बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) नागरिकों की जान-माल के सुरक्षा करना पुलिस का प्रथम दायित्व होता है। इसमें नाकाम रहने पर पुलिस अपराधों को छिपाने अथवा उन्हें न्यूनतम करके दिखाने का प्रयास करती है। इसी क्रम में दिनांक 28-29 की मध्य रात्रि को बल्लबगढ़ में हुई डकैती को चोरी का केस बना कर दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सिही गेट के निकट भूदत्त कॉलोनी ब्रैडेड कम्पनी में श्याम सेल्स नाम से आईटीसी तम्बाकू सिगरेट कम्पनी का एक गोदाम है। इसमें 28-29 की मध्य रात्रि को चार डकैत दीवार फांदकर घुस आए और रखवाली कर रहे गार्ड सुशील कुमार को बुरी तरह मार-पीट कर रस्सियों से बांंधकर डाल दिया, उसके मुंह में कपड़ा भी ठूंस दिया। इसके बाद दो कमरों के ताले तोड़ कर करीब एक करोड़ रुपए कीमत की सिगरेट से भरी पेटियां उठा ले गए। 29 तारीख की सुबह जब रिंकू नामक दूसरा गार्ड ड्यूटी पर आया तो सारा मामला सामने आया। गोदाम मालिक तथा पुलिस को सूचित किया गया।
मौके पर थाना प्रभारी, एसीपी व डीसीपी के अलावा क्राइम ब्रांच के अधिकारी भी पहुंचे। मौका-मुआयना करने के बाद पुलिस बंधक बनाए गए गार्ड सुशील को अपने साथ ले गए। कानून के हिसाब से डकैती की इस वारदात को आईपीसी की धारा 392 के तहत दर्ज किया जाना चाहिए था, यदि डकैतों की संख्या पांच होती तो धारा 395 लगती। ये धाराएं लगाने से वारदात की गणना अति गम्भीर श्रेणी में आ जाती। इससे बचने के लिए पुलिस ने इसे चोरी की साधारण वारदात दिखाने के लिए धारा 380 में दर्ज किया। समझने वाली बात यह है कि चोरी की वारदात तब बनती है, जब चोर चुपके से घर या गोदाम में घुस कर माल उठा कर ले जाए और मालिक को पता भी न चले तो इसे चोरी कहा जाता है। भारतीय दण्ड संहिता में इसे साधारण वारदात की श्रेणी में रखा गया है। इसके विपरीत उक्त वारदात में चार लोग गोदाम मालिक की ओर से नियुक्त किए गए गार्ड को मार-पीट कर माल ले गए हैं। शहर के बीच इस तरह की वारदात होना पुलिस के लिए निहायत ही शर्मनाक घटना है। इससे जनता में संदेश जाता है कि डकैत इतने बेखौफ एवं छुट्टे घूम रहें हैं कि वे किसी को भी मार-पीट कर उसका माल छीन कर ले जा सकते हैं।