सैनिक कॉलोनी का शिव मंदिर भी बना धुन्ना की कमाई का साधन

सैनिक कॉलोनी का शिव मंदिर भी बना धुन्ना की कमाई का साधन
February 13 11:11 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सैनिक कॉलोनी सेक्टर-49 स्थित शिव मंदिर की दान राशि व अन्य स्रोतों से होने वाली आय से जुड़ा घोटाला सत्ता की गोद में बैठे राकेश धुन्ना और भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से जारी है। मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता लाने का प्रयास करने करने वाली मोनिका भाटिया को इन भ्रष्टाचारियों का गैंग झूठी शिकायतें करने से लेकर शारीरिक मानसिक प्रताडऩा देने मे में भी पीछे नहीं रहा। प्रताडऩाओं के बावजूद मोनिका इस गैंग को अंजाम तक पहुंचा कर मंदिर को भ्रष्टाचार मुक्त कराने में लगी हैं। ये वही मोनिका हैं जिन्होंने मंदिर में आने वाले दान की राशि की बंदरबांट का खुलासा किया था।

सैनिक कॉलोनी सोसायटी में शिव मंदिर का निर्माण 1992 से 1998 के बीच तत्कालीन सोसायटी चेयरमैन स्व. ओपी भल्ला ने कराया था। तब से मंदिर की देखभाल और आय-व्यय का हिसाब मंदिर की मैनेजिंग कमेटी करती थी। मोनिका भाटिया के अनुसार 2012 में सोसायटी के पैन कार्ड पर मंदिर का खाता खोला गया। 2018 में उस खाते से सोयायटी ने 14 लाख 85 हजार रुपये लोन लिए, आरोप है कि इसके अलावा भी उस बैंक खाते से बड़ी रकम निकाली गई, इसमें राकेश धुन्ना और उनकी खास अंजू चौधरी की अहम भूमिका बताई गईं। तब इसकी शिकायत सीएम विंडो पर की गई जिस पर मंदिर का बैंक खाता सील कर दिया गया।

करीब साढ़े पांच साल पहले मंदिर की कमेटी निष्क्रिय हो गई। धुन्ना ने अपनी खास अंजू चौधरी को मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंप दी, क्योंकि उन्होंने चुनाव में धुन्ना की बहुत मदद की थी। मंदिर की मोटी कमाई पर नजर गड़ाए राकेश धुन्ना को जल्द ही अंजू चौधरी अखरने लगीं। उनको साइड लाइन करने के लिए धुन्ना ने कमेटी में अपने प्यादे घुसा दिए, उनकी साजिशों से अंतत: अंजू चौधरी को हटना पड़ा। नई कमेटी ने 2023 में सोसायटी की शिव भक्त मोनिका भाटिया को मंदिर का कैशियर बनाया। यहां मोनिका ने पाया कि फर्जी बिल लगाकर हर महीने मंदिर के लाखों रुपयों की बंदरबांट की जा रही है, उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। राज़ खुलता देख धुन्ना एंड कंपनी ने मोनिका भाटिया पर ही आरोप लगाकर उन्हें कैशियर के पद से हटा दिया।

हटाए जाने के बाद मोनिका भाटिया मंदिर प्रबंधन में पारदिर्शता लाने की मुहिम में जुट गईं। रजिस्ट्रार सोसायटी में आरटीआई लगाई तो जवाब मिला कि मंदिर सोसायटी के अंतर्गत नहीं आता। इस पर मोनिका ने जून 2024 में मंदिर का रजिस्ट्रेशन कराया और खुद उसकी प्रधान बनीं। पंजीकरण के आधार पर उन्होंने मंदिर का पैन कार्ड बनवाया और खाता खुलवाया। मंदिर का प्रबंंधन और कमाई हाथ से जाती देख धुन्ना ने असिस्टेंट रजिस्ट्रार सोसायटी प्रवीण कादियान से मिलीभगत कर मंदिर का पंजीकरण रद्द करवा दिया और अक्तूबर 2024 में दानपेटियां भी सील करवा दीं। मोनिका भाटिया ने इसके खिलाफ स्टेट रजिस्ट्रार में अपील की, वहां मामला अभी भी विचाराधीन है।

एआर प्रवीण कादियान या जिला रजिस्ट्रार कार्यालय की यह कारसाजी अकेली नहीं है। इस तरह के विवादों में मोटा पैसा खाकर किसी पक्ष के समर्थन में कार्रवाई करना आम बात है। शहर में करीब दो सौ आरडब्ल्यूए और करीब साढ़े चार हजार सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। अधिकतर में चुनाव रोकने या कराने, प्रबंधन, सदस्यता, कोष आदि विषय को लेकर विवाद चलते रहते हैं। जिला रजिस्ट्रार कार्यालय के हरामखोर भ्रष्ट अधिकारी इस नाम पर मोटी लूट कमाई करते हैं, कभी बॉइलॉज के नियम लागू कराने के नाम पर तो कभी पर्यवेक्षक तैनात कर तो कभी पंजीकरण करने या रद्द करने के बहाने मोटी रकमें ऐंठी जाती हैं। किसी एक पक्ष से मोटा पैसा लेकर उसके हिसाब से निर्णय सुनाने का खेल आम है, सैनिक सोसायटी और धुन्ना इसका बेहतरीन उदाहरण है। भ्रष्टाचार की हद यह है कि सहायक रजिस्ट्रार खुले आम ढाई लाख रुपये तक रिश्वत मांगते हैं। बीते नौ दिसंबर को सहायक राजीव गुप्ता एक गुरुद्वारे की कमेटी के पक्ष में केस बनाने के एवज में पचास हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ धरा गया था, पूरी बात ढाई लाख रुपये में तय हुई थी। जाहिर सी बात है कि राजीव गुप्ता ढाई लाख रुपये में सबके हिस्से पहुंचाता। रिश्वतखोरी का खेल आराम से चल रहा था, राजीव के रंगेहाथ पकड़े जाने पर छवि बचाने के लिए बीते दिनों जिला रजिस्ट्रार सचिन यादव को निलंबित कर दिया गया है।

यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती तो सचिन का केवल निलंबन नहीं बल्कि उसके खिलाफ जितनी भी शिकायते आई हैं उनके आधार पर आपराधिक केस दर्ज कर गिरफ़्तारी और सजा करा भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी देती। लेकिन सरकार ऐसा करेगी नहीं क्योंकि सरकार में बैठे इन रिश्वतखोर अधिकारियों के खैरख्वाह राजनेता ही उन्हें बचाने के लिए पूरी ताकत से जुट जाते हैं। लेकिन जब पूरे कुंए में ही रिश्वतखोरी की भांग घुली हो तो सचिन की बहाली तय है। रिश्वत का ही दम है कि सचिन के खिलाफ मुख्यालय चंडीगढ़ तक शिकायतें होती रहीं लेकिन वह कुर्सी पर जमा रहा।

इतना ही नहीं अप्रैल 2025 में धुन्ना के इशारे पर एआर प्रवीण कादियान ने विभाग के कर्मचारियों को भेज कर मंदिर की दानपेटियों की सील तुड़वा कर सारा धन निकलवा लिया, पेटियों में से कितना धन निकला इसका लेखा जोखा नहीं दिया गया। मोनिका के कारण मंदिर की दान राशि हड़पने में अड़चनें आ रही थीं तो 12 अगस्त 2025 को नगर निगम परिसर में स्थित कोऑपरेटिव बैंक में सैनिक सोसायटी के नाम से एक नया खाता खुलवाया गया और मंदिर का सारा धन उसी खाते में जमा करवाया जा रहा है, यह खाता भी शिव मंदिर के नाम नहीं खुलवाया गया, यानी धुन्ना एंड कंपनी का खेल बेरोकटोक जारी है। यह शिव मंदिर जहां एक ओर अंधभक्तों के लिए चढ़ावा चढ़ाने का केंद्र है वहीं दूसरी ओर चढ़ावा खाने वालों की लूट कमाई का केंद्र बन चुका है। यानी कि अंधभक्त चढ़ावा चढ़ा कर खुश हैं तो धुन्ना एंड कंपनी उसे हजम कर खुश है। यदि भक्तगण मंदिरों में दान देना छोड़ दें तो धुन्ना और उस जैसे सैकड़ों धनलोलुप मंदिर की तरफ देखेंगे भी नहीं। वैसे भी इस तरह के लोग मंदिर में तब ही नजर आते हैं जब दानपेटियां खोली जानी होती हैं। मंदिरों में दान देने से भगवान शायद नहीं खुश होंगे लेकिन इसी रकम से यदि स्कूल और अस्पताल चलाए जाएं तो जनता कहीं अधिक लाभान्वित हो सकती है।

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Mazdoor Morcha
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