पलवल (मज़दूर मोर्चा) दिनांक 10-11 दिसम्बर की मध्य रात्रि को गांव बंचारी में एक गरीब 11 वर्षीय वाल्मीकि लड़का, गुंडों से बचने के लिए दीवार फांद कर एक घर में छिपने लगा तो घर वालों ने उसे चोर-चोर कह कर पकड़ लिया और बेरहमी से न केवल पीटा बल्कि बिजली का करंट लगाया और पैर पर पेट्रोल डाल कर आग भी लगाई। उस रात वह लड़का अपने दो हम-उमर साथियों सहित एक बारात के साथ रोशनी करने वाले लैम्प उठा कर चलने के बाद अपने घर लौट रहा था तो एक कार में सवार तीन युवकों ने इन्हें पकड़ कर कुछ शरारत करनी चाही थी। किसी तरह ये तीनों छुट-छुटा कर इधर-उधर भाग निकले तो यह लड़का छिपने के लिए एक घर में जा घुसा। इत्तेफाक से वह घर पंडितों का था जिनके पूछने पर लड़के ने बताया कि वह तो वाल्मीकि जाति का है और बाप मर चुका है केवल अपनी मां के साथ रहता है।
वाल्मीकि जाति से नफरत करने वाले पंडितों को उस लड़के द्वारा उनके घर में घुसने से घर का अपवित्र होना महसूस हुआ। उन्होंने आव देखा न ताव, चोर-चोर कह कर उसे मारना-पीटना, करंट लगाना व जलाना शुरू कर दिया। लड़के की हालत जब बहुत बिगड़ गई और काफी लोगों का जमावड़ा होने लगा तब जाकर पंडितों ने उसे छोड़ा। इसी दौरान हल्ला-गुल्ला सुन कर लड़के की मां व अन्य दलित भी मौके पर पहुंच गए। तुरन्त पीडि़त लड़के को इलाज के लिए होडल ले गए जहां से उसे फरीदाबाद के किसी निजी अस्पताल को रेफर कर दिया गया।
दूसरी ओर दलितों ने पूरे मामले की शिकायत थाना मुंडकटी में दर्ज कराई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पंडितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा अनुसूचित जन जाति अधिनियम की धाराएं भी लगा दी गई। राजनीतिक हस्तछेप के चलते आरोपियों के प्रति पुलिस के ढीले रवैये को देख कर दलित वर्ग के कई संगठन खम्ब ठोक कर खड़े हो गए। पलवल के एसपी से मिले तथा उचित कार्रवाई न होने पर धरने प्रदर्शन की धमकी दी गई। इसके परिणामस्वरूप पुलिस ने दिखावटी कार्रवाई करते हुए खांबी गांव के उस पंडित को गिरफ्तार कर लिया जिसके पास असल आरोपी दो-दिन पहले मिलने आया था। जबकि असल आरोपी अग्रिम जमानत कराने के चक्कर में घूम रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार पलवल के विधायक एवं हरियाणा सरकार के मंत्री गौरव गौतम खुल कर अपने ब्राह्मण परिजनों का बचाव करने के लिए सत्ता का खुला दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्हीं के दबाव के चलते पुलिस अभी तक आरोपियों के प्रति कोई कड़ी कार्रवाई करने से कतरा रही है। दूसरी ओर हरिजन नेता होने का दम भरने वाले होडल के विधायक हरेन्द्र इस तरह खामोश बैठे हैं मानो उनके मुंह में दही जमी है। विदित है कि उनके पिता रामरतन भी यहीं से विधायक रह चुके हैं। चुनाव के वक्त तो इन्हें हरिजन भाई याद आते हैं, बाद में यह उन्हें पहचानते भी नहीं है। इस बात को लेकर जनता में भारी रोष चल रहा है।
गौरतलब है कि गौरव गौतम व हरेन्द्र दोनों ही उस भाजपा के नेता हैं जो हिन्दुत्व का राग अलाप कर अपनी राजनीति चलाती है। अब सवाल यह पैदा होता है कि उस गरीब दलित लड़के का हिन्दुत्व कहां गया जब सारी सत्ता दोषी ब्राह्मण वर्ग के पक्ष में आ खड़ी हुई? बांग्ला देश में मारे गए दीपू चन्द्र के नाम पर घडिय़ाली आंसू बहाने वाले इन भाजपाईयों को यह गरीब दलित बालक नजर क्यों नहीं आता?