फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बादशाह खान नामक जिले के प्रमुख सरकारी अस्पताल इन दिनों खुद सुरक्षा के गंभीर संकट से जूझ रहा है। मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए अस्पताल परिसर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे आज बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं। स्थिति यह है कि कई कैमरे दीवारों से लटके हुए हैं, कुछ कैमरे दीवारों के ऊपर रखे शोपीस बनकर रह गए हैं, जबकि अनेक कैमरे पूरी तरह बंद पड़े हैं। चिंतनीय है कि यह स्थिति तो तब है, जब अस्पताल परिसर में आपराधिक घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते दिनों नवजात शिशुओं की चोरी जैसी गंभीर घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। इसके अलावा जेब कटने और मोबाइल फोन चोरी की कई घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके, अस्पताल प्रशासन की ओर से सीसीटीवी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते नजर नहीं आ रहे।
अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने का उद्देश्य स्पष्ट था—हर गतिविधि पर नजर रखना, अपराधियों में भय पैदा करना और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध कराना। लेकिन मौजूदा हालात में यह उद्देश्य पूरी तरह विफल होता दिख रहा है। आधे से अधिक कैमरे या तो खराब हैं, बंद पड़े हैं या फिर ऐसी स्थिति में हैं कि उनका कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं किया जा सकता। हैरानी की बात यह भी है कि अस्पताल में जगह-जगह “सीसीटीवी निगरानी क्षेत्र” के बोर्ड लगे हुए हैं, लेकिन जब कैमरे ही काम नहीं कर रहे, तो ये बोर्ड महज दिखावा साबित हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और मरीजों का कहना है कि यह व्यवस्था अब “फर्जी सुरक्षा” का प्रतीक बन चुकी है। कई जगह कैमरे उतारे जा चुके हैं, कुछ हवा में लटक रहे हैं और कुछ पूरी तरह निष्क्रिय पड़े हैं। इस लापरवाही के पीछे एक और कारण सामने आया है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में पिछले करीब ढाई वर्षों से फायर सेफ्टी की पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसी वजह से कई स्थानों पर अस्पताल की सीलिंग उतार दी गई है। परिणामस्वरूप सीसीटीवी कैमरे और यहां तक कि लाइटें भी नीचे लटकी हुई दिखाई देती हैं। कुछ स्थानों पर कैमरे पूरी तरह हटा दिए गए हैं, जिन्हें दोबारा नहीं लगाया गया।
ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि भविष्य में कोई बड़ी घटना घटती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? जब जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो अपराधियों तक पहुंच कैसे संभव होगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? मरीजों और उनके परिजनों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अस्पताल पहले ही भीड़, अव्यवस्था और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, ऊपर से सुरक्षा व्यवस्था की यह बदहाली चिंता को और बढ़ा देती है। विशेषकर महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चों के साथ आने वाले परिजन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अस्पताल में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की तत्काल जांच कर उन्हें शीघ्र चालू किया जाए। साथ ही नियमित मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की तैनाती की जाए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों और बोर्डों तक सीमित न रह जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर बीके अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था यूं ही राम भरोसे चलती रहेगी।