पलवल (मज़दूर मोर्चा) हरियाणा की सिद्धांतहीन राजनीति के प्रतीक हर्ष कुमार एक बार फिर अपनी फितरत से मजबूर बीजेपी में जा पहुंचे। मजदूर मोर्चा के पाठक पिछले कई वर्षों से अवसरवादी राजनीति के चेहरे हर्ष कुमार की अवसरवादी राजनीति के बारे में पढ़ते आ रहे हैं। पिछले वर्ष हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की लहर को देखते हुए ये दलबदलू कांग्रेस में शामिल हुए थे तथा खुलकर किशन पाल गूजर के धुर विरोधी महेंद्र प्रताप के लिए दिन रात एक किए हुए थे। विधानसभा चुनावों में टिकट न मिलने पर कांग्रेस के विरोध में बीजेपी के पक्ष में काम करने लगे। बीजेपी की सरकार बनने पर उसके विधायक हरेंद्र सिंह के माध्यम से किशन पाल गूजर से संबंध बनाने के लिए बहुत प्रयास कर रहे थे साथ में मुख्यमंत्री तक अपना संपर्क बनाना चाहते थे।
हरेंद्र सिंह ने उनकी जीत में हर्ष कुमार द्वारा निभाई गई भूमिका का अहसान उतारने के लिए किशन पाल गूजर से लेकर मुख्यमंत्री तक से सिफारशि कर हर्ष कुमार को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल करवाने के भरसक प्रयास किए। इस प्रयास में वे आंशिक रूप में सफल तो हुए और उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाने में भी कामयाब हुए लेकिन जिस तरह से सदस्यता दी गई उससे दलबदलू सम्राट हर्ष कुमार को सम्मान तो दूर उल्ट क्षेत्र में उनकी बेइज्जती को चर्चा का विषय बनी हुई है।
हुआ यह कि जब मुख्यमंत्री होडल में हुई जनसभा में मंच पर गए तो हर्ष कुमार को पार्टी में शामिल करने की घोषणा की गई लेकिन मुख्यमंत्री ने न तो हर्ष कुमार को पार्टी का पटका पहनाया न ही अपने संबोधन में उनके पार्टी में शामिल होने पर उनका स्वागत किया। जबकि इससे पहले हर्ष कुमार ने विधानसभा चुनावों में उनके द्वारा बीजेपी के प्रत्याशी हरेंद्र सिंह को जितवाने में की गई अपनी मेहनत का खूब बखान किया था । सत्ता का स्वाद कितना मधुर होता है इसका उदाहरण देखिए लोकसभा चुनावों में हर्ष कुमार ने जिस किशन पाल गूजर को पानी पी-पीकर कोसा था उसी किशन पाल गूजर को अपने घर चाय पर आमंत्रित कर चाटुकारिता करने लगे।