फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम की ओर से बुधवार को एनआईटी एक, दो और तिकोना पार्क के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। सरकारी आदेश को लागू करने की मजबूरी के साथ अपनी नौकरी बचाने के लिए नेताओं की चापलूसी में लगे निगम अधिकारियों ने आकाओं की मंशा के अनुसार ही तोडफ़ोड़ की। उन बेचारे दुकानदारों की रेहडिय़ां-खोमचे तोड़े गए जिनका कोई राजनीतिक आका नहीं था। सत्ता समर्थकों को तो बाकायदा अपना अतिक्रमण हटाने का मौका दिया गया ताकि अभियान समाप्त होने के बाद दोबारा लगाया जा सके। पहचान पहचान कर तोडफ़ोड़ करने वाले अधिकारियों ने एनआईटी दो में सड़कों तक कब्जा जमाए दोपहिया वाहन मार्केट की तरफ जाना भी उचित नहीं समझा।
नगर निगम का तोडफ़ोड़ दस्ता बुधवार सुबह करीब 11 बजे एनआईटी एक मार्केट पहुंचा। चौक पर लगी रेहडिय़ों की तोडफ़ोड़ की तो मार्केट में खलबली मच गई। व्यापारी एकजुट हुए तो उन्हें अपना सामान हटाने का समय देने के लिए तोडफ़ोड़ अभियान धीमा कर दिया गया। इस दौरान कई दुकानदारों ने सत्तापक्ष के नेताओं को फोन लगा कर मदद मांगी। अधिकारियों के पास फोन आने लगे कि फलां दुकान को नहीं तोडऩा, फलां दुकान को छोड़ दो। नेताजी की खुशी के लिए अधिकारियों ने अनेक पक्की दुकानों के सामने का अतिक्रमण तो छोड़ दिया और कुछ दुकानों के टिन शेड और रैंप तोड़कर अनेकों को खुद हटाने का मौका दे दिया गया। कार्रवाई सफल दिखाने के लिए रेहडिय़ां, गुमटियां आदि तोड़ी गईं और दस्ता तिकोना पार्क की ओर रवाना कर दिया गया। फर्नीचर मार्केट के सामने वाली पट्टी पर अतिक्रमण तोड़ते हुए लखानी धर्मशाला, राजकीय कन्या विद्यालय होते हुए पार्क तक तोडफ़ोड़ कर लौट गए। इस इलाके में भी टीम को स्थायी अतिक्रमण कम ही नजर आया, खाने पीने की रेहड़ी लगाने वाले ही नजर आए।
केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के अमोलिक सिटी मॉल द्वारा ग्रीन बेल्ट उजाड़ कर हजारों वर्ग फीट क्षेत्र में बनाई गई पक्की पार्किंग से आखें बंद किए नगर निगम के अधिकारियों को एनआईटी की दोपहिया मार्केट भी नजर नहीं आई। ये दुकानदार अपनी पुरानी बाइकों से फुटपाथ तो क्या सड़क तक घेरे रहते हैं। दो तिहाई सड़क इनके कब्जे में रहने के कारण हमेशा जाम की हालत बनी रहती है। जानकारों के अनुसार नगर योजनाकारों ने शहर की मुख्य सड़कें 200 फुट चौड़ी और अंदर की सड़कें 100 फुट चौड़ी रखी थीं लेकिन वर्तमान प्रशासन के भ्रष्ट अधिकारियों ने सबकुछ बेच खाया।
यदि सड़क से अतिक्रमण हटा दिया जाए तो आराम से फुटपाथ और साइकिल ट्रैक बन सकते हैं और सड़क भी काफी चौड़ी हो जाएगी लेकिन अतिक्रमण कारियों के लिए कानून, नियम-कायदे कुछ मायने नहीं रखते। अधिकारी तो नेताओं की जी हुजूरी में मस्त हैं, कोई कुछ भी कर ले इन्हें वही करना है जो ये चाहेंगे।