नगर निगम कचरा न उठा कर भी करेगा कमाई

नगर निगम कचरा न उठा कर भी करेगा कमाई
November 17 04:57 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम ने अपने छोटे से लेकर बड़े तक प्रत्येक अधिकारी को, उन लोगों पर जुर्माना लगाने का अधिकार दिया है जो शहर में कूड़ा-कचड़ा फैलाते हैं। छोटे स्तर पर यानी घरों व दुकानों आदि का कूड़ा इधर-उधर फेंकने, नाले अथवा सरकारी भूखंडों पर कचड़ा डालने वालों पर पहली बार पांच हजार रुपए व दूसरी बार 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। बल्क यानी बड़े पैमाने पर कूड़ा-कचड़ा फेंकने वालों पर पहली बार 25 हजार रुपए तथा दूसरी बार 50 हजार रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा।

विदित है कि नगर निगम द्वारा घर-घर से कूड़ा उठाने का प्रावधान है। इसके लिए निगम द्वारा बाकायदा नगरवासियों से वसूली की जाती है। जहां तक बड़े पैमाने पर कूड़ा-कचड़ा फैलाने का मामला है तो वह उद्योगों पर ही लागू होता है। लगभग सभी छोटे-बड़े उद्योग अपने यहां से निकलने वाले कूड़े-कचड़े को कहीं फेंकने की बजाय कबाडिय़ों को बेचते हैं। ऐसे किसी कूड़े की सम्भावना नजर नहीं आती जिसे सड़कों पर फैलाया जाए। हां, सीवर जाम होने के चलते उद्योगों का गंदा पानी जरूर सड़कों पर बह निकलता है। शहर भर में कूड़े के ढ़ेर और उन पर भोजन तलाशते गायों के झुंड केवल वहीं नजर आते हैं जहां निगम ने अपने खत्ते बना रखे हैं। खत्ते यानी जहां पर गली-मुहल्लों अथवा क्षेत्र विशेष का कूड़ा-कचड़ा एकत्र किया जाता है। इन खत्तों से कूड़ा-चकड़ा उठाना निगम का दायित्व है जिसे निभाने में वह कहीं भी कामयाब नजर नहीं आ रहा।

खत्तों से कूड़ा-कचड़ा उठाने के लिए नगर निगम बड़ी-बड़ी कम्पनियों को ठेका देता आ रहा है। इससे कम्पनियां तो माला-माल होती रही है लेकिन शहरवासियों को गंदगी से छुटकारा नहीं मिल पा रहा। इतना ही नहीं जो कूड़ा-कचरा इन कम्पनियों द्वारा उठाया जा रहा है उसका निस्तारण भी सही ढ़ंग से न होने के चलते, फरीदाबाद-गुडग़ांव रोड पर बंधवाड़ी गांव की जमीन पर कूड़े का पहाड़ खड़ा कर दिया। पिछले कुछ वर्षों से कूड़े के पहाड़ बनाने के लिए नई-नई जगह खोजी जा रही है। कूड़ा फैलाने के नाम पर जुर्माना करने का अधिकार देकर निगम ने अपने तमाम कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले कर दी। ये कर्मचारी कितने ईमानदार हैं और कितने बेईमान यह किसी से छिपा नहीं है। जुर्माना लगाने के इस नियम से निगम का खजाना भरे या न भरे परन्तु कर्मचारियों की जेबें जरूर भर जायेंगें।
निगमायुक्त के अनुसार उन्हें यह सख्त कदम एनजीटी द्वारा की गई कड़ी टिपणियों के कारण उठाना पड़ा है। विदित है कि शहर में उफनते सीवरों व जगह-जगह लगे कचड़े के ढ़ेरों को देखते हुए एनजीटी ने नगर निगम पर कई बार मोटे-मोटे जुमाने भी किए हैं।

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Mazdoor Morcha
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