back to homepage

विश्लेषण

“नरेंद्र भाई के नेतृत्व में गुजरात ने चौतरफा प्रगति की है। जरा सोचिए अगर वह पूरे देश का नेतृत्व करें तो कैसा रहेगा…

मोदी से सवाल पूछकर तो दिखायें रतन टाटा यूसुफ किरमानी (वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक)   देश के तमाम लोग ‘तनिष्क’ के हिन्दू-मुस्लिम एकता को दर्शाने वाले विज्ञापन की वजह

Read More

पुलिस के साये में बलात्कार!

पुलिस के साये में बलात्कार! विकास नारायण राय (पूर्व डायरेक्टर, नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद)   पुलिस को अपनी अथॅारिटी थोपने और आत्म-सम्मान की रक्षा की जितनी पड़ी होती है, काश

Read More

फिर घेराव हुआ, फिर वही पुलिस; लेकिन इस बार पुलिस ने मालिकान को धमकाया और कहा कि यदि कल तक वेतन नहीं दिया तो उन्हें हवालात में बंद कर देगा

एस्कॉर्टस यूनियन की गोद में बैठ कर आई एचएमएस सतीश कुमार (सम्पादक : मजदूर मोर्चा)  फरीदाबाद शहर की सबसे बड़ी भारी-भरकम यूनियन के रूप में उभर कर आया सत्तर के

Read More

कोरोना काल में मोदी के लिए आलीशान विमान…

कोरोना काल में मोदी के लिए आलीशान विमान यूसुफ किरमानी (वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष विमान को टक्कर देने वाले

Read More

क्या उत्तर प्रदेश किसी जातिवादी विस्फोट के मुहाने पर खड़ा है? योगी शासन का शायद यही मानना है।

पुलिस इन्वेस्टीगेशन में जातिवाद के लिए जगह नहीं विकास नारायण राय (पूर्व डायरेक्टर, नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद) क्या उत्तर प्रदेश किसी जातिवादी विस्फोट के मुहाने पर खड़ा है? योगी शासन

Read More

जुझारूपन की पूर्ति संसाधनों  से नहीं हो सकती…

  सतीश कुमार (सम्पादक : मजदूर मोर्चा)   एस्कॉर्ट यूनियन के माध्यम से एचएमएस की ओर मेरे बढने से पहले ‘सीटू’ संस्मरण का उल्लेख करना जरूरी समझता हूं। इमरजेंसी हटने

Read More

6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में हुई जिस घटना को सैकड़ों पत्रकारों ने अपनी नंगी आंखों से देखा हो, उसमें अदालत को कोई साजिश नहीं दिखी

बहुसंख्यक सनातनी भारतीय लोकतंत्र के लिए बनते जा रहे हैं चुनौती यूसुफ किरमानी (वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक)   हाथरस गैंगरेप, हत्या और और बाबरी मस्जिद गिराये जाने पर आया

Read More

कहते हैं ब्रिटिश राज ने दुनिया भर में फैले अपने औपनिवेशिक साम्राज्य को चलाने के लिए उतना पुलिस की गोली-लाठी का सहारा नहीं लिया जितना अपनी अदालतों और कानूनों का

6 दिसम्बर 1992, यानी न्याय का विध्वंस विकास नारायण राय (पूर्व डायरेक्टर, नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद) सरकारों के मुंह पर पुलिस का खून तो लगा ही हुआ था अब अदालतों

Read More

संसाधन बढ़ते गये, यूनियन डूबती गयी…

  सतीश कुमार (संपादक, मजदूर मोर्चा)   अपनी मेहनत का वाजिब दाम पाने के लिये जब संगठित मज़दूर संघर्ष करने लगता है तो उसे संसाधनों की जरूरत पडऩा लाजमी है।

Read More

गुप्त एजेंडे वाले गुप्तेश्वरों को राजनीति में आने से रोकने की जरूरत…

  यूसुफ किरमानी (वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक)   आंखों में आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस बनने का सपना लाखों युवक भारत में हर साल देखते हैं और इनमें कुछ सौ

Read More