फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचारी अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त करने की तैयारी करने वाली सरकार की नजर में नगर निगम के केवल चार अधिकारी ही भ्रष्ट हैं। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उपायुक्त विनोद सिंह की ओर से जारी संभावित 47 भ्रष्टाचारी अधिकारियों की सूची में फरीदाबाद नगर निगम के कार्यकारी अभियंता महेंद्र सिंह, फर्जी डिग्री वाले एक्सईएन पद्मभूषण, एक्सईएन सुशील कुमार और सहायक अभियंता सुरेंद्र कुमार का ही नाम शामिल है। सचिव ने इन अधिकारियों की पूरी सर्विस बुक, पिछले दस साल की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट, प्रॉपर्टी रिटर्न का पिछले दस साल का डिटेल मांगा है। यह भी पूछा गया है कि यदि इन अधिकारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या चार्जशीट तो पेंडिंग है तो उसकी डिटेल दी जाए। यदि इनके खिलाफ कोई शिकायत, एफआईआर, विजिलेंस जांच या आपराधिक केस पेडिंंग हो तो उसकी भी जानकारी दी जाए। खास बात यह है कि सचिव ने यह सारी जानकारी बीती 21 फरवरी तक आवश्यक रूप से उपलब्ध कराने का आदेश दिया था लेकिन निगम में यह पत्र आते ही स्थापना शाखा इंचार्ज सृष्टि बब्बर लंबी बीमारी से ग्रस्त हो गईं और कोई अधिकारी यह नहीं बता पा रहा कि सचिव को यह रिपोर्ट भेजी गई है या नहीं।
समझा जा सकता है कि जिस नगर निगम में पांच लाख का लहंगा पहन कर सोने के बिस्कुट डकारने वाली निगमायुक्त से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार व्याप्त हो वहां से भ्रष्टाचारियों की सूची शायद ही भेजी जाए। बहुत मुमकिन हो कि सरकार की नजर में भ्रष्टाचारी ये अधिकारी किसी गूजर, अदलखा के पैर पकड़ लें, उनके लिए निगम में कुछ भी करने की कसमें खाएं और उनकी कृपा से रिपोर्ट कभी भेजी ही ही न जाए। ताज्जुब तो इस बात का है कि उक्त जानकारी मांगने वाला मुख्यालय अभी तक अपने अधिकारियों की कारगुजारियों से ही अनभिज्ञ बैठा है, क्या ये वार्षिक रिपोर्ट संपत्ति का ब्यौरा प्रति वर्ष भेजने की प्रथा मुख्यालय में भेजनी बंद कर दी गई है। विदित है कि सरकारी कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट व अन्य जानकारियां भेजने का रुटीन हमेशा से ही रहा है। वास्तव में यह सब ड्रामेबाजी है पता सबको सबका है।