भारत के विभाजन को लेकर अक्सर 1945 से लेकर 1947 तक की घटनाओं का जिक्र होता है और उसमें गांधी, नेहरू, जिन्ना की भूमिकाओं की चर्चा होती है। लेकिन डॉ. अंबेडकर ने सावरकर का रुख देखते हुए 1940 में लिखी अपनी किताब ”पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन” में यह स्थापना दी थी कि पाकिस्तान बनकर रहेगा और ऐसा ही श्रेयस्कर है। इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत के वास्तविक विभाजन से 7 साल पहले और भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के 2 साल पहले डॉ आंबेडकर तथ्यों का विवेचन करके पाकिस्तान को भविष्य की सच्चाई मान रहे थे। उन्हें इसके सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं दिखाई दे रहा था।
डॉ अंबेडकर ने इस पुस्तक में महात्मा गांधी को ऐसा व्यक्ति बताया जिसने अपना पूरा जीवन हिंदू मुस्लिम एकता के लिए समर्पित किया। लेकिन इतना करने के बाद भी वह हिंदू मुस्लिम एकता हासिल नहीं कर सके जो कि अखंड भारत के लिए जरूरी है। डॉक्टर अंबेडकर ने सावरकर के हिंदू राष्ट्र के सिद्धांत में ही एक पाकिस्तान छुपा होने की बात स्थापित की। डॉक्टर अंबेडकर ने कहा कि जब सावरकर हिंदुओं को एक अलग राष्ट्र मान रहे हैं तो स्वाभाविक रूप से यह मुसलमानों को दूसरा राष्ट्र।