अभी नहीं सुधरने वाली एनआईटी सीवेज व्यवस्था

अभी नहीं सुधरने वाली एनआईटी सीवेज व्यवस्था
November 10 06:20 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पूर्व सीएम खट्टर द्वारा 2015 में घोषणा किए जाने के बावजूद एनआईटी एक, दो, तीन और पांच की सीवेज व्यवस्था आज तक खराब पड़ी है। योजना के नाम पर पहले नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों ने लूट कमाई के पैंतरे अपनाए और अब एफएमडीए हाथ आजमाने की तैयारी कर रहा है। नई सीवर लाइन डालने के लिए 156 करोड़ के प्रोजेक्ट की जगह 165 करोड़ का प्रोजेक्ट बना कर सरकार को भेजा गया है। इधर एफएमडीए सीवर लाइनों को साफ करने की हवा हवाई योजना बनाए हुए है। इसके लिए वह पहले सर्वे पर लाखों रुपये खर्च करने के नाम पर बंदरबांट करेगा।

एनआईटी क्षेत्र में पांच दशक पहले व्यवस्थित नगर योजना के अनुरूप बसाई आबादी के हिसाब से सीवर लाइन डाली गई थी। धीरे धीरे जनसंख्या बढ़ती गई, जमकर अवैध निर्माण हुआ, नगर व्यवस्था ध्वस्त हो गई, लेकिन लगातार सफाई होने के कारण सीवर जाम की समस्या कभी कभार ही होती थी। 2014 में स्मार्ट सिटी वाली मोदी और विकास की कसमें खाने वाले खट्टर की सरकारें बनीं। तेजी से गिरते भूजल स्तर के कारण शताब्दी के पहले दशक में ही फरीदाबाद को डार्क जोन घोषित किया गया था। भूजल रिचार्ज के लिए डार्क जोन में आरएमसी सड़कें बनाए जाने पर पाबंदी है। बावजूद इसके विकास की आड़ लूट कमाई के लिए पगलाए खट्टर गिरोह ने पूरे शहर में आरएमसी सड़कें बिछाने का आदेश दिया था। नगर निगम के भ्रष्ट और लूट कमाई में माहिर फर्जी डिग्री वाले इंजीनियरों ने पूरे एनआईटी इलाके में आरएमसी सड़कों का जाल बिछा दिया लेकिन कहीं भी सड़क किनारे नाले नहीं बनवाई। इससे खराब बात यह हुई कि पांच दशक पुरानी सीवर लाइन और उनके मैनहोल आरएमसी सड़कों के नीचे दबा कर दिए गए। मैनहोल बंद होने के कारण इनमें सफाई होना लगभग बंद हो गया और सीवर जाम की समस्या तेजी से उभरी। हालात बरसात में और भी बदतर हो जाते जब नालियां न होने के कारण सड़कों का पानी घरों में घुस कर सीवर लाइनें ओवरफ्लो कर देता। इस समस्या को दूर करने के नाम पर नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों ने सक्शन और सुपर सकर मशीनों के मोटे मोटे बिल फाड़े और जेबें भरीं। सीएम खट्टर ने 2015 में एनआईटी क्षेत्र में नई सीवर लाइनें डालने की घोषणा की थी। खाऊ अधिकारियों ने सीएम अनाउंसमेंट के नाम पर 156 करोड़ का एस्टीमेट बना डाला जो खट्टर के हिसाब से लगभग तिगुना था, सो उन्होंने बहाने बना कर प्रोजेक्ट खटाई में डाल दिया था। बडख़ल विधायक सीमा त्रिखा ने 2019 विधानसभा चुनाव से पहले वोट पाने के लिए फिर इस मुद्दे को उछाला था।

नगर निगम के भ्रष्टतम अधिकारियों में एक मंत्री कृष्णपाल गूजर के ‘बेटे’ ओमदत्त ने सीवर लाइन डलवाने का जिम्मा लिया और अपने चहेते ठेकेदार सागर गर्ग से टेंडर की शर्तें पूरी करने के लिए फर्जी दस्तावेज लगवाकर टेंडर भी डलवा दिया था। खट्टर सरकार ने बजट तो जारी नहीं किया था तो यह टेंडर प्रक्रिया भी बट्टे खाते में ही जानी थी। पूरे प्रकरण को समाप्त करने के लिए मोना ए श्रीनिवास ने ठेका प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने का बहाना बना कर एक माह पहले ही एसजीएम नगर थाने को पत्र लिख कर एफआईआर करने का अनुरोध किया था। सब कुछ सत्ता का होने के कारण उस मामले में आज तक न तो जांच आगे बढ़ी और न ही एफआईआर हुई।

इस चुनाव में बडख़ल से खट्टर और मंत्री गूजर का दाहिना हाथ भ्रष्ट धनेश अदलखा चुनाव जीता। चुनाव जीतते ही उसने एनआईटी की सीवर लाइनें दुरुस्त करने का फरमान सुना दिया था। धनेश के आदेश पर निगम के खाऊ अधिकारियों ने आनन-फानन 165 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बना कर सरकार को भेज दिया।

इधर, यह जानते हुए भी कि पांच दशक में सीवर लाइनें जर्जर हो चुकी होंगी, इस अवधि में आबादी भी तीन गुना से ज्यादा बढऩे के कारण सीवर लाइन अपर्याप्त है, यह भी की पूरे एनआईटी में आरएमसी सड़कों के नीचे दबी सीवर लाइनों को तोडऩा पड़ेगा तब भी एफमएडीए के अधिकारी इस सीवर लाइन को साफ करने के नाम पर लूट कमाई करने की तैयारी कर रहे हैं।

एफएमडीए के एक्सईएन विशाल बंसल के अनुसार पुरानी सीवर लाइनों को ही साफ करके काम चलाया जा सकता है, नगर निगम को रिपोर्ट भेज दी गई है, वही कोई निर्णय लेगा। जानकारों के अनुसार सीवर लाइन की सफाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये की बंदरबांट की जा सकती है, यही कारण है कि एफएमडीए इसकी सफाई की बात कर रहा है। दोनों महकमों की बात से यह तो साफ है कि प्रोजेक्ट बहुत महंगा होने के कारण नई सीवर लाइन तो पडऩे से रही, और सफाई करना भी लगभग नामुमकिन है, ऐसे में एनआईटी की जनता को सीवर जाम की समस्या के साथ जीने की आदत डालनी होगी, सरकार से कुछ होने वाला नहीं।

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Mazdoor Morcha
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