मज़दूर मोर्चा ब्यूरो 56 इंची सीने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाक के नीचे यानी दिल्ली से महज 25 किलोमीटर दूर फरीदाबाद की जवाहर कॉलोनी में फर्जी पासपोर्ट बनाए जा रहे थे। मित्र ट्रंप ने सत्ता संभालते ही हथकडिय़ों-बेडिय़ों में जकड़े 104 भारतीयों का तोहफ़ा प्रधानमंत्री मोदी को भिजवाया तब कहीं जाकर विदेश मंत्रालय की आंख खुली और फर्जी ढंग से बनाए जाने वाले पासपोर्टों की जांच का पाखंड शुरू किया गया। अमेरिका से भेजे गए इन 104 लोगों में से सर्वाधिक 35 प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात से और 33 उनकी डबल इंजन सरकार वाले हरियाणा के हैं।
इन आंकड़ों से यह समझना मुश्किल नहीं है कि सबसे ज्यादा फर्जी पासपोर्ट गुजरात और हरियाणा में ही बनाए जाते होंगे। विदेश मंत्रालय की प्रारंभिक जांच में केवल फरीदाबाद में 39 पासपोर्ट फर्जी पते पर बनाए जाना पाए गए। हालांकि, इसका खुलासा होते ही सारन थाने के नौ पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच खोल दी गई है। सबको अच्छी तरह मालूम है कि वेरिफिकेशन कैसे और किस तरह किया जाता है। वेरिफिकेशन के नाम पर आवेदक से वसूली जाने वाली नजराने की रकम अकेले बीट सिपाही नहीं रख लेता बल्कि हिस्सापत्ती ऊपर तक जाती है, यानी जांच हुई तो बात ऊपर तक पहुंच जाएगी। इसलिए यह समझना मुश्किल नहीं है कि विभागीय जांच का परिणाम अंतत: क्या होने वाला है।
सूत्र बताते हैँ कि विदेश मंत्रालय से जो रिपोर्ट सीपी ऑफिस भेजी गई है उसके अनुसार 2023 में 39 पासपोर्ट जवाहर कॉलोनी के एक ही घर के पते पर बनाए गए। संदर्भवश सुधी पाठकों को बताते चलें कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद संबंधित व्यक्ति का नाम, पता, उम्र, चरित्र आदि का सत्यापन करने के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) से दस्तावेज पुलिस आयुक्त कार्यालय भेजे जाते हैं। वहां से यह दस्तावेज सिक्योरिटी ब्रांच और वहां से संबंधित थाने को भेजी जाती है। होना तो यह चाहिए कि संबंधित थाने से सत्यापन के लिए तैनात किए गए सब इंस्पेक्टर या बीट सिपाही को गुप्त तरीके से व्यक्ति के नाम पते की जांच करनी चाहिए, लेकिन होता इसके उलट है। व्यक्ति को फोन कर अपना आधार और गवाह के रूप में दो पड़ोसियों के आधार या राशन कार्ड की फोटो लेकर थाने बुलाया जाता है। सूत्रों के अनुसार वेरिफिकेशन के नाम पर दो से पांच हजार रुपये तक नजराना वसूला जाता है और रिपोर्ट बना कर भेज दी जाती है।
यह प्रक्रिया तो असली आवेदक के साथ अपनाई जाती है। फर्जी पते पर पासपोर्ट एजेंटों के जरिए ही बनता है। एजेंट थाने में बैठे-बैठे ही सत्यापन करने के एवज मे बीस से पच्चीस हजार रुपये तक की रकम भेंट करते हैं। सत्यापन के इस खुले खेल की जानकारी सिक्योरिटी ब्रांच से लेकर सीपी कार्यालय तक सबको रहती है इसलिए हर कदम पर हिस्सा बंटने के बाद ही रिपोर्ट आगे बढ़ती है। 2023 में जवाहर कॉलोनी के एक ही पते पर औसतन हर नौवें दिन एक पासपोर्ट का सत्यापन किया गया। इस मामले में नौ पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच की जा रही है, यानी प्रत्येक पुलिस कर्मी ने औसतन चार से पांच पासपोर्ट का सत्यापन किया। आवेदकों के नाम, जाति अलग होने के बावजूद एक ही पता होने पर इन्होंने सच्चाई जानने का प्रयास क्यों नहीं किया? जाहिर है कि सच्चाई न जानने की कीमत अदा कर दी गई थी।
चलो मान भी लिया जाए कि थाने और सिक्योरिटी ब्रांच में कंप्यूटर नहीं है इसलिए यहां पर नाम पते का रिकॉर्ड चेक नहीं किया जा सका। क्षेत्रीच पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) और विदेश मंत्रालय में तो सब कुछ कंप्यूटर पर है, वहां तो एक क्लिक में सारा डेटा निकाला जा सकता है, जैसा कि अमेरिका की कार्रवाई के बाद अब निकाला गया। जानकारों के अनुसार आरपीओ से लेकर विदेश मंत्रालय तक को फर्जी तरीके से बनाए जाने वाले पासपोर्ट की अच्छी तरह से जानकारी है। अवैध रूप से विदेशों में जाने वाले भारतीयों के विषय पर 2023 में बॉलीवुड में डंकी नाम से मूवी बनी थी। यह मुमकिन नहीं है कि ऐसे संवेदनशील मामले की जानकारी बॉलीवुड को तो हो लेकिन विदेश मंत्रालय को न हो। जानकार बताते हैं कि डंकी रूट से विदेशों को जाने वाले भारतीयों की पूरी जानकारी विदेश मंत्रालय के पास है लेकिन विदेशी मुद्रा की लालच में इसे रोका नहीं जाता। ये भारतीय किसी भी रूप में विदेश जाएं वहां जो कमाएंगे उसका बड़ा हिस्सा तो वे विदेशी मुद्रा के रूप में भारत को ही भेजते हैं। यानी ये डंकी पहले तो पासपोर्ट बनवाने में पुलिस से लेकर विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों को हजारों रुपये अदा करते हैं, विदेश जाने के बाद देश को धन भेजते हैं, यही कारण है कि यह व्यवस्था इसी तरह चुपचाप जारी रहने की पूरी संभावनाएं हैं।
जहां तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय नागरिकों का पासपोर्ट बनाए जाने का सवाल है, यह है तो गलत परंतु इससे देश की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन पुलिस और पासपोर्ट कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार का फायदा उठा कर दुश्मन देश के जासूस भारतीय पासपोर्ट बनवा सकते हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। ऐसा लगता नही कि भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा शासनतंत्र इससे कभी मुक्ति पा सकेगा।