अर्श से फर्श पर धड़ाम हुआ धनेश अदलखा फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनआईटी तीन दशहरा मैदान से सैनिक कॉलोनी तक एलिवेटेड रोड बनवाने का जुमला फेकने वाले बड़बोले बडख़ल विधायक धनेश अदलखा को सौ दिन में ही अपनी औकात का अहसास हो गया है। मंगलवार को उन्होंने पत्रकारों को बताया कि अब नीलम चौक से सैनिक कॉलोनी तक की सड़क की मरम्मत करवाएंगे, यानी एलिवेटेड रोड उनका जुमला था। हालांकि अभी भी उनका बड़बोलापन नहीं गया है, उन्होंने एक महीने में मरम्मत कार्य पूरा कराने का दावा कर दिया। इसमें 3 करोड़ 82 लाख रुपये खर्च होना बताया। करीब चार किलोमीटर लंबे रास्ते की मरम्मत के नाम पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने की घोषणा में जानकारों को भ्रष्टाचार साफ नजर आ रहा है, जानकारों के मुताबिक यह काम पचास लाख रुपयों का भी नहीं है।
धनेश अदलखा ने चुनाव जीतते ही नगर निगम, एफएमडीए, खाद्य आपूर्ति विभाग आदि के अधिकारियों के साथ ताबड़तोड़ बैठकें कर डाली थी। विधायक पद की शपथ लेने से पहले ही उन्होंने बडख़ल विधानसभा के सभी नाले-नालियां और सीवर चार दिन में साफ करने का फरमान सुना दिया था। घाघ अधिकारी जानते थे कि अभी सरकार से बजट जारी नहीं हुआ है और जो काम दस साल में नहीं हो सका वह चार दिन में नहीं होना है, बावजूद इसके अदलखा की हां में हां मिलाते रहे लेकिन पीठ पीछे उसकी बेवकूफी का खूब मजाक उड़ाते। ये निकम्मे अधिकारी सही साबित हुए, अदलखा ने सौ दिन के भीतर सभी पार्कों को बेहतरीन करने, सड़कों का गड्ढा मुक्त करने आदि न जाने कितने दावे किए, सौ दिन बीत गए लेकिन कोई काम पूरा नहीं हुआ होना भी नहीं था।
विधायक की सबसे ज्यादा भद तो उनके एलिवेटेड रोड की घोषणा पर पिट रही है। उन्होंने सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए बिना कोई सर्वे, अध्ययन कराए सीएम सैनी को पत्र लिख कर दशहरा मैदान से सैनिक कॉलोनी तक एलिवेटेड रोड बनवाने की मांग कर डाली थी। मज़दूर मोर्चा ने 28 अक्तूबर 2024 के अंक में ‘अदलखा ने विधायक बनते ही लूट कमाई की योजना लॉंच की शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर पहले ही बता दिया था कि यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ेगा। हुआ भी वही, सीएम सैनी ने उनके पत्र को रद्दी के टोकरे फेक दिया। बताया जाता है कि इज्जत बचाने के लिए अदलखा सीएम के सामने रोया-गाया तो सड़क मरम्मत की इजाजत मिली।
हरियाणा फार्मेसी काउंसिल अध्यक्ष पद पर रहते हुए पांच करोड़ की हेराफेरी करने के गुर में माहिर अदलखा ने मरम्मत में भी लूट कमाई की गुंजाइश निकाल ली। जानकारों के अनुसार मरम्मत के नाम पर कई करोड़ रुपये डकार लिए जाएंगे। उनके अनुसार नीलम से लेकर बीके और मैट्रो चौक तक तारकोल की सड़क है इसमेेंं शायद ही कहीं गड्ढे हों। मेट्रो चौक से दशहरा मैदान ईएसआई चौक होते हुए मस्जिद चौक तक आरएमसी सड़क है, इसमें भी कोई बहुत बड़ा पैच नहीं है। हां, सेंट्रल वर्ज की स्कर्टिंग नहीं की गई है, यह काम तो उस ठेकेदार का है जिसने आरएमसी रोड बनाई थी।
मस्जिद चौक से बिजली निगम के सब स्टेशन के बीच ही सड़क में छोटे-मोटे गड्ढे हैं, यह जगह बमुश्किल पचास मीटर भी नहीं है, अगर इसे नई तरह से बनाया जाए तो भी चार-छह लाख से ज्यादा का खर्च नहीं है। मरम्मत के नाम पर चंद गड्ढे भरने के लिए 3 करोड़ 82 लाख रुपये बहुत ज्यादा हैं। हां, यह जरूर है कि ईएसआई चौक से मस्जिद चौक तक सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण है, जिसके कारण अक्सर जाम के हालात बने रहते हैं, यदि अतिक्रमण हटा कर सड़क को चौड़ा कर दिया जाए तो कोई समस्या ही न रहे। यह करने में कमाई तो होगी नहीं, वोटर भी नाराज हो जाएंगे इसलिए मरम्मत की योजना बनाई गई है।
नगर निगम की वित्त कमेटी का सदस्य रहते हुए अदलखा को मालूम है कि ज्यादा लूट कमाई किस मद में और कैसे हो सकती है और भ्रष्टाचार भी न खुले, अपनी इसी कला का इस्तेमाल अब वह विधायक बनने के साथ कर रहे हैं। एलिवेटेड रोड पर मुंह की खाने के बावजूद उन्होंने दावा किया कि एनआईटी एक, दो, तीन और पांच में सभी नाले फिर से बनवाएंगे, यानी इनमें भी करोड़ों की बंदरबांट का लक्ष्य। जानकार कहते हैं कि एनआईटी में नाले पहले से ही बने हुए हैं लेकिन कभी ईमानदारी से उनकी सफाई नहीं कराई गई। डीसिल्टिंग के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये डकार लिए जाते हैं। यदि डीसिल्टिंग हो जाए तो नए नाले बनाने की जरूरत ही न पड़े। जानकार अंदेशा जता रहे हैं कि नया निर्माण करने के नाम पर पुराने की ही मरम्मत करा करोड़ों रुपये डकारे जाएंगे। विधायक ने इसके लिए भी एक महीने में पूरा कराने का दावा किया है, समझा जा सकता है कि यह घोषणा भी जल्द ही झूठ साबित होने वाली है।
उन्होंने बताया कि बाटा से हार्डवेयर चौक तक सड़क के दोनों ओर बारह-बारह फीट चौड़ा फुटपाथ बनाया जाएगा। सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्किंग खत्म कराई जाएगी। जानकारों के अनुसार हार्डवेयर चौक के पास अदलखा की कब्जाई गई प्रॉपर्टी है, इसके कीमत बढ़ाने के लिए विधायक जनहित की आड़ में फुटपाथ चौड़ा करवा रहे हैं। बताते चलें कि हार्डवेयर चौक की ग्रीन बेल्ट में बसी घूमंतू जाति बस्ती पहले उसी प्लॉट में थी जहां अदलखा का कब्जा है। एक दशक पहले अदलखा ने बतौर पार्षद खुद और मंत्री कृष्णपाल गूजर के रसूख का इस्तेमाल कर अपनी जमीन खाली करवाई थी। अब फुटपाथ के नाम पर इन्हें हटवा कर अपनी प्रॉपर्टी को सामने लाना चाहता है।
अदलखा हार्डवेयर चौक तक फुटपाथ बनवाने की बात तो कर दी लेकिन बाटा पुल से उतरते ही लगने वाले जाम के संबंध में कोई उपाय नहीं सुझाया। दरअसल, शहर के लगभग सभी प्रमुख चौराहे और टी प्वाइंट बिना स्लिप रोड के हैं, इनके न होने से मुडऩे वाले वाहनों को भी चौराहे पर जाम से जूझना पड़ता है। दरअसल, जुमलेबाज प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित धनेश अदलखा ने विधायक बनते ही बड़ी बड़ी घोषणाएं कर डाली थीं। बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में कई फ्लाईओवर, पार्कों का र्साेदर्यीकरण करवाने के साथ एक महीने में सारी सीवर लाइनें सही करवाने, जलभराव समाप्त करने जैसे दावे रोजाना करते। कथित पत्तलकार उनके दावों की पड़ताल करने के बजाय भाट-चारण बन जनता के बीच उनका झूठ बड़ी शान से परोसते। पैसा फेंक कर जनता के बीच छवि कितने दिन बनती, सच्चाई सामने आनी ही थी, सो वह तेज रफ़्तार अदलखा के सामने उतनी ही तेजी से आने भी लगी है, उन्हें अपनी औकात का अहसास हो गया है, अब देखना है कि उनकी नई घोषणाओं का क्या होने वाला है।