मैं पाखंडियों की भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहता! मैं भ्रष्ट व्यक्ति के शव की उपासना नहीं कर सकता!

मैं पाखंडियों की भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहता! मैं भ्रष्ट व्यक्ति के शव की उपासना नहीं कर सकता!
February 13 10:45 2026

अजब देश है, जहां लाल बहादुर शास्त्री जी और अजीत पवार दोनों की मृत्यु पर एक सा संदेश दिया जाता है।

वेद माथुर
मैंने अजीत पवार की मृत्यु पर फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी।
उस पोस्ट को लगभग 23 लाख लोगों ने देखा, करीब 8000 लाइक मिले और लगभग 700 लोगों ने शेयर किया।
इस पोस्ट के बाद मेरे पास फ्रेंड रिक्वेस्ट की बाढ़ आ गई है।
कुछ लोगों ने इसे असंवेदनशील बताते हुए कहा—
‘किसी की हादसे में मृत्यु हो जाए और उस समय ऐसा लिखना हृदयहीनता है। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित सभी श्रद्धांजलि दे रहे हैं, आप भी रोकिए उन्हें। ‘
कुछ मूर्खों ने अशिष्ट भाषा का भी उपयोग किया और ब्लॉक हो गए।
मेरा स्पष्ट जवाब है—
मैंने किसी जीवित व्यक्ति की मृत्यु की कामना नहीं की।
न ही किसी की मौत पर खुशी जताई।
हाँ, जो लोग दिन-रात भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलते हैं, उनकी तरह मैंने अजीत पवार को श्रद्धांजलि नहीं दी। चित्रगुप्त के दरबार में उन्हें ओम शांति की प्रार्थना नहीं की क्योंकि मैं भ्रष्ट व्यक्तियों के शव की उपासना नहीं करता।
मैंने उनके कर्मों का लेखा-जोखा रखा।
महाराष्ट्र का बच्चा-बच्चा जानता है कि अजीत पवार ने गरीबों के हिस्से का निवाला छीनकर कम से कम 50,000 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई।
(हमारे मित्र राजेंद्र गुप्ता के अनुसार यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ तक हो सकता है।)
यह वही महाराष्ट्र है जहाँ गरीबी और सूखे के कारण हज़ारों किसानों ने आत्महत्या की।
किसानों की आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र को दुनिया में शीर्ष पर पहुँचाने में अजीत पवार जैसे नेताओं का सक्रिय योगदान रहा है।
सूखे से पीडि़त भूख से मरते किसानों से उनका यह कथन आज भी रिकॉर्ड में है—
‘तालाब और नहरों में पानी नहीं है तो क्या मैं अपने पेशाब से भरूँ? ‘
ऐसे व्यक्ति की मृत्यु पर यदि मैंने उनके काले कारनामों का उल्लेख किया, तो इसमें अपराध क्या है?
कुछ लोग इसे हिंदू संस्कृति के विरुद्ध बता रहे हैं।
यदि ऐसा होता, तो क्या हम रावण का दहन करते?
क्या किसी बड़े भ्रष्ट नेता की मृत्यु,
भ्रष्ट अफसरों और नेताओं को संदेश देने का सही अवसर नहीं हो सकती?
मुझे प्रसन्नता है कि 5-10 लोगों की असहमति के बावजूद
लाखों लोगों ने इस बात को समझा और समर्थन दिया।
प्रधानमंत्री या गृहमंत्री किसी की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करें—
यह उनका अधिकार है।
मैं किसी की मृत्यु के बाद उसके कर्मों का मूल्यांकन करूँ—
यह मेरा अधिकार है।
++++
प्रसंगवश :
हमारे शहर में एक व्यक्ति था—कल्लू प्रसाद। उसकी मृत्यु के बाद मैंने उसके तीन कर्म गिनाए:
1. पड़ोस की विधवा के घर पर अवैध कब्जा
2. तलाकशुदा महिला को धोखे से गर्भवती करना
3. शराब के नशे में नंगी तलवार लेकर मोहल्ले में घूमकर आतंक फैलाना
कई मित्रों ने कहा—
‘मृत्यु के बाद आलोचना गलत है। ‘
+++
हमारे बैंक के जनरल मैनेजर श्री सुबोध कांत चटर्जी।
सेवानिवृत्ति के समय वही अधिकारी उनके गुणगान कर रहे थे,जो वर्षों तक उन्हें गालियाँ देते थे।
एक महिला अधिकारी ने कहा— ‘मेरे बेटे का एक्सीडेंट हुआ, वह मृत्युशय्या पर था।
फिर भी चटर्जी साहब ने छुट्टी नहीं दी और मानसिक प्रताडऩा दी।ये बेहद खराब और नीच व्यक्ति हैं।
मैं कामना करती हूँ कि उन्हें भी वही पीड़ा मिले। ‘
उस महिला अधिकारी की सभी ने आलोचना की।
मैं आज भी मानता हूँ—उसने गलत नहीं कहा। वह महिला शालीन थी अन्यथा थप्पड़ भी मार सकती थी।
+++
अजीत पवार के एक समर्थक ने मुझसे पूछा—
‘क्या तूने कभी भ्रष्टाचार नहीं किया? ‘
मेरा उत्तर है—
‘मैं बड़े पद पर रहा हूँ,
लेकिन मैंने नहीं किया।
तू चाहे तो जाँच करा ले। ‘
+++
मैं ढोंगी और पाखंडी लोगों की भीड़ में शामिल नहीं होना चाहता।
भ्रष्टाचार के खिलाफ मैं ऐसे ही तीर चलाता रहूँगा।
यह प्रयास तभी सफल होंगे,
जब आप इन बातों को आगे तक पहुँचाते रहेंगे।

  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles