी में तैनात हैफेड मैनेजर्स प्रमोद कुमार व दर्शन सिंह से कमीशन के रूप में हजारों रुपये लिए थे। इसके बाद वह खुद इस मामले में आरोपी बन गए।
धान सीजन के दौरान करनाल की मंडियों में तैनात कईअधिकारियों, मंडी सचिवों, आढ़तियों और राइस मिलर्स ने मिलकर करोड़ों के घोटाले को अंजाम दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि मंडियों में धान आए बिना ही कागजों में खरीद दिखा दी गई। इस खेल में ट्रांसपोर्टरों की भी अहम भूमिका रही। करनाल पुलिस की गहन जांच के चलते अब तक कई मंडी सचिव, राइस मिलर्स, आढ़ती, हैफेड अधिकारी, खाद्य आपूर्ति विभाग के डीएफएससी, इंस्पेक्टर और प्राइवेट ऑपरेटर जेल की हवा खा रहे हैं।