अपनी ही दस साल की सरकार को निकम्मा बता रहे नए विधायक

अपनी ही दस साल की सरकार को निकम्मा बता रहे नए विधायक
October 20 14:08 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) विधानसभा चुनाव में पहली बार जीत कर आए भाजपा विधायक पिछले दस साल में कुछ नहीं किए जाने की बात कह अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। पिछली भाजपा सरकारें जो बिजली, पानी, सीवर व्यवस्था दस साल में ठीक नहीं कर सकीं वह सब एक सप्ताह के भीतर चुस्त दुरुस्त कराने का दावा ठोंक रहे हैं। लगता है कि इन नए विधायकों ने यह लफ्फ़़ाज़ी, सत्ता मिलते ही सौ दिन में सब कुछ ठीक करने का जुमला फेकने वाले अपने आक़ा मोदी से सीखी है।
पूरे प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर के बावजूद जोड़-तोड़, धर्म-जाति की राजनीति कर भाजपा किसी तीसरी बार सत्ता में आई है। खास बात है कि अभी नई सरकार का गठन भी नहीं हुआ, लेकिन पूरे प्रदेश में पहली बार निर्वाचित विधायकों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ताबड़तोड़ बैठक कर, औचक निरीक्षण आदि करने शुरू कर दिए हैं। समाजसेवा की जल्दबाजी में ये विधायक यह भी भूल गए हैं कि प्रदेश में दस साल से उनकी ही सरकार थी, और यह दर्शा रहे हैं कि उनसे पहले के विधायकों ने क्षेत्र में कुछ किया ही नहीं है।

भ्रष्टाचार के केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए दो महीने तक फरारी काटने वाले धनेश अदलखा पहली बार विधायक बने हैं। विधायक बनते ही वो बडख़ल विधानसभा में सात दिन के भीतर आमूल-चूल परिवर्तन करने उतर पड़े। सोशल मीडिया के चाटुकार पत्रकारों को पालतुओं की तरह साथ लेकर घूम रहे अदलखा रोज नए दावे कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने दावा किया कि एनआईटी पांच स्थित भगत सिंह चौक से कोढ़ी कॉलोनी होते हुए विधायक सीमा त्रिखा के आवास के सामने से गुजरने वाली सड़क का काम वह चंद दिनों में ही शुरू करा देंगे। इसके लिए उन्होंने बाकायदा 2 करोड़ 28 लाख रुपये का एस्टीमेट भी तैयार कर लिया है। विधायक बन खुद को भगवान समझने की भूल कर रहे अदलखा को यह मालूम होना चाहिए कि यह सड़क नगर निगम की 102 करोड़ की पेरिफेरल रोड का पार्ट है। दूसरे, कोर्ट में केस विचाराधीन होने के कारण इस सड़क का निर्माण रुका हुआ है। विधायक दावा कर रहे हैं कि विवादित हिस्से को छोड़ कर बाकी सड़क बनवाई जाएगी। उन्हें मालूम होना चाहिए कि केवल विवादित हिस्से पर ही सड़क नहीं बनी है बाकी तो पूरी सड़क बन चुकी है। उन्हें तो यह भी पता है कि पूर्व विधायक सीमा त्रिखा ने पेरिफेरल रोड का पार्ट होते हुए भी ठेकेदार गांधी को फायदा पहुंचाने के लिए इस रोड पर ग्रिल और स्ट्रीट लाइटें स्मार्ट सिटी से लगवा दी थीं जबकि इन्हें ठेकेदार गांधी को लगाना था। लगता है कि धनेश भी अपने किसी चेले ठेकेदार को मोटी कमाई कराना चाहते हैं तभी इस विवादित सड़क के निर्माण का चुनाव किया।

वैसे भी एस्टीमेट, डीपीआर तैयार करना नगर निगम के इंजीनियरों का काम है, विधायक जिस तरह बता रहे हैं कि उन्होंने 2 करोड़ 28 लाख का एस्टीमेट तैयार कर लिया है और चार दिन में टेंडर जारी कर दिए जाएंगे, उससे तो लगता है कि वह भी विकास कार्य के नाम पर भ्रष्ट निगम अधिकारियों के साथ मिलकर लूट करने वाले हैं। बेहतर होता कि धनेश विधायकी करते और इंजीनियरों का काम उन्हें ही करने देते।

उन्होंने सभी पार्कों में स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह चाक चौबंद करने का भी आदेश दे दिया है। सुधी पाठकों को बताते चलें कि पार्षद रहते हुए उन्होंने ब्रांडेड के नाम पर सरूरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में बनीं लोकल लाइटें नगर निगम को खरीदवा कर मोटी कमाई की थी। इन लाइटों के रखरखाव और मरम्मत का दो साल का जिम्मा भी ठेकेदार का था लेकिन धनेश ने यह व्यवस्था ही समाप्त करा दी थी, क्योंकि ये लाइटें एक सप्ताह भी नहीं चली थीं। धनेश का चहेता ठेकेदार भुगतान लेकर चंपत हो गया था और नगर निगम दूसरी एजेंसियों से लाइटें बदलवाता रहा। तत्कालीन निगमायुक्त एम शाईन ने भी एलईडी घोटाले पर नाराजगी जताई थी। घटिया स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा नगर निगम सदन में भी गूंजा था। उनके द्वारा सारे पार्कों की लाइटें बदलवाए जाने की घोषणा भी लूट कमाई के आजमाए हुए पुराने फार्मूले को फिर से इस्तेमाल करने वाली ही लगती है।
उन्होंने सोशल मीडिया के अपने पालतू पत्रकारों को बताया कि नगर निगम अधिकारियों को चार दिन में सफाई व्यवस्था, सात दिन में सीवरेेज व्यवस्था दुरुस्त करने का सख्त अल्टीमेटम दिया है। 19 अक्तूबर के बाद बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में कहीं भी न तो गंदगी नजर आएगी और न ही सीवरेज की समस्या रहेगी। देखा जाए तो जाने-अनजाने वह अपनी ही भाजपा सरकारों की नाकामियां गिना रहे थे कि दस साल में सरकार न तो सीवर-सफाई भी नहीं करा सकी, पार्को में स्ट्रीट लाइटें नहीं लगा सकी, सड़कों की मरम्मत नहीं करा सकी।

उनकी ही तरह एनआईटी से पहली बार विधायक चुने गए सतीश फागना भी सड़कों का औचक निरीक्षण करने से लेकर सफाई व्यवस्था देखने सड़क पर उतर पड़े। बीते शुक्रवार की शाम उन्होंने भी नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर 24 घंटे में एनआईटी की सीवर समस्या दुरुस्त करने का सख्त आदेश सुनाया। अधिकारियों ने भी हां में हां मिलाई और 24 घंटे तो क्या एक सप्ताह बीतने के बाद भी कुछ नहीं किया, यानी जैसे चल रहा था वैसे ही अब भी चल रहा है। हां, चौबीस घंटे का अल्टीमेटम देकर फागना जी अधिकारियों और जनता के बीच जग हंसाई के पात्र जरूर बन गए। उन्होंने पेयजल समस्या दूर करने के भी आदेश दिए। सबको मालूम है कि शहर में पानी की मांग लगभग साढ़े चार सौ एमएलडी है जबकि एफएमडीए, नगर निगम आदि एजेंसियां पूरी ताकत लगा कर भी 320 एमएलडी पानी की आपूर्ति कर पा रहे हैं, विधायक जी एक दिन में पानी की समस्या हल करने का दावा कर अपना बचकानापन साबित कर रहे हैं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि बीते दस साल में उनकी ही भाजपा सरकार थी और वह शहर को मांग के अनुरूप पानी उपलब्ध नहीं करा पाई। उनके विधायक बनते ही अलादीन का चिराग तो हाथ लग नहीं गया कि एक दिन में सब दुरुस्त हो जाएगा।

सतीश फागना ने बिजली निगम को भी सारे ट्रांसफार्मर बदल कर बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें शायद नहीं मालूम कि शहर में उनकी ही पार्टी के चार और विधायक है, वह भी बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं। भाजपा की दस साल की सरकारों में तो बिजली निगम को पर्याप्त संसाधन दिए नहीं गए, अभी तो कार्यकारी सरकार है, नए मुख्यमंत्री, विधायक और मंत्रियों ने शपथ तक नहीं ली ऐसे में बिजली निगम अतिरिक्त ट्रांसफार्मर कहां से खरीद कर लाएगा। वैसे भी ऐसा नहीं लगता कि नई सरकार अपने विधायकों की खुशी के लिए बिना सोचे समझे और बजट बनाए खजाने का मुंह खोल देगी।

फरीदाबाद से दूसरी बार चुने गए विपुल गोयल भी कहां पीछे रहने वाले थे, पांच साल सत्ता से दूर रहे विपुल ने चुनाव जीतने के दूसरे दिन ही अधिकारियों के साथ बैठक कर बिजली, पानी, सड़क, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने भी अधिकारियों को सात दिन में व्यवस्था चाक चौबंद करने का सख्त निर्देश दिया। परिणाम आप सबके सामने है, पूरे शहर में सफाई व्यवस्था की वही चाल बेढंगी जो पहले थी, अब भी है। स्ट्रीट लाइट, सीवर, पानी की व्यवस्था में भी कोई बदलाव नहीं आया है। शहर का हाल पाठकों के सामने है। हां, यह जरूर हुआ कि इन विधायकों ने अपने ही मुंह से बता दिया कि बीते दस साल में भाजपा सरकारों ने नागरिक सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं किया, हां, बड़े बड़े घोटाले जरूर होते रहे।

एक बार फिर से विधायक बने तिगांव के राजेश नागर और बल्लभगढ़ के मूलचंद ने इस तरह का कोई नाटक नहीं किया, क्योंकि वो अपनी ही पोल नहीं खोल सकते थे।
यदि ये विधायक सच में गंभीर हैं और पाखंड नहीं कर रहे तो पहले खस्ताहाल बाटा रेलवे ओवरब्रिज की मरम्मत कराएं। पुल की दोनों लेन में कंक्रीट-तारकोल की परत जगह-जगह इतने गहरे उखड़ चुकी है कि पुल का लेंटर नजर आ रहा है। भारी वाहनों के गुजरने के कारण गड्ढे रोजाना बड़े होते जा रहे हैं। एक साल पहले ही नगर निगम अधिकारियों ने इस पुल की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपयों की बंदरबांट की थी, लेकिन छह महीने में ही इस पर गहरे गड्ढे हो गए। यदि अभी मरम्मत की जाए तो कुछ हज़ार रुपये में ही पुल वाहनों के आवागमन योग्य हो जाएगा लेकिन जब बिल ही हजारों का बनेगा तो ये नेता और अफसर खाएंगे क्या? इसलिए पुल में बड़ा नुकसान होने का इंतज़ार किया जा रहा है जिसके लिए लाखों-करोड़ों का टेंडर छोड़ा जाए ताकि मोटी काली कमाई हो सके।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार विपुल गोयल ने मंत्री बनने की कोशिश में आला कमान की नजर में आने के लिए सबसे पहले उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक करने का खेल किया। सब जानते हैं कि कृष्णपाल गूजर विपुल को अपनी सत्ता के लिए खतरा मानते हैं इसलिए हर स्तर पर उनकी काट करते हैं। विपुल गोयल को ऐसा करते देख उन्होंने चेले धनेश और रिश्ते के भतीजे सतीश फागना को भी यही हरकतें करने का इशारा किया।

सूत्रों के अनुसार धनेश मंत्री गूजर और पूर्व सीएम खट्टर का खास चेला है, विपुल की काट के रूप में उसे आगे किया जा रहा है। रही बात सतीश फागना की तो जो एक कीला जमीन चाचा गूजर को दी है उसके बदले में वह भी सरकार में कुछ बड़ा पद हासिल करना चाहते हैं। हालांकि भाजपा सूत्र बताते हैं कि खट्टर का तख्तापलट होने के बाद उनके चहेते कृष्णपाल गूजर का सूरज भी ढलान की ओर है, इस बार मंत्रिमंडल बनाए जाने में उनकी भूमिका नगण्य होने वाली है। खैर, मुख्यमंत्री और मंत्री कोई भी बने इतना तो तय है कि जनता को अगले पांच सालों तक एक बार नए घोटाले, भ्रष्टाचार से दोचार होते हुए अभावों से जूझना होगा।

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Mazdoor Morcha
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