फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने बीते शनिवार को विकसित फरीदाबाद धन्यवाद रैली का आयोजन किया। रैली में सीएम सैनी ने बीते बारह वर्षों में भाजपा शासन में फरीदाबाद के विकसित होने का झूठ परोसा। दरअसल, सैनी भी उसी संघ-भाजपा की शाखाओं में पढ़े हुए हैं जहां से प्रधानमंत्री मोदी ने झूठ और जुमलेबाजी में महारत हासिल की। मोदी ने तो 2047 तक भारत को विकसित करने का झुनझुना थमाया है सीएम ने तो फरीदाबाद को अप्रैल 2026 में ही विकसित घोषित कर दिया।
जिस समय सीएम सैनी सेक्टर 12 में फरीदाबाद के विकसित होने की घोषणा कर रहे थे ठीक उस समय संत सूरदास के गांव सीही में आमजन सड़क पर एक फुट तक भरे सीवर के पानी के बीच से गुजरते हुए भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकारों की शान में कसीदे गढ़ रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार साल से इस गांव में सीवर का पानी सड़कों पर बह रहा है, परेशान होकर लोग पलायन करना चाहते हैं और अपने मकानों पर बिकाऊ है का बोर्ड लगा रखा है लेकिन जलभराव की समस्या देखते हुए कोई खरीदार ही नहीं आता।
स्थानीय महिला ने बताया कि प्रसिद्ध मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर भी गंदा पानी भरा हुआ है। यह तो विकसित फरीदाबाद की एक बानगी है, कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का विधानसभा क्षेत्र हो या किसी दूसरे भाजपाई विधायक, मंत्री का सब जगह बदतर हालात हैं। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का इलाका कहे जाने वाले पल्ला सूर्या विहार पार्ट तीन में सड़क-नाली और पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाएं ही नहीं हैं, बिजली आपूर्ति भी बल्लियों के सहारे की जा रही है। बडख़ल और एनआईटी विधानसभा क्षेत्र में आए दिन अच्छी खासी इंटरलॉकिंग उखाड़ कर नई बिछाई जाती हैं वही सूर्या विहार में इंटरलॉकिंग तो दूर खड़ंजा तक नहीं है, जल निकासी व्यवस्था न होने के कारण बरसात में इस इलाके में चलना मुश्किल हो जाता है। सिर्फ सूर्या विहार नहीं, इस तरह की आधारभूत सुविधाओं का अभाव लगभग हर विधानसभा में है।
सैनी-गोयल के विकसित फरीदाबाद में स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई पूरे शहर में नजर आती है। पूरे शहर में सड़कों के किनारे जगह जगह कूड़े के ढेर, गंदगी से पटे बजबजाते नाले-नालियों से उठती दुर्गंंध आम बात हो चुकी है, ये अलग बात है कि हर साल एक एक नाले की सफाई के लिए करोड़ों रुपये खर्च दिखाकर नेता-अधिकारी अपना विकास कर रहे हैं। विकसित फरीदाबाद में सड़कों पर मोदी-खट्टर और संघियों की गोमाता कूड़े के ढेर में मुंह मारती घूम रही हैं। ये फरीदाबाद ऐसे ही विकसित नहीं हो गया है, इसे इस मुकाम पर पहुंचाने के लिए हूडा और नगर निगम काफी नहीं थे इसलिए मोदी-खट्टर की सरकारों ने स्मार्ट सिटी और एफएमडीए भी बना डाले। इन सारी एजेंसियों ने मिलकर शहर को सत्तर साल के कांग्रेसी राज से कहीं आगे पहुंचा दिया। दो सौ फीट चौड़ी सड़कें अवैध निर्माण अतिक्रमण के कारण बमुश्किल साठ फीट ही रह गईं। डबुआ-जवाहर कॉलोनी की तथाकथित साठ फुटी सडकें तो पंद्रह फिटी रह गई हैं।
पर्यावरण और हरियाली की ऐसी तैसी सरकारी संरक्षण में लगातार जारी है, सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी आदि के आदेश के बावजूद संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण की गतिविधियां धड़ल्ले से जारी हैं। खुद कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का संरक्षित वन क्षेत्र में फार्म हाउस है जिसे गिरा दिया गया था लेकिन सत्ता में आते ही वहां फिर से दीवारें खड़ी कर दी गईं, सड़क बना डाली गई जाहिर है इसके लिए पेड़ पौधों की बलि चढ़ाई गई। विकसित फरीदाबाद देश के टॉप दस प्रदूषित शहरों में साल के अधिकतर अपनी जगह बनाए रहता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए केेंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर से लेकर सारे विधायक गाल बजाते हैं, क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत करोड़ों रुपयों की बंदरबांट की गई। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने तो सत्रह करोड़ फूलदार पौधे तक बंटवा दिए लेकिन वायु गुणवत्ता जस की तस बनी हुई है। भाजपाइयों की नजर में फरीदाबाद विकसित हो सकता है क्योंकि ट्रिपल इंजन सरकारों में भूमाफिया, भ्रष्टाचार, फर्जी विकास कार्याेें के नाम पर जनता के धन की खुली लूट, सत्ताधारी नेताओं द्वारा प्रशासन का मिसयूज किए जाना चरम पर है लेकिन आम जनता तो आज भी गंदगी, लचर स्वास्थ्य सेवाओं, साफ हवा-पानी, गड्ढा मुक्त सड़क, साफ सफाई की समस्याओं से जूझ रही है। यदि ये ही भाजपाइयों का विकसित फरीदाबाद है तो इससे तो पुराने दिन ही बेहतर थे।
असंभव मांगों पर भी हां बोल गए सीएम सैनी विकसित भारत रैली में सीएम सैनी ने विपुल गोयल की पार्क की मांग पर असंभव सी घोषणा कर डाली। गोयल ने उनके विधानसभा क्षेत्र में ग्रेटर फरीदाबाद में कोई अच्छा पार्क नहीं होने की बात करते हुए सीएम सैनी से इसकी मांग की। झूठ बोलने में कुछ खर्च तो होता नहीं है इसलिए उन्होंने दो सौ एकड़ में नेचर पार्क बनाने की घोषणा कर दी। उनके घोषणा करते ही हूडा से लेकर एफएमडीए और नगर निगम के अधिकारी तक दो सौ एकड़ जमीन तलाशते नजर आए। नगर निगम के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जमीन न होने के कारण कई प्रोजेक्ट पहले ही अटके पड़े हैं। हूडा ही कुछ कर सकता है। हूडा सूत्रों का कहना था कि पीएलपीए से अपनी जमीन निकालने के लिए करीब 130 एकड़ जमीन वन विभाग को देनी है, उसका जुगाड़ तो हो नहीं पा रहा है, दो सौ एकड़ कहां से लाएंगे, सरकार अधिग्रहण करे तो अलग बात है। एफएमडीए वालों का भी कुछ ऐसा ही मानना है कि जमीन होगी तो पार्क बना डालेंगे।
इसके अलावा सैनी ने सेक्टर आठ में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने की भी घोषणा कर डाली। लोगों का कहना था कि बीके अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक तो सरकार पूरे दे नहीं पा रही है, दिल, गुर्दे के रोगियों का इलाज निजी हाथों में सौंप दिया गया है। यानी बीके में तो पर्याप्त चिकित्सा सेवाएं दी नहीं जा रही हैं बातें सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की। स्वास्थ्य मामलों के जानकार सीएम की इस घोषणा को जुमला ही मान रहे हैं, उनका कहना है कि पूरे प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की दुर्दशा है। इन मेडिकल कॉलेजों में तो सुपरस्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं देना तकनीकी रूप से संभव भी है लेकिन इनकी ही हालत खराब है। सैनी साहब ये मेडिकल कॉलेज तो ठीक से चलवा नहीं पा रहे हैं सुपरस्पेशलिटी अस्पताल क्या चलवा पाएंगे। जानकार कहते हैं कि आठ सौ करोड़ का बैंक घोटाला होने के कारण आला कमान की नजर में सैनी निकम्मे माने जा रहे हैं। इसके अलावा पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी आला कमान हरियाणा में नेतृत्व बदलना चाहता है। राजनीतिक गलियारों में सैनी को गद्दी से उतार कर नायब बनाए जाने की बातें तेजी से चर्चा में हैं, ये बातें सैनी के कानों तक भी पहुंच रही हैं। जाते जाते वह अपने को सक्षम और अच्छा सीएम साबित करने के लिए रैलियों में असंभव सी मांगों पर भी हामी भर रहे हैं। उन्हें मालूम है कि कुर्सी छिनने के बाद उन्हें और उनकी घोषणाओं को भी भुला दिया जाएगा। इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है ये तो भविष्य बताएगा लेकिन इतना तो तय है कि दो सौ एकड़ का पार्क पलवल और गुडग़ांव में मैट्रो चलने की तर्क पर ही चालू हो पाएगा।