पलवल (मजदूर मोर्चा) सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री होने के नाते कृष्णपाल गूजर पलवल जिले पर भी अपना कब्जा बनाए हुए थे । लेकिन जब से वहां के विधायक गौरव गौतम हरियाणा सरकार के मंत्री बने हैं तब से कृष्णपाल का कब्जा यहां इतना ढीला हो गया कि लूट कमाई में उनकी हिस्सेदारी लगभग बंद हो गई है।
फरीदाबाद व पलवल में नगर निगम एवं नगर परिषदों में कमीशनखोरी की लूट की लड़ाई अब खुलकर सामने आ रही है 7 इस लड़ाई का नज़ारा 22 दिसम्बर को पलवल में हुई जिला विकास और निगरानी समिति (दिशा) की समीक्षा मीटिंग, जिसकी अध्यक्षता केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गूजर द्वारा की गई। उसमे वे पूरे गुस्से में नगर परिषद् की उपआयुक्त मनीषा शर्मा को धमकाते हुए नज़र आये । उनका बचाव करने को आए जिला भाजपा प्रधान विपिन बैंसला को बुरी तरह से झाड़ दिया। जिला उपायुक्त समेत तमाम अधिकारी चुपचाप बैठे रहे। केन्द्रीय राज्य मंत्री पलवल निगम परिषद् द्वारा विभिन्न कार्यों में किये जा रहे घोटालों एवं भ्रष्टाचार को लेकर नगर परिषद उपायुक्त एवं दूसरे अन्य अधिकारियों पर जमकर बरसे। नगर परिषद में वैसे तो घोटाले एवं भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं हैं, सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही हो, लेकिन झगड़ा नगर परिषद् में घोटालों में मिले कमीशन को लेकर है। जबसे यहां के विधायक गौरव गौतम मंत्री बने हैं तभी से कृष्णपाल की हिस्सेदारी यहां से बंद हो गई । इसी के चलते वे आग बबूला हो रहे थे।
नगर निगम परिषद् में कूड़ा उठाने के लिए जिस भारत सोलूशन नाम की फर्म को टुकड़ों में ठेका दिया जा रहा है वह गौरव गौतम के आदमियों की बताई जा रही है। इस फर्म को कूड़ा उठाने का ठेका तीन तीन महीने के लिए ढाई ढाई करोड़ रुपये में देने की बात बताई जा रही है। जबकि कूड़ा उठाने का ठेका पूरे वर्ष का छूटना चाहिए था जो कि चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों द्वारा छोड़ा जाता और उन्हें भी कमीशन में हिस्सा देना पड़ता। उनसे बचने के लिए तीन तीन महीने का खेल खेला जा रहा है और भुगतान भी ऑ$फलाइन किया जा रहा हैं ताकि लेन देन में सुविधा रहे। इसके अलावा वाहनों एवं स्टाफ आदि जो कंपनी के होने चाहिए, वे भी नगर परिषद के ही लगा रखे हैं। नगर परिषद में कर्मचारियों की संख्या को लेकर भी भारी भ्रष्टाचार है। जितनी संख्या कार्यरत कर्मियों की रिकार्ड में दिखाई जा रही है।, जानकारों के मुताविक वास्तविक संख्या आधे के करीब बताई जाती है। मतलब स्पष्ट है कि लगभग आधे कर्मचारियों के वेतन का गोल माल हो रहा है।
गूजर के गुस्से का एक और प्रमुख कारण यह बताया जा रहा है पलवल जिले में काटी जा रही अवैध कोलोनियाँ जो गौरव गौतम के खास ख़ास आदमियों द्वारा काटी जा रही है,जबकि यह धंधा कृष्णपाल के आदमी किया करते थे । फरीदाबाद में तो पहले गूजर के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था लेकिन वहां भी विपुल गोयल व राजेश नागर ने उसका धंधा मंदा कर रखा है। पिछली विधान सभा में पलवल जिले की तीनों सीटों से भाजपा के विधायक चुने गए थे लेकिन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में कृष्णपाल गूजर ने अपने ख़ास आदमियों को मैनेजर रखा हुआ था। हथीन में नरेश विधूड़ी, होडल में किरण पाल अटकना व पलवल में गूजर का दखल थोड़ा कम था, जो सभी विभागों,अधिकारियों को गूजर के लिए मैनेज करते थे लेकिन इस बार स्थिति दूसरी है। सिवाए होडल के बाकी दोनों विधान सभा क्षेत्रों का चार्ज अब सीधे गौरव गौतम के पास है। होडल का विधायक गूजर के पाले में है लेकिन वह भी गौरव गौतम के दखल के लिए रोता रहता है। इसके अतिरिक्त यमुना में सुल्तानपुर गाँव में गौरव गौतम के सरंक्षण में अवैध खनन भी जोरों पर करवाया जा रहा है तथा कमरावली गाँव के सरपंच के विरुद्ध वन भूमि से तीन सौ पचास पेड़ों को कटवाने के मामले में पुलिस रिपोर्ट व उसके समर्थक नगर परिषद् के पार्षद अनिल नागर के विरुद्ध एस सी एस टी एक्ट में हुए दर्ज केस के कारण भी गूजर को नाराज बताया जा रहा है।