करो या मरो की तर्ज पर हक की लड़ाई लड़ेंगे करनाल । चालीस साल से न्याय की तलाश में भटक रहे घरौंडा हलके के ऊॅंचा समाना गांव के गरीब परिवारों द्वारा गांव के बाहर दिया जा रहा धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। चार दिन तक उनका धरना जारी रहेगा। अभी तक राजनीतिक दलों ने उनका साथ नहीं दिया हैं। पांच दिन बाद वह इस्लाम धर्म का पालन कर सकते है।
दूसरे दिन धरना दे रहे परिवारों की अगुवाई राजकुमार कौशिक ने की। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है। आजादी के 78 साल बाद भी हम आजाद नहीं है। गरीब परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी डा. आंबेडकर द्वारा बनाए संविधान का फायदा गरीब लोगों को नहीं मिल रहा है। सरकार ने भले ही गरीब लोगों को घर बनाने के लिए प्लाट दिए लेकिन इन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया। आरक्षण के बल पर बड़े पद पर पहुंचे अफसर भी अपने वर्ग को न्याय दिलवाने की बजाए उनको प्रताडि़त कर रहे हैं। चालीस साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे दलित तथा ब्राह्मण समुदाय के परिवारों ने निराश होकर हिंदू धर्म छोड़ कर मुस्लिम धर्म को अपनाने का निर्णय लिया हैं। यह परिवार अब प्रशासन को जगाने के लिए धरना शुरू कर चुके हैं। धरना देने वालों में महिलाएं बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं, उनके हाथों में तख्तियां हैं।
करनाल जिले के ऊंचा समाना गांव के दर्जन भर से अधिक गरीब परिवार सरकार, प्रशासन द्वारा सुनवाई नहीं करने से परेशान हैं। इस गांव के दो परिवार ऐसे हैं जिन्हें 1984 में बीस सूत्री कार्यक्रम के तहत 100 -100 गज के प्लाट आवंटित किए गए थे लेकिन आज तक कब्जा नहीं दिलाया गया है।
यह परिवार राष्ट्रपतिं एपीजे अब्दुल कलाम, मौजूदा राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधामंत्री में अटलविहारी बाजपेई, नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्रियों में बंसी लाल से लेकर नायाब सिंह सैनी तक सबसे मिल चुके हैं। इन आला हस्तियों के आदेशों के बाद भी प्रशासन भू माफिया से लाभार्थियों की जमीन मुक्त करा उन्हें नहीं दिला पाया है। कब्जाधारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत थाना मधुवन में मामला दर्ज होने के छह साल बाद भी पुलिस ने आज तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। फरियादियों का कहना है कि आरोपियो को स्थानीय एमएलए और डीएसपी का आशीर्वाद प्राप्त हैं।
डीएसपी ने उल्टे फरियादियों के खिलाफ पर्चा दर्ज करवा दिया। धरना स्थल पर राजकुमार, सूरज भान, देवी, कुलदीप, रोशनी, आशा, कोमल, कविता, तथा जोगिंद्रो सहित तमाम गांव वाले शामिल थे।