छांयसा (मज़दूर मोर्चा) भाजपा सरकार एवं संघ के काले कारनामों से जनता का ध्यान हटाने के लिए तमाम भाजपा एवं संघ के कार्यकर्ता मीडिया के द्वारा भ्रमित बयानबाजी करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ऐसे ही एक मौके पर मेडिकल कॉलेज परिसर में बोलते हुए किसी डॉ. देव प्रसाद भारद्वाज ने संघ का ‘गौरवशाली’ इतिहास बताते हुए झूठ के खूब पकौड़े तले। उन्होंने एक भी बात ऐसी नहीं बताई जिससे संघ का गौरव झलकता हो। संघ का कोई काम ऐसा नहीं बताया जिससे संघ का गौरव बढ़ता हो। आज जिस बंदे मारतम को लेकर दस-दस घंटे तक संसद में बहस कराई जाती है, ब्रिटिश राज में उसे जबान पर लाने तक की हिम्मत नहीं होती थी। आज जिस तिरंगे के नाम पर यात्राएं निकालते फिरते हैं, संघ ने सदैव उसका अपमान किया है। तीन रंग वाले झंडे को अपशकुन बताया जाता था। इनके नागपुर स्थित मुख्यालय पर 55 साल तक तिरंगा नहीं लगने दिया गया।
सन् 2002 में कुछ सिर-फिरे देशभक्तों ने जब इनके मुख्यालय पर जबरन तिरंगा लहरा दिया तो उनके विरुद्ध संघियों ने थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया था। पूर्व स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इन संघियों ने जम कर अंग्रेज सरकार की चापलूसी तथा क्रांतिकारियों के विरुद्ध मुखबडिय़ां की थी। जो आरएसएस मुस्लिम विरोध का एजेंडा लेकर राजनीति कर रहा है, वही 1942 में मुस्लिम लीग के साथ मिल कर बंगाल व सिंध में सांझा सरकार चला रहे थे। विडम्बना तो देखिए जिस संघ ने सदैव अंग्रेजों के तलबे चाटे आज वे ही देशभक्ति के प्रमाणपत्र बांटने का एकाधिकार अपनी जेब में लिए घुम रहे हैं। 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेज हुकुमत ने समझ लिया था कि यदि हिन्दू-मुस्लिम इकट्ठे रहे तो उनका शासन अधिक नहीं चल पाएगा। इसलिए इन दोनों के बीच गहरी खाई एवं मतभेद पैदा करना बहुत जरूरी है। इसी के मद्देनजर मुस्लिम लीग तथा हिन्दू महासभा व राष्ट्रीय स्वयंसेवकसंघ को पाल-पोस कर इतना बड़ा बनाया गया कि दोनों आपस में एक दूसरे को मारने-काटने में जुटे रहे और वे जुटे भी रहे। इसके फलस्वरूप अंग्रेज 1947 तक राज चला सके। संघ ने कभी नहीं चाहा था कि अंग्रेज भारत छोड़ें।
संघ के तत्कालीन सरसंघ चालक गोलवलकर ने अपनी पुस्तक ‘दाबंच ऑफ थॉट्स’ में स्पष्ट लिखा है कि देश के हिन्दुओं अपनी ताकत को अंगेजों से लडऩे में व्यर्थ न गंवाओं। इसे अपने असली दुश्मनों, मुसलमानों, ईशाइयों व कम्युनिस्टों से लडऩे के लिए बचा कर रखो। डॉ. भारद्वाज के मुताविक संघ युवकों का चरित्र निर्माण करके उनके देश सेवा तथा अनुशासन की भावना भरता है। ऐसे ही चरित्र निर्माण के द्वारा बलात्कारी कुलदीप सेंगर, स्वामी चिन्मयानंद, कुश्ती संघ का पूर्व प्रधान वृज भूषण शरण सिंह तथा उत्तराखंड में अंकिता भंडारी कांड करने वाले दिग्गज संघी पैदा हुए हैं। वैसे तो मोदी व अमितशाह जैसों का चरित्र निर्माण भी संघ में ऐसा ‘बढिय़ा’ किया है कि पूरे देश को ही बेच खाने की जुगत में लगे हैं। भगवान बचाए ऐसे चरित्र निर्माण कर्ताओं से।
डॉ. भारद्वाज को संघियों की कार्यशैली समझने के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। अपने इसी अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज की दुर्दशा ही देख लें। नेशनल मेडिकल कॉउंसिल (एनएमसी) की शर्तों को ठेंगा दिखा कर चार साल से चल रहा ये कॉलेज आज भी कोई शर्त पूरी कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। न तो यहां पूरी ओपीडी है और न ही वार्डों में कोई मरीज दाखिल हैं। और तो और ऑपरेशन थियेटर, एकसरे व अल्ट्रासाउंड जैसी साधारण मशीने तक नहीं हैं। न ही पूरी फैकल्टी है और नही आवश्यक साजो-सामान, प्रसव जैसी सामान्य सुविधा का भी यहां नितांत अभाव है। इसके बावजूद भी यहां फट्टा लगा रखा है अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज। यह शर्म की इन्तहा नहीं तो और क्या है? कम से कम अटल बिहारी का नाम तो यहां बदनाम करने से गुरेज करते।