पलवल (म. मो.) हरियाणा विधानसभा चुनावों में स्वामी दयानंद सरस्वती की एंट्री हो चुकी है। जी हां अंधविश्वास, पाखंड, घृणा फैलाने वाले वोटों के सौदागरों को स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम की भी ज़रूरत पड़ गई है। दो दिन पहले हिसार भिवानी की चुनावी सभाओं में देश के सबसे अधिक झूठ बोलने वाले, अंधविश्वास फैलाने वाले, पाखंडी व समाज को जाति व धर्म के नाम पर बांटने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी लाभ के लिए चौधरी बंशीलाल के हवाले से महर्षि दयानंद सरस्वती नाम लेकर हरियाणा के आर्य समाजियों को लुभाने का नाकाम प्रयास किया है। बीजेपी (पूर्व जनसंघ) हो या आरएसएस, इनकी विचारधारा में स्वामी दयानंद सरस्वती कभी फिट नहीं बैठते थे। स्वामी दयानंद सरस्वती जिस सनातन वैदिक धर्म के उद्धारक थे वह संघियों के सनातन धर्म से विचारधारा के आधार पर एक दम विपरीत है।
स्वामी दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों से संघ की विचारधारा का कभी मेल हो ही नही सकता। हरियाणा के समाज में आर्य समाजी प्रभाव को देखते हुए उनके नाम को लेकर कांग्रेस भी पीछे नहीं रही उनके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को चुनावी सभाओं में स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम का उल्लेख करना पड़ा जबकि स्वामी दयानंद सरस्वती की विचारधारा कांग्रेसी विचारधारा से भी एक दम भिन्न है। स्वामी दयानंद सरस्वती की विचारधारा पर तो आज के आर्य समाज के तथाकथित आर्यसमाजी नेता भी नही चल रहे हैं। इसके मंचों पर वास्तविक आर्य समाजी कहीं दिखाई ही नहीं देते हैं उनकी जगह आर्य समाज में संघी घुसपैठियों ने ली हुई है जिनका आर्य समाज के नियम व सिद्धांतों से कोई लेना देना नही है। देखना होगा कि स्वामी दयानंद के अनुयायी वोटो के सौदागरों की बातों में कितना आयेंगे।