फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भारी मात्रा में पकड़ी गई शराब थाना सूरजकुंड के मालखाने में जमा कराई गई थी। जिस एसएचओ अनिल कुमार की जिम्मेवारी इस जब्त किए गए माल की रखवाली करनी थी, उसी ने इसमें सेंधमारी करके इसे बेच खाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उक्त चुनाव के दौरान राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संदीप चौहान को यहां बतौर ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया था। उन्होंने कई कैंटर शराब पकड़ कर थाना सूरजकुंड में जमा कराई थी। थाने के माल खाने में पर्याप्त स्थान न होने के चलते जब्त किए गए इस माल को थाने के निकट ही स्थित कमरों में सील बंद कर दिया था। बताया जाता है कि अधिकतर शराब मशहूर डिम्पल ठेकेदार की थी।
अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए एसएचओ अनिल कुमार ने इस माल को धीरे-धीरे बेचना शुरू कर दिया। इस काम के लिए उसने गांव अनंगपुर वासी राहुल शर्मा उर्फ ताजी से पांच लाख रुपये लेकर सारा माल उसके हवाले कर दिया था। बताया जाता है कि एसएचओ के इशारे पर कमरे की सील तोडऩे में एसीपी का रीडर सुरेन्द्र और एसएचओ का ड्राइवर राजीव भी शामिल रहे थे। भारी मात्रा में माल बिक जाने के बाद, बताया जाता है कि सुरेन्द्र काफी घबरा गया तो उसने इसकी सूचना अपने एसीपी अभिमन्यु गोयत को दे दी। अपुष्ट खबरों के अनुसार, इस चोरी को लेकर पूरे थाने में जब चर्चा गर्म होने लगी थी तो सुरेन्द्र ने ही आगे बढ़ कर भलाई लेने का प्रयास किया था। थाने के ही कुछ कर्मचारियों का यह भी कहना है कि इसकी सूचना डीसीपी एनआईटी कुलदीप कुमार को किसी कर्मचारी ने भी दे दी थी।
भेद खुल जाने पर एसएचओ ने चतुराई दिखाते हुए दिनांक 25 दिसम्बर 2024 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 303, 324(4)के तहत मुकदमा नम्बर 770 दर्ज करके उसी राहुल को गिरफ्तार कर लिया। यह एफआईआर थाने के मोहर्रर तालिब हुसैन के द्वारा दर्ज कराई गई। इसमें कहा गया है कि थाने में स्थानाभाव के चलते 49 पेटी शराब कार नम्बर डीएल 3सी बीएल 3090 में रख दी गई थी जिसका शीशा तोड़ कर राहुल शर्मा सारा माल चुरा कर ले गया। ये $फर्जी मुकदमा दर्ज करके एसएचओ ने राहुल को गांव में ही चार-पांच डंडे मार कर सुबह-सवेरे गिरफ्तार करके दोपहर तक अदालत में पेश करके जमानत करा दी।
विदित है कि चोरी के मामले में माल की बरामदगी के लिए पुलिस जमानत कराने की बजाय रिमांड हासिल किया करती है। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया, जाहिर है कि राहुल पर दर्ज मुकदमा व गिरफ्तारी केवल दिखावा मात्र ही है। जानकार बताते हैं कि एसएचओ राहुल पर दबाव बना रहा है कि वह पुलिस की कहानी के समर्थन में चोरी को स्वीकार कर ले। उधर राहुल, जो सामने आने से तो बच रहा है लेकिन उसके परिजनों के मुताबिक वह अपने पांच लाख वापस मांगने के साथ-साथ अपनी पिटाई का मुआवजा भी चाहता है। सौदेबाजी अभी चल रही है देखो मामला कहां टिकता है?
आईपीएस अधिकारी चौहान ने वास्तव में कुल कितनी शराब जब्त करके थाने में जमा कराई थी, इसकी पूरी जानकारी बेशक ‘मज़दूर मोर्चा’ के पास नहीं है, लेकिन यह थाने के रिकॉर्ड में उपलब्ध है। जानकारों का कहना है कि इसकी कीमत 50-60 लाख रुपये तक कुछ भी हो सकती है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब का चोरी हो जाना और वह भी थाने के मालखाने से, यह कोई छोटा अपराध नहीं है। इस अपराध के लिए एसएचओ का तबादला मात्र कर देना पर्याप्त नहीं है। इस मामले में एसएचओ के विरुद्ध न केवल पुलिस एक्ट बल्कि अपराध संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। सवाल तो थाने के सुपरवाइज़री अफसरों पर भी बनता है। यदि उनके अधीन एक थाने का एसएचओ इतना बड़ा अपराध कर रहा है तो ये अफसर कैसी सुपरवाइज़री कर रहे हैं?
नशे का धंधा करने वालों से भी एसएचओ की है सांठगांठ माल खाने की शराब बेचने के अतिरिक्त एसएचओ अनिल का एक बड़ा धंधा जायदादों पर कब्ज़े कराना भी रहा है। इसके लिए गांव अनंगपुर में ही तीन हजार वर्ग गज पर अवैध कब्जा कर बनाए गए एक बड़े से मकान में गुंडा-गिरोह का अड्डा चलता है। इस मकान पर आईटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) के वीरेन्द्र यादव नामक अधिकारी का कब्ज़ा है। बताया जाता है कि यह आईटीबीपी अधिकारी जूडो का कोच भी रह चुका है और किसी जमाने में एसएचओ अनिल इससे कोचिंग लेता रहा था। जानकारों का तो यहां तक भी कहना है कि इसी कोच की कोचिंग की बदौलत अनिल अपनी इस तैनाती तक पहुंच पाया है। इस मकान का इस्तेमाल नशे का अवैध कारोबार करने में इस्तेमाल किया जाता है, दिल्ली को भेजी जाने वाली अवैध शराब, गांजा, अफीम, आदि का स्टाक इसी मकान में रखा जाता है, फिर यहां से भेजा जाता है। गांव वालों के मुताबिक इनके घर के बाहर सदैव आगन्तुकों के छोटे-बड़े वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। इनमें से अधिकतर असामाजिक तत्व ही होते हैं। यहीं बैठ कर तमाम तरह की आपराधिक योजनाएं बनाई जाती हैं। शायद ही कोई दिन ऐसा जाता होगा जिस दिन एसएचओ के दो-चार चक्कर यहां न लगते रहे हों, वह रात को सोते भी इसी मकान में थे। जाहिर है कि इस डेरे पर एसएचओ का पूरा नियंत्रण रहता था। अपने असर व रसूख का हवाला देकर वीरेन्द्र यादव ने गांव के अनेकों युवकों को पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर अच्छी-खासी रकमें वसूल रखी हंै। मजे की बात तो यह है कि रकम देने वाले इस डर के मारे मुंह नहीं खोलते कि कहीं भांडा फूट जाने पर सारा खेल ही न बगड़ जाए। इसी का $फायदा उठा कर यहां लूट कमाई का मोटा धंधा चल रहा है।
जायदादों पर कब्जे कराने के लिए एसएचओ ने गुंडा गिरोह भी पाल रखा है हाल ही में ज़मीन कब्जे का एक ताज़ा मामला सामने आया है। जिसमें एसएचओ अनिल ने मोटे पैसे खाकर प्लॉट के असल मालिकान को विरोधी पक्ष से पिटवाया भी और नाजायज कब्ज़ा भी करवा दिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार गांव अनंगपुर के जोहडिय़ा मोहल्ला निवासी उमेश की अनंगपुर गांव में 1500 गज बेशकीमती जमीन है, यह जमीन उन्होंने नरेश के परिवार जनों से खरीदी थी। बीते शुक्रवार को गांव के पिछपट्टी मोहल्ला निवासी दबंग नरेश पुत्र रूपी, सूरज अपने 50-60 हथियारबंद महिला-पुरुष समर्थकों के साथ इस जमीन पर कब्जा कर बाउंड्री करने लगे। उमेश कुमार को इसका पता चला तो उन्होंने भाइयों और परिवार के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंच कर बाउंड्री बनाने का विरोध किया, इस पर दबंगों ने उन लोगों पर कुल्हाड़ी, फावड़ा, लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में उमेश के चाचा और दो भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। जान बचाने के लिए भागे तो हमलावरों ने पथराव कर उनकी गाडिय़ां भी तोड़ डालीं। 112 पर कॉल की तो सबको सूरजकुंड थाने बुलाया गया। थाने पर पुलिस ने उमेश से जमीन के कागजात मांगे जो उसने पेश कर दिए लेकिन हमलावर पक्ष से न कुछ मांगा और न ही उससे कुछ कहा बल्कि शिकायतकर्ता के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर लिया। आरोप है कि घायलों को बीके अस्पताल पहुंचाने के बाद से पुलिस ने कुछ नहीं किया। इस मामले में पुलिस का कर्तव्य केवल इतना ही बनता था कि वह हमलावर पक्ष के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार करती और पीडि़त पक्ष को सुरक्षा प्रदान करती, लेकिन बिके हुए पुलिस अधिकारी ने चंद रुपये मिलने पर हमलावरों का कब्जा बहाल रहने दिया।