फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बडख़ल पुल के नीचे अतिक्रमण ढहाने बीते सोमवार को पहुंचे नगर निगम तोडफ़ोड़ दस्ते के ठेका जेई हर्ष चपराना ने एक किशोर को न सिर्फ मां-बहन की गालियां बकीं बल्कि उसे थप्पड़-घूंसों से भी पीटा। यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ लेकिन किसी पुलिस वाले ने हर्ष को मारपीट करने से नहीं रोका बल्कि उल्टे किशोर को ही पकड़ लिया, लेकिन नाबालिग देख धमकी देकर भगा दिया।
सवाल यह है कि सरकारी कर्मचारी हर्ष चपराना को किसी पर हाथ उठाने का अधिकार किसने दिया। यदि किशोर तोडफ़ोड़ का विरोध कर रहा था या बाधा बन रहा था तो उसे संभालने के लिए इतना बड़ा पुलिस बल मौजूद था, किशोर को काबू करना उनका काम था न कि हर्ष चपराना का। किशोर का आरोप है कि तोडफ़ोड़ करने आया हर्ष उन लोगों को गालियां बक रहा था, विरोध किया तो हर्ष मारपीट करने लगा। यह पहली बार नहीं है कि जब हर्ष ने आम लोगों के साथ मारपीट की हो। पाठकों को याद दिला दें कि जनवरी 2025 में बडख़ल, परमधाम मंदिर के पास रहने वाले संदीप शर्मा से उनकी दीवार नहीं तोडऩे के एवज में एसडीओ राजेश शर्मा और जेई हर्ष चपराना उनसे पांच लाख रुपये मांग रहे थे। उन्होंने रिश्वत देने से मना किया तो बिना नोटिस और आला अधिकारियों के आदेश के ही ये दोनों शराब के नशे में धुत्त होकर जेसीबी लेकर दीवार तोडऩे पहुंच गए थे। संदीप शर्मा ने विरोध किया तो हर्ष ने उन्हें भी खतरनाक धमकियां दीं थीं।
उन्होंने पुलिस बुला ली, अनखीर पुलिस दोनों को चौकी ले गई जहां नशे में धुत्त हर्ष ने पुलिस वालों के सामने संदीप को धमकाया था कि ‘मैं यहीं मेवला महराजपुर का रहने वाला हूं अभी पांच सौ लड़के बुलाकर तुम लोगों की हड्डियां तोड़ूंगा देखें तुम्हें कौन बचा पाएगा। मेवला का नाम आते ही पुलिस भी बैकफुट पर आ गई थी। संदीप शर्मा ने दोनों पर पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने और मारने की धमकी देने का आरोप लगाया लेकिन पुलिस मामले को रफा दफा करने में जुट गई थी। इस मामले की जानकारी तत्कालीन पुलिस आयुक्त को भी हुई लेकिन वह भी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सके थे। यही नहीं नवंबर 2025 में इसी हर्ष चपराना ने कांग्रेस नेत्री शालिनी चोपड़ा को मारने के लिए चप्पल उठा ली थी। शालिनी चोपड़ा सेक्टर 28 में लगने वाली अवैध रेहडिय़ों को जगह उपलब्ध कराने और नगर निगम द्वारा उनकी पर्ची काटे जाने की मांग कर रही थीं। इन रेहड़ी पटरी वालों से हर्ष का भाई संदीप चपराना उगाही करता था, इसलिए शालिनी चोपड़ा पर हर्ष सहित 6-7 गुंडों के साथ हमला बोल दिया था, वो तो अच्छा हुआ कि उन्हीं दुकानदारों ने बीच बचाव कर गुुंडों से महिला को बचाया था, इस मामले में भी पीडि़ता पुलिस आयुक्त तक से मिलीं लेकिन चपराना बंधुओं के खिलाफ केस दर्ज नहीं हुआ।
दरअसल, हर्ष चपराना यह दुस्साहस इसलिए कर पाता है कि उसकी नौकरी चाचा केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने एचकेआरएन के तहत लगवा रखी है। यही कारण है कि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद लोकसभा चुनाव में हर्ष चाचा गूजर की चुनावी रैलियों में खुल कर शामिल होता रहा और उनका प्रचार करता दिखा। हालांकि सरकारी कर्मचारी का किसी राजनीति रैली में शामिल होना प्रतिबंधित है लेकिन सत्ताधारी चाचा का साथ हो तो निगमायुक्त तक की कार्रवाई की औकात नहीं। हर्ष की दबंगई सिर्फ आम लोगों के साथ ही नहीं है, निगम में भी उसकी गुुंडागर्दी चल रही है। वह अधिकारियों से कहता है कि जब तक चाचा गूजर मंत्री हैं और उनका चेला धनेश अदलखा बडख़ल विधायक रहेगा किसी माई के लाल की हिम्मत नहीं है कि मुझे तोडफ़ोड़ शाखा से हटवा सके, विपुल गोयल भले ही महकमे का मंत्री हो, लेकिन चलेगी चाचा गूजर और अदलखा की ही।
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि तोडफ़ोड़ शाखा निगम की हराम कमाई का सबसे बड़ा स्रोत है। समझा जा सकता है कि महज 33 हजार रुपये वेतन पाने वाला हर्ष चपराना कैसे दबंगों की पसंद काले शीशे वाली सफेद थार पर घूमता है। नगर निगम सूत्रों के अनुसार चपराना बंधु कृष्णपाल गूजर के इतने करीबी हैं कि नगर निगम चुनाव में गूजर ने संदीप चपराना को अपने वार्ड से पार्षद उम्मीदवार बनवाया और उसे जितवाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। यह बात अलग है कि केंद्रीय मंत्री से परेशान उनके वार्ड की जनता ने उनके प्यादे संदीप को हरा कर अपनी नाराजगी जताई थी। संदीप की हार को कृष्णपाल गूजर की हार बता कर विपक्षी आज भी मजाक उड़ाते हैं।
खडगटा जी पहले ओमदत्त की अवैध डेयरी बंद करवाओ निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने हाल ही में करीब 750 डेयरियों को शहर से बाहर करने का आदेश सुनाया। उनके आदेश पर सोमवार को बल्लभगढ़ में तीन डेयरियों का चालान काटा गया। निगमायुक्त महोदय पहले अपने एक्सईएन ओमदत्त के घर में चल रही अवैध डेयरी बंद करवाइए। फर्जी इंजीनियर ओमदत्त ने तो सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बाकायदा दीवारे बनाकर अपनी डेयरी बना रखी है। उसकी गायों का गोबर और बाकी गंदगी नाली में बहाए जा रहे हैं। सरकारी कर्मचारी शहर में डेयरी चलाए, गंदगी नालियों में बहाए तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं, ऐसे में आम आदमी की डेयरी का चालान किया जाना नाइंसाफी है।