फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पुनर्वास विभाग की बेशकीमती जमीन पर बसी नेहरू कॉलोनी की तोडफ़ोड़ केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की नाक की लड़ाई बन गई लगती है। भाजपाइयों में तो यहां तक शोर है कि नेहरू कॉलोनी की लड़ाई में दोनों मंत्री आमने सामने न आकर प्यादों के जरिए लड़ाई लड़ रहे हैं, इसका परिणाम इनमें से किसी के मंत्रीपद से हाथ धोने के रूप में आ सकता है। चर्चाएं तो ये भी हैं कि गूजर एक बार फिर गोयल का मंत्रीपद छीनने से लेकर अगले विधानसभा चुनाव में उनका टिकट कटवाने के लिए बिसात बिछा रहे हैं। इधर, गोयल के बारे में भी यही चर्चा है कि गृहमंत्री अमित शाह से लेकर मंत्री नितिन गडकरी सहित केंद्र स्तर की कई बड़ी हस्तियों को गूजर के कारनामों की जानकारी देकर उनका पत्ता कटवाने में जुटे हैं।
लीडर से डीलर बने केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गूजर और उनका भ्रष्टाचारी चेला बडख़ल विधायक धनेश अदलखा विवादित जमीनों को कौडिय़ों के भाव खरीद कर सत्ता का दुरुपयोग करते हुए उसका ऊंचा सौदा कर पचासों गुना ज्यादा मुनाफा वसूलने के लिए बदनाम हैं। हूडा के रिज्यूम प्लॉटों से लेकर अन्य प्रॉपर्टियों को कौडिय़ों में लेकर मनचाही कीमत पर बेचने वाले धनेश अदलखा पर पुनर्वास विभाग की सरकारी जमीनों पर कब्जा करने के भी आरोप हैं।
एनआईटी-1 नाथी चौक पर पुनर्वास विभाग की दस दुकानों पर कब्जेदारी का मामला हो या हार्डवेयर चौक के पास कोयले की टाल के पीछे की बेशकीमती जमीन, अदलखा के कब्जे में जा चुकी हैं। अदलखा की नजर काफी दिन से पहले नेहरू कॉलोनी की बेशकीमती जमीन पर थी। इस पर कब्जेदारी के लिए अदलखा ने एलिवेटेड रोड आदि न जाने क्या क्या परियोजनाओं की घोषणा का पाखंड किया था। सरकार ने न तो एलिवेटेड रोड परियोजना मंजूर की न ही मैट्रो या रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम आरआरटीएस कागजों से आगे बढ़ सकी है, बावजूद इसके अदलखा-गूजर को खुश करने के लिए प्रशासन ने तीस मई की रात अचानक तोडफ़ोड़ कर मंदिर-मस्जिद सहित करीब सौ घर तोड़ डाले थे। इसके बाद से करीब ढाई सौ मकान तोड़ डाले गए हैं। कार्रवाई का समय ऐसा चुना गया जब कोर्ट की छुट्टी रहती है ताकि कोई अड़ंगा न लग सके।
बावजूद इसके तोडफ़ोड़ की कार्रवाई को अवैध-अनैतिक और राज्य की कल्याणकारी अवधारणा की हत्या बताते हुए कई सामाजिक संगठनों सहित जागरूक नागरिकों ने विरोध शुरू किया और कॉलोनी के सौ से अधिक लोगों ने तोडफ़ोड़ के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। इस दौरान अदलखा-गूजर का विरोध खुल कर हुआ। विपुल गोयल के खेमे के अमित मिगलानी ने खुलेआम गूजर-अदलखा को कॉलोनी तुड़वाने का आरोपी बताते हुए कार्रवाई का जमकर विरोध किया था और तोडफ़ोड़ रुकवाने के लिए कॉलोनी वासियों को हर संभव मदद देने का ऐलान किया।
राजनीति के जानकारों के अनुसार अमित मिगलानी यह सब आ$का कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के इशारे पर कर रहा था। कृष्णपाल गूजर और विपुल गोयल की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। जानकारों के अनुसार जनता के बीच गूजर-अदलखा के प्रति गुस्से को इन दोनों के खिलाफ भुनाने के लिए विपुल गोयल ने पर्दे के पीछे से अमित मिगलानी जैसे चेलों को नेहरू कॉलोनी में लगाया था।
इसी दौरान एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें नितिन गडकरी, रमेश बिधूड़ी आदि सांसद किसी बस में सफर करते दिख रहे हैं। रमेश बिधूड़ी कहता है कि …..इसमें कृष्णपाल गूजर को एक हजार करोड़ का फायदा हुआ।
चर्चा है कि यह वीडियो भी गोयल गुट के चेलों द्वारा ही सोशल मीडिया में लीक की गई, हालांकि यह पुरानी बताई जा रही है लेकिन इसे नेहरू कॉलोनी की खाली कराई जा रही जमीन से जोडऩे के लिए ही जारी कराया गया। अमित मिगलानी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से तारा-सितारा की वीडियो जारी की जिसमें गूजर-अदलखा जैसे दिखने वाले दो लोगों को सत्ता का इस्तेमाल कर एक कॉलोनी तुड़वाते और बाकी शहर की जमीन को भी हड़पने की तैयारी करते दिखाया गया।
कृष्णपाल गूजर और अदलखा ने भी पलटवार किया और चेले अमित मिगलानी को जेल भिजवाने का इंतजाम करवाया, अदलखा के चेले एसएचओ ने अमित को पकडक़र थाने में बैठाया और मेडिकल करा के जेल भेजने की तैयारी कर ही रहा था कि आला अधिकारियों का फोन आ गया, जाहिर है कि गोयल ने पुलिस के आला अधिकारी को डांटते हुए मिगलानी को छोडऩे का आदेश दिया होगा।
इतना ही नही अमित को घंटों थाने में बैठाए रखने वाले एसएचओ संग्राम दहिया को दूसरे दिन ही हरियाणा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में खुड्डेलाइन लगाने का फरमान डीजीपी कार्यालय से जारी हो गया। इसके साथ ही अदलखा के खास कहे जाने वाले एनआईटी एसएचओ महावीर और कोतवाल श्रीभगवान को भी दूसरे जिले भेजने का आदेश जारी हुआ था। इन तीनों का तबादला आदेश गूजर-अदलखा के मुंह पर तमाचा समझा जा रहा था। इधर, ये बेचारे तीनों इंस्पेक्टर गूजर-अदलखा की शरण में पहुंचे और रोए गाए कि आपके लिए सब कुछ करने के बावजूद तबादला किया जा रहा है। यदि वे हटाए गए तो यह विरोधियों की जीत होगी।
गूजर-अदलखा ने पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता की चूड़ी टाइट कर दी कि ये तीनों यहीं रहेंगे, नेताजी की धमकी से बेबस सीनियर आईपीएस ने तीनों को रिलीव ही नहीं किया, फरीदाबाद पुलिस की वेबसाइट के अनुसार शुक्रवार तक महाबीर एनआईटी थाना, श्रीभगवान कोतवाली और संग्राम दहिया डबुआ में बने हुए थे। गूजर खेमा इसे अपने नेताओं की जीत बता कर खुश हो रहा है। संदर्भवश समझा जा सकता है कि जो पुलिस इन राजनेताओं के हाथ का खिलौना बन चुकी हो उससे जनता की जानमाल की हिफाजत की क्या अपेक्षा की जा सकती है।
भाजपाइयों में चर्चा है कि दोनों ही नेता एक दूसरे की जड़ खोदने के लिए सत्ता से लेकर संगठन स्तर तक जोर आजमाइश कर रहे हैं। इधर चर्चा चली है कि प्रधानमंत्री मोदी केंद्रीय मंत्रीमंडल में फेरबदल करने वाले हैं, गोयल गुट के लोग दावे कर रहे हैं कि फेरबदल में कृष्णपाल गूजर से मंत्री पद छीन कर उन्हें पैदल किया जा सकता है। उनका तर्क है कि गूजर के कारनामों और जमीन माफिया वाली छवि के कारण जनता में उनकी और पार्टी की बदनामी हो रही है। चर्चा तो यहां तक है कि गूजर के संरक्षणदाता यानी मनोहर लाल खट्टर को भी मोदी द्वारा राज्यपाल का ओहदा देकर केंद्र की राजनीति से बेदखल करने की प्रबल संभावनाएं हैं। वैसे भी भाजपा-संघ किसी को भी लंबे समय तक सत्ता का सुख भोगने और अपनी जड़ें गहरी जमाने नहीं देते। यदि ऐसा होता है तो गूजर के लिए यह बड़ा झटका होगा।
दूसरी ओर कृष्णपाल गूजर के चेले दावे कर रहे हैं कि जल्द ही प्रदेश सरकार में बहुत बड़ी फेरबदल होने वाली है। उनकी मानें तो विपुल गोयल और पलवल विधायक गौरव गौतम से मंत्री पद छीन लिया जाएगा। कारण बताते हैं कि ये लोग केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और पार्टी विरोधी कार्रवाई कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि कृष्णपाल गूजर तो विपुल गोयल का पत्ता कटवाने के लिए संघ के बड़े बड़े प्रचारकों को साधने में लगे हैं।
हालांकि जानकार कहते हैं कि गूजर का मंत्रीपद रहे या जाए, गोयल मंत्री रहें या नहीं, नेहरू कॉलोनी तो टूटना तय है, दरअसल, सरकार में बैठे लालचियों को नेहरू कॉलोनी की हजारों करोड़ की जमीन नजर आ गई है, आशंका जताई जा रही है कि सात जुलाई को होने वाली सुनवाई सत्ता का चहेता कोई जज करेगा और उजाड़े जाने पर चिंता जताए लेकिन तोडफ़ोड़ को जारी रखने का आदेश दे दे।
इस तरह राजनेताओं की मंशा पर न्यायपालिका की मुहर लगाकर आम जनता को चुप करा दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि नेहरू कॉलोनी के बाद जमाई कॉलोनी और राहुल कॉलोनी में भी तोडफ़ोड़ का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा चुका है, यानी सत्ता में चाहे गूजर रहें या गोयल, कथित अवैध कॉलोनियों में रहने वालों का उजडऩा तय है। जिस तरह खोरी कॉलोनी वालों को आज तक वैकल्पिक आवास नहीं मिल सके उसी तरह सरकार इन्हें भी कुछ नहीं देने वाली।