जंगल काफी नहीं थे जो एतिहासिक अनंगपुर बांध भी बर्बाद करने चले

जंगल काफी नहीं थे जो एतिहासिक अनंगपुर बांध भी बर्बाद करने चले
April 13 05:02 2026

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिल्ली एनसीआर का फेफड़ा कही जाने वाली अरावली पहाडिय़ों के संरक्षित वन क्षेत्र बर्बाद करने के बाद अब भूमाफिया पुरातात्विक महत्व के संरक्षित अनंगपुर बांध को बर्बाद करने में जुटा है। भारतीय पुरातत्तव सर्वेेक्षण (एएसआई) महकमे द्वारा संरक्षित घोषित इस बांध के आसपास कॉलोनियां काटी जा रही हैं, कहने की जरूरत नहीं है कि पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में की जा रही यह प्लॉटिंग पूरी तरह अवैध है। बावजूद इसके न तो पर्यटन विभाग, न एएसआई, वन विभाग और न ही डीटीपी कार्रवाई कर रहे हैं। अनंगपुर गांव के करीब स्थित अनंगपुर बांध आठवीं शताब्दी में तोमर राजवंश के राजा अनंगपाल के कार्यकाल में बनाया गया था। यह बांध बरस.ती पानी का संरक्षण कर सूरजकुंड भरने के लिए बनवाया गया था। एएसआई ने सूरजकुंड और अनंगपुर बांध को संरक्षित घोषित किया हुआ है। एएसआई केे प्राचीन संस्मारक, पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष नियम के तहत संरक्षित सीमा से 100 मीटर तक का क्षेत्र प्रतिषिद्ध है, यानी इसमें किसी भी प्रकार के निर्माण या खनन की अनुमति नहीं है। इसके आगे 200 मीटर तक का क्षेत्र विनियमित घोषित होता है जहां भवनों की मरम्मत, परिवर्तन तथा निर्माण या नव-निर्माण सक्षम प्राधिकारी, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की पूर्व अनुमति से ही किया जा सकता है।

यदि कोई इमारत या स्थल को क्षति पहुंचाता है तो वह एक लाख रुपये जुर्माने तथा दो साल तक की कैद का भागी हो सकता है। इसके बावजूद अनंगपुर बांध के बहुत करीब प्लॉटिंग और निर्माण जारी है। यहां तक कि भूमाफिया ने एएसआई द्वारा लगाया गया अनंगपुर बांध का शिलापट्ट भी उखाड़ कर तोड़ डाला है। यह सारा काम सूरजकुंड परिसर के पास स्थित एएसआई कार्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित अनंगपुर गांव के पास हो रहा है। जानकार कहते हैं कि एएसआई के अधिकारियों को अच्छी तरह मालूम है कि पुरातात्विक महत्व के संरक्षित बांध के आसपास गैर कानूनी रूप से निर्माण कार्य जारी है जिसके कारण बांध का अस्तित्व संकट में आ गया है लेकिन ये लोग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे। अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए पत्राचार का खेल किया जा रहा है लेकिन भूमाफिया को रोकने का कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

यहां लगातार धड़ल्ले से न केवल निर्माण कार्य चल रहा है बल्कि रोड नेटवर्क बनाने के लिए बाकायदा जेसीबी आदि लगाकर पेड़ भी हटाए जा रहे हैं। सुधी पाठकों को बताते चलें कि अनंगपुर बांध और उसके आसपास का इलाका पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में आता है यानी यहां गैर वानिकी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, यहां न तो पेड़-पौधे काटे जा सकते हैं न ही झाडिय़ों जैसी स्थानीय वनस्पति से छेडख़ानी की जा सकी है। पाठकों को याद होगा कि पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण ही कांत एंक्लेव जैसी लग्जरी कॉलोनी पूरी तरह से ढहा दी गई थी। इसके विपरीत अनंगपुर में न केवल पेड़ पौधे उजाड़े जा रहे हैं बल्कि ईंट पत्थर सीमेंट के ढेर लगाकर इमारतें प्लॉट आदि बनाए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी भी मौन हैं, बताया जा रहा है कि अवैध निर्माण करवाने वाले अधिकतर केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के सजातीय हैं, इसलिए बेखौफ होकर पर्यावरण और पुरातत्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

अनंगपुर बांध और सूरजकुंड पर्यटन विभाग की कमाई के मुख्य स्रोत हैं। अनंगपुर बांध और उसके आसपास के इलाके को पर्यटन विभाग ट्रैकिंग, रॉक क्लाइंबिंग और नेचर वॉक स्पॉट के रूप में प्रचारित करता है। जाहिर सी बात है कि बांध के पास ही घर, मकान, इमारतें बनने से इसका प्राकृतिक सौंदर्य समाप्त हो रहा है और अनंगपुर बांध भी अपनी प्राकृतिक स्थिति खो देगा लेकिन सूरजकुंड मेले से हर साल करोड़ों रुपये कमाने वाले पर्यटन विभाग के अधिकारी इसके एतिहासिक सहयोगी अनंगपुर बांध के संरक्षण में कोई रुचि नहीं ले रहे। समझा जा सकता है कि जब एएसआई, पर्यटन विभाग और वन विभाग ही अपनी संपत्ति को बचाने में कोई रुचि नहीं रखते तो पुलिस विभाग क्यों आगे आए।

हालांकि पूर्व पुलिस आयुक्त हनीफ कुरैशी यह आदेश जारी कर गए थे कि प्रत्येक थाने को अपने क्षेत्र में अवैध निर्माण पर नजर रखनी होगी और संबंधित महकमे को इसकी सूचना देने के साथ ही ऐसी करतूतों पर रोक लगाएगी, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखने के अलावा अन्य सभी कामों में मशगूल पुलिस विभाग ने पुलिस आयुक्त के तबादला होने के साथ ही यह फरमान भी भुला दिया। इन सबके ऊपर मोदी-सैनी की ट्रिपल इंजन सरकार है, जो सरकारें दिल्ली एनसीआर के पर्यावरण को संरक्षित करने वाली अरावली पहाडिय़ां पूंजीपतियों को सौंपने के कानून बनाने को आतुर हों उससे ऐतिहासिक, पर्यावरण और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण अनंगपुर बांध बचाने की उम्मीद बेमानी ही है।

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Mazdoor Morcha
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