‘बेटे’ ओमदत्त की ‘विपुल’ पीड़ा नहीं दूर कर पा रहे मंत्री गूजर

‘बेटे’ ओमदत्त की ‘विपुल’ पीड़ा नहीं दूर कर पा रहे मंत्री गूजर
October 05 07:21 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अंबाला में वनवास झेल रहा भ्रष्टाचार के कीर्तिमान गढऩे वाला फर्जी डिग्री धारक एक्सईन ओमदत्त, बताया जा रहा है कि फरीदाबाद न सही पलवल, नूंह या गुडग़ांव ही आने को छटपटा रहा है। बेटे ओमदत्त की इच्छापूर्ति के लिए पिता समान केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने पूरी ताकत झोंक रखी है लेकिन बताया जा रहा है कि महकमे के मंत्री विपुल गोयल के मुकाबले उनकी एक नहीं चल पा रही है। बावजूद इसके बेटे के लिए पिता सीएम नायब सैनी से लेकर भाजपा आलाकमान और आरएसएस में अपने संपर्कों को इस्तेमाल कर बेटे को मनचाहा नगर निगम दिलाने की बेकार सी कोशिश में जुटे हैं।

कृष्णपाल गूजर केंद्र में टुच्चू सा मंत्री होते हुए भी खट्टर राज में प्रदेश की राजनीति और खासकर फरीदाबाद के प्रशासन में बड़ा दखल रखते थे। इसका एक कारण यह भी था कि अधिकतर विधायक भी गूजर के आगे नतमस्तक रहते थे। नगर निगम में तो गूजर की तूती बोलती थी क्योंकि सारे जेई, एक्सईएन यहां तक कि निगमायुक्त तक सब गूजर के इशारे पर या उनकी मूक सहमति पर रखे जाते थे। दो सौ करोड़ के घोटाले में फंसी पूर्व निगमायुक्त सोनल गोयल तो यहां से हटाए जाने के बावजूद गाहे बगाहे गूजर के यहां हाजिरी देकर विजिलेंस जांच आदि के प्रकोप से बचती रही हैं।

खट्टर राज में नगर निगम में एक से बढ़कर एक घोटाले हुए, पूर्व चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर की गिरफ्तारी के बाद लूट कमाई का काम फर्जी डिग्री वाले इंजीनियर ओमदत्त ने संभाल लिया। केंद्रीय मंत्री गूजर को पिता कहने वाले ओमदत्त ने इस रिश्ते का जमकर लाभ उठाया। दस दिन में आठ सौ स्ट्रीट लाइटें लगाने का नामुमकिन काम हो या नए नए शामिल किए गए 24 गांवों में विकास के नाम पर लूट करनी हो सब ओमदत्त हथिया लेता। बडख़ल विधानसभा यानी विधायक सीमा त्रिखा के इलाके में तोडफ़ोड़ के नाम पर उगाही करनी हो या विकास के नाम पर गूजर के चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाने का काम, ओमदत्त चुटकियों में करता था। ऐसा नहीं है कि वह कभी जांच में नहीं फंसा, लेकिन हर बार पिता समान केंद्रीय मंत्री गूजर ने अभयदान दिला दिया। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने की सजा का ठीकरा एक कच्चे कर्मचारी पर फोड़ कर ओमदत्त को बचा लिया गया। नगर निगम में तो कहा जाने लगा था कि जो काम कोई भी एक्सईएन लेने की हिम्मत न जुटा पाए वो ओमदत्त खुशी खुशी करता है, समझना मुश्किल नहीं है कि अन्य एक्सईएन या इंजीनियर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की जांच मेें फंसने के डर से ऐसे काम लेने से बचने का प्रयास करते थे।

विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता बदली और नायब सैनी सीएम बने तो सुभाष सुधा को स्थानीय निकाय मंत्री बनाया गया। ओमदत्त की लूट कमाई देख मंत्री जी ने उसे निलंबित कर दिया लेकिन दो सप्ताह बाद ही बहाल कर दिया, समझा जा सकता है कि मंत्री ने बिना जांच पूरी हुए किस कारण उसे बहाल किया होगा। विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा कराई गई वोट चोरी के बल पर भाजपा एक बार फिर से सत्ता में आई और प्रदेश उपाध्यक्ष रह कर पार्टी में अच्छी पकड़ बना चुके विपुल गोयल की भी पांंच साल के बाद सत्ता में वापसी हुई तो उन्होंने रसूख का इस्तेमाल कर स्थानीय निकाय मंत्रालय हासिल कर लिया। मंत्रालय हाथ में आते ही उन्होंने नगर निगम फरीदाबाद मेंं गूजर-त्रिखा के खास इंजीनियरों को खुड्डे लाइन लगाया। सबसे पहले ‘गूजर पुत्रÓ ओमदत्त को अंबाला भेजा तो मंत्री के आदेश मानने में देरी करने पर एक्सईएन बीके कर्दम को भी हिसार भेज दिया।

बताया जाता है कि मंत्री के इशारे पर अंबाला में भी उसे खुड्डे लाइन ही लगाया गया और बेकार से विभाग का चार्ज देकर कागज काले पीले करने के काम दे दिए गए। हर महीने लाखों- करोड़ों का खेल करने वाले ओमदत्त को सूखी तनख्वाह वो भी घर से ढाई सौ किलोमीटर दूर, से बेचैनी होने लगी। बताया जाता है कि अच्छे दिन लौटाने और घर वापसी के लिए बेटा ओमदत्त पिता समान गूजर के घर के चक्कर काटता रहा।

भ्रष्ट पुत्र के मोह में डूबे गूजर ने सरकार मेें अपने करीबी मंत्री संतरी से लेकर संघ के कद्दावर कार्यकर्ताओं से बेटे का दुख दूर करने की गुहार लगाई, यहां तक कि सरकार में बैठे चिंटू अधिकारियों तक को फरमान सुनाया। अधिकारियों ने प्रयास किए तो पता चला कि यह केस तो मंत्रायल प्रमुख यानी विपुल गोयल खुद ही देख रहे हैं तो किसी अधिकारी की हिम्मत न हुई। बताया जाता है कि सहयोगियों और संघियों से भी गोयल ने हाथ जोड़़कर इस केस में सिफारिश न करने का निवेदन कर उन्हें टाल दिया। बताया जा रहा है कि खुड्डे लाइन लगाए जाने से परेशान ओमदत्त तो अब यह मान चुका है कि विपुल गोयल के रहते उसी फरीदाबाद निगम यानी कि घर वापसी नहीं हो सकती, इसलिए वह नूंह, पलवल या गुडग़ांव में ही तबादला कराने के लिए लालायित है और मंत्री गूजर से लगातार मदद मांग रहा है। बेटे का गम से तड़पते गूजर अपने आप को इस काम में पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैँ।

पांच साल सत्ता से बाहर रह कर ऊंचे स्तर के भाजपाइयों-संघियों से बेहतर रिश्ते स्थापित कर चुके विपुल गोयल अब मजबूती और खामोशी के साथ गूजर की जड़ें खोदने में लगे हैं, इसमें उनका सहयोग तिगांव विधायक मंत्री राजेश नागर और पृथला विधायक मंत्री गौरव गौतम भी दे रहे हैं। यह तिकड़ी फिलहाल तो प्रशासनिक स्तर पर गूजर को पैदल करने में जुटी है, आने वाले लोकसभा चुनाव में यदि गूजर को फिर टिकट मिला तो यह तिकड़ी उन्हें राजनीतिक रूप से भी सड़क पर ला सकती है।

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Mazdoor Morcha
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