मज़दूर मोर्चा ब्यूरो प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय महकमे में कितना भ्रष्टाचार और लूटपाट है इसका कुछ अंश बीते बुधवार को सीएम नायब सैनी की महकमे के आला अधिकारियों के साथ हुई बैठक में सामने आया। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की मौजूदगी में हुई इस बैठक में महज तीन विकास कार्यों में 8 करोड़ 77 लाख रुपयों की बंदरबांट किए जाने का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने तीन परियोजनाओं की लागत 136.64 करोड़ रुपये बताई लेकिन सीएम ने आपत्ति जताई तो बोलीदाताओं से बातचीत का नाटक करके लागत 127 करोड़ 87 लाख कर दी गई। एक कार्य में तो इतना फर्जीवाड़ा था कि उसकी निविदा निरस्त कर दोबारा जारी करने का आदेश दिया। सरकार और पत्तलपाड़ मीडिया ने इसे पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से करीब पौनै नौ करोड़ रुपये बचत बताकर ढिंढोरा पीटा जबकि, साफ समझा जा सकता है कि यदि सीएम अड़ंगेबाजी नहीं करते तो करीब पौने नौ करोड़ रुपयों की बंदरबांट ठेकेदार से लेकर नेताजी तक होने वाली थी।
बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार सीएम सैनी ने पूरे प्रदेश में नगर निकायों में विकास कार्योंं के नाम पर हो रही खुली लूट और घटिया काम के लिए अधिकारियों को जमकर लताड़ा, यहां तक कि जांच करा सख्त कार्रवाई करने की बंदरघुड़की भी दी। इसका असर अधिकारियों पर तो नहीं पड़ा लेकिन कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को समझ आ गया कि ये उनके लिए खतरे की घंटी है। समझा जा सकता है कि महकमे में विकास कार्यों के नाम पर आठ-नौ करोड़ रुपयों की बंदरबांट कोई एक अकेला अधिकारी नहीं कर सकता, और मंत्री यानी विपुल गोयल को इसकी जानकारी न हो। यह बात गले नहीं उतरती कि विपुल गोयल जैसा शातिर व्यक्ति इतना मूर्ख हो कि इतनी बड़ी बड़ी रकमें उसके मातहत डकार रहे हों और उसे पता न चले।
मंत्री के इशारों पर गैर जरूरी विकास योजनाएं तक तैयार करने वाले ये अधिकारी इतनी हिम्मत नहीं रखते कि ऊपर का सारा माल खुद डकार जाएं। जानकारों की मानें तो राजनेताओं के संरक्षण में ये अधिकारी उनके वसूली एजेंट की तरह काम करते हैं बदले में उन्हें कट तो मिलता ही है नेताजी के आशीर्वाद से पदोन्नति भी मिलती है। माना जा सकता है कि अधिकारियों ने तीन विकास कार्यों में जो करीब पौने नौ करोड़ रुपये अतिरिक्त का प्रावधान किया था वह ठेकेदार के लिए तो नहीं था। यानी ये मलाई साहब लोग एक-आध चम्मच लेकर बाकी सारी नेताजी के कटोरे में डाल देते। ऐसे में मंत्री विपुल गोयल को लगा कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तो सीएम समझ जाएगा कि सारा धंधा उन्हीं के इशारे पर चलता है, इसलिए आनन फानन कई आला अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी करने का अनुमोदन पत्र मुख्यमंत्री को लिख मारा। सूत्रों की मानें तो मंत्री जी ने बेचारे उन्हीं अधिकारियों को बलि का बकरा बनाने का ढोंग रचा है जो उनके लिए वसूली एजेंट के रूप में काम करते थे, अपना कुर्ता बेदाग दिखाने के लिए नेताजी ने सारी कीचड़ अधिकारियों की वर्दी पर मल दी।
बताया जा रहा है कि कैबिनेट मंत्री द्वारा भेजी गई चार्जशीट की सिफारिश करने वाली चिट्ठी बैठक के दूसरे दिन ही सीएम नायब सैनी की मेज पर पहुंच गई थी लेकिन समाचार लिखे जाने तक नायब सैनी ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया था। बैठक में सख्त कार्रवाई की डींग मारने वाले सीएम ने लगता है चि_ी ठंडे बस्ते में डाल दी है अन्यथा अभी तक तो कई अधिकारी निपट गए होते। जानकार कहते हैं कि सीएम को भी सच्चाई पता है, यदि जांच कराई गई तो ये बड़े बड़े नौकरशाह नेता-मंत्रियों की पोल खोल सकते हैं। सरकार की छवि जनता में पहले से ही बर्बाद है, यदि अधिकारी भी नाराज हो गए तो लुटिया डूबनी तय है। जानकार कहते हैं कि बैठकों में बंदरघुड़की तो जनता को यह बताने के लिए दी जाती है कि सरकार भ्रष्टाचार पर बहुत सख्त है, सच्चाई में तो सब मिल कर खेल कर रहे हैं। भाजपा सरकार में दस रुपये के काम के लिए सौ या हजार रुपये का बजट बनाने का खेल नया नहीं है, पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के समय में भी एनआईटी पांच में सीवर लाइन बिछाने के लिए निगम के होनहार अधिकारियों ने 165 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बना दिया था, सीएम खट्टर ने इसे घटा कर 156 करोड़़ कर दिया था, यह प्रोजेक्ट तो आज तक पूरा नहीं हुआ लेकिन सीवर लाइन सफाई के नाम पर निगम और एफएमडीए हर साल करोड़ों रुपये खर्च दिखाते हैं। राजा नाहर सिंह स्टेडियम, नगर निगम की इमारत, सेक्टर 12 में वाहन स्टैंड, नगर निगम की सात मंजिला बिल्डिंग, प्रतापगढ़ एसटीपी जैसे अनगिनत प्रोजेक्ट हैं जिन में नौ की लकड़ी नब्बे का खर्च दिखाया गया। नगर निगम में दो सौ करोड़ के घोटाले के बाद उससे भी छोटे-बड़े अनेक घोटाले हो चुके हैं लेकिन सत्ता और सरकार की बदनामी के डर से उन्हें ढांका छिपाया जाता रहा है।
शहरी स्थानीय निकाय महकमे के आला अधिकारियों को भी अच्छी तरह मालूम है कि मंत्री जी ने दिखावे के लिए पत्र लिखा है और कठपुतली सीएम में इतनी हिम्मत नहीं कि वह आकाओं के इशारे के बिना किसी के खिलाफ कार्रवाई करें। भाजपा शासन में फलते फूलते भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को देख कर कहा जा सकता है कि अधिकारी भी लूट कमाई बदस्तूर जारी रखेंगे, आखिरकार वह यह सब मंत्री और उनके आकाओं की खुशी के लिए ही तो कर रहे हैं। पाठकों को बताते चलें कि बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, अतिरिक्त प्रधान सचिव और आयुक्त एवं सचिव, शहरी स्थानीय निकाय डॉ. साकेत कुमार सहित महकमे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।