बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आसान नहीं डगर पुराने नेताओं की टिकट मिलने की

बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आसान नहीं डगर पुराने नेताओं की टिकट मिलने की
February 21 01:31 2023

बल्लभगढ़ (विकास भारत शर्मा) किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता का सपना होता है विधायक बनने का व विधायक का सपना होता है मंत्री बनने का और हमेशा के लिए इसी पद पर रहने का। यदि पिछले चुनाव पर नजर डालें तो यह बात सही दिखाई देती है कि वर्तमान में कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा पिछली बार विधायक बने व इस बार विधायक बन मंत्री पद पर विराजमान हुए। पहले कार्यकाल में मोदी लहर का बहुत बड़ा योगदान उनकी जीत में रहा था। दूसरी बार वे टिकट लेने में कामयाब हुए व ब्राह्मण कोटे से मंत्री बने। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने दूसरी विधानसभा का उम्मीदवार यहां भेजा लेकिन वह कांग्रेस के परंपरागत वोट को लेने में ही सफल हो पाए। जबकि पहली बार विधानसभा चुनाव लडऩे वाले एक निर्दलीय उम्मीदवार ने अठारह हजार से अधिक मत लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा इस वोट का जिक्र कई बार मंच से कर चुके हैं।

निर्दलीय उम्मीदवार का इतना अधिक मत ले जाना कहीं कैबिनेट मंत्री की घटती लोकप्रियता को तो नहीं दर्शाता है? पूर्व विधायक शारदा राठौर के चुनाव न लडऩे का फायदा भी मूलचंद शर्मा को हुआ क्योंकि शारदा उस समय भाजपा मे थी व दूसरी विधानसभा से टिकट की दावेदारी कर रही थी फिलहाल अब शारदा राठौर कांग्रेस में है। वह बल्लभगढ़ विधानसभा में ज्यादा सक्रिय हो रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शारदा के पार्टी बदलने से उनके राजनीतिक भविष्य पर फर्क पड़ सकता है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वोटरों का शारदा पर विश्वास कम हुआ है। वर्तमान में बल्लभगढ़ विधानसभा की स्थिति देखते हैं तो उसमें कांग्रेस व भाजपा की टिकट मांगने वाले कई दावेदार हैं। कांग्रेस के तो दावेदार स्पष्ट दिखाई दे रहे है। कांग्रेस में तो अलग अलग गुट के नेता आलाकमान के सामने अपनी टिकट की दावेदारी प्रस्तुत करेंगे। लेकिन भाजपा में अभी टिकट मांगने वाले गुमनाम हैं जो आने वाले चुनावों में एकाएक टिकट की दावेदारी करने आलाकमान के सामने आएंगे। क्योंकि अभी पार्टी के शासन में होने के कारण मलाई खाने में मस्त हैं व अपनी दावेदारी नहीं दिखा रहे हैं।

भाजपा व कांग्रेस अपने पुराने नेताओं को छोडक़र नए नेताओं पर दाव लगा सकते हैं दोनों पार्टियों में पुराने नेता कई साल सत्ता का सुख भोग कर काफी बदनाम हो चुके हैं। दोनों पार्टियों में कई नेता जमीनी धरातल पर कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पहले से अधिक मजबूत है। पिछले चुनावों में भाजपा ने 75 पार का नारा दिया था लेकिन वह अपने बलबूते पर सरकार नहीं बना सकी।
बल्लबगढ़ विधानसभा में कांग्रेस टिकट के दावेदार बहुत हैं। क्योंकि कार्यकर्ताओं को लगता है कि हवा उनके पक्ष में है। कांग्रेस व भाजपा में पुराने नेताओं की टिकट में कई युवा नेता रोड़े बन सकते हैं व अपनी दावेदारी दिखा सकते है। जनता भी बार-बार पुराने नेताओं को देखना पसंद नहीं करती है और चाहती है कि किसी दूसरे नेता को आगे बढऩे का मौका मिलना चाहिए। कांग्रेस व भाजपा को यदि पुराने नेताओं के अलावा कोई भारी नेता नहीं मिलता है तो वह दूसरी विधानसभा से जिताऊ उम्मीदवार को ला सकती है। बल्लभगढ़ विधानसभा में मुकाबला मुख्यत: कांग्रेस व भाजपा के बीच होना दिख रहा है।

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Mazdoor Morcha
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