फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ग्रेटर फरीदाबाद वासियों से वाह्य विकास शुल्क ( ईडीसी) रूप में पांच हज़ार करोड़ रुपये वसूलने वाली सरकार और उसके हरामखोर अधिकारी यहां के लोगों को मास्टर रोड से कनेक्टिवटी तो नहीं दे पाए लेकिन अपनी जेबें भरने के लिए सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे, अतिक्रमण करवा कर खुद करोड़ों रुपये वसूल रहे हैं। दरअसल यह अतिक्रमण और कब्जे भूमाफिया मंत्री कृष्णपाल गूजर के सजातीयों और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए हैं। अधिकारी हूडा के हों या एफएमडीए के, मंत्री गूजर के रहते इन अतिक्रमणकारियों और अवैध कब्जा धारकों के खिलाफ कार्रवाई तो कर नहीं सकते, इसलिए उनसे बाकायदा किराए की तरह वसूली की जाती है।
सेक्टर 28 से मवई तक जाने वाली 42 किलोमीटर मास्टर रोड हूडा के निकम्मे अधिकारी पंद्रह साल बाद भी न तो पूरी कर पाए हैं और न ही विभिन्न सेक्टरों को जोडऩे वाली प्रमुख 15 सड़कों को इससे कनेक्टिविटी दी गई है। ये सारे काम भले ही अधर में लटके हों लेकिन हूडा के लूट कमाई करने वाले अधिकारियों ने मास्टर रोड के किनारे ग्रीन बेल्ट और सर्विस लेन पर कब्जा करवा कर अपने साथ विभाग के हूडा एडिमिनिस्ट्रेटर तक के लिए हर महीने मोटी ऊपरी कमाई की व्यवस्था कर ली है। धर्म के नाम पर शुद्ध व्यापारिक दृष्टिकोण से खोले गए अम्मा हॉस्पिटल के कारण इसके आसपास के इलाके में भूमाफिया तेजी से सक्रिय है। मंत्री गूजर का वरद्हस्त होने के कारण भूमाफिया ने एक बड़े इलाके में ग्रीन बेल्ट पर कब्जा कर पहले अस्थायी निर्माण किए लेकिन कहीं कहीं उन्हें पक्का किया जा रहा है। मास्टर रोड के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट उजाड़ कर शराब ठेके, अहाते, रेहड़ी, दुकानें, निर्माण सामग्री स्टॉक यार्ड, फास्ट फूड स्टॉल, प्रापटी डीलरों के स्टॉल, यहां तक कि पत्थर-टाइल, बदरपुर रेत के गोदाम भी बना डाले गए हैं।
ग्रीन बेल्ट ही नहीं हूडा द्वारा बनाई सर्विस लेन की जमीन पर भी अवैध कब्जा कर दुकानें यहां तक की फैक्टरियों के शेड डाल दिए गए हैं। कुछ सेक्टरों में सर्विस रोड तो बनी हुई है लेकिन मुख्य सड़क से कनेक्टिवटी नहीं दी गई है, इसका फायदा उठाते हुए प्लॉट धारकों ने सर्विस रोड की ओर मुंह कर दुकानें बना डाली हैं। यही नहीं सड़क तक दुकान का सामान फैलाकर अस्थायी व स्थायी रूप से अतिक्रमण कर रखा है। हूडा सूत्रों के अनुसार इन अवैध कब्जों और अतिक्रमण से रोजाना कई लाख रुपये का चढ़ावा आता है। चढ़ावे की यह रकम वसूली करने वाले से लेकर एस्टेट ऑफिसर और हूडा प्रशासक तक पहुंचती है। बताया जाता है कि यह रकम वसूली का काम एस्टेट ऑफिसर के गुर्गे अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
ऊपरी कमाई केवल हूडा ही नहीं करता, एफएमडीए और जिला नगर योजनाकार डीटीपी महकमा भी वसूली करते हैं। जानकार कहते हैं कि अभी मास्टर रोड पूरी नहीं बनी है यानी नियमानुसार इसे एफएमडीए को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता लेकिन ग्रीन बेल्ट और सेंट्रल वर्ज पर हरियाली विकसित करने का जिम्मा एफएमडीए ने हासिल कर लिया है। ग्रीन बेल्ट की दुकानों से एफएमडीए को भी मोटा हिस्सा जाता है। डीटीपी और हूडा का एन्फोर्समेंट विभाग भी गाहे बगाहे अतिक्रमण तोडऩे की गीदड़ भभकी देकर अच्छा खासा खर्चा पानी ले लेता है।
सेक्टर 77 निवासी डॉ. अशोक तंवर के अनुसार बीते दस साल में ग्रेटर फरीदाबाद से सरकार ने ईडीसी के नाम पर पांच हज़ार करोड़ रुपये की वसूली की है, सारा कुछ रिकॉर्ड पर है, लेकिन कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। सेक्टरों को मास्टर रोड से नही जोड़ा गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सेक्टर 75 और 80 को आगरा कैनाल मास्टर रोड से जोडऩे वाली 45 मीटर चौड़ी रोड का काम अधूरा पड़ा है। सेक्टर 75 व 76 की तीस मीटर रोड, सेक्टर 78 व फरीदपुर गांव, सेक्टर 84 और 98 को खेड़ी कलां गांव से होते हुए मास्टर रोड को जोडऩे वाली सड़क अधूरी है। इसी तरह सेक्टर- 82 और 85 को मास्टर रोड से जोडऩे वाली 45 मीटर चौड़ी सड़क का काम पूरा नहीं हुआ। सड़कों का काम शुरू नहीं होने के कारण सीवर लाइनें भी नहीं डाली गई हैं। अधिकतर सोसायटियों में सीवर कनेक्शन ही नहीं है, सीवर का काम सक्शन मशीनों से लिया जा रहा है जिनके द्वारा सीवरों को खाली कर सीवेज नहरों, सड़कों और खाली प्लॉटों में डाल दिया जाता है। सुविधाओं के लिए तो तरस रहे ईडीसी-आईडीसी अदा करने वाले नागरिकों के हक पर अवैध निर्माणकर्ता, भूमाफिया और अतिक्रमणकर्ता भी डाका डाल रहे हैं। दरअसल, असली उपभोक्ताओं से न तो हूडा को और न ही एफएमडीए या डीटीपी को कुछ खास मिलना है जबकि अवैध कब्जाधारी उनकी मोटी कमाई का साधन हैं, इसलिए उनकी सुविधाओं का हर तरह से ख्याल रखा जाता है। ग्रेटर फरीदाबाद की बदशक्ली के लिए केवल भ्रष्ट अधिकारी ही जिम्मेदार नहीं हैं, राजनेताओं का भी बड़ा हाथ है। हूडा के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर जिला योजना, या अन्य बैठकों में अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाने के खूब सख्त आदेश सुनाते हैं लेकिन शुरू करने पर इनके यहां से ही कार्रवाई रोकने के फोन आने लगते हैं, सच्चाई ये है कि ग्रेटर फरीदाबाद में सक्रिय अधिकतर भू माफिया गूजर के सजातीय हैं, उन पर कार्रवाई का मतलब सीधे गूजर पर कार्रवाई, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। अब चुनाव का माहौल है कोई भी कार्रवाई करने पर सत्ता पक्ष के नेता ही सबसे पहले चुनाव खराब होने की बात कह कार्रवाई न करने का दबाव बनाते हैं, यदि नहीं मानो तो चंडीगढ़ तक से फोन करवा दिया जाता है।