करनाल (जेके शर्मा) धान में नमी के नाम पर कटौती करने से बवाल मचा हुआ है और सरकार आंखे मूंदे बैठी है। शहरों से लेकर ग्रामीणों क्षेत्रों में एमएसपी पर धान की खरीद न होने के विरोध में धरने प्रदर्शन व जाम लगाने का क्रम तेज हो रहा है। किसानों ने आज गांव बल्ला में धान की खरीद कटौती पर होने के विरोध में सडक़ जाम कर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा तय 17 नमी की धान को भी कटौती पर खरीदा जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया अधिकारी राईस मिल मालिकों से मिलीभक्त कर किसानों की धान को सरकारी रेट से कम कीमत पर खरीद कर रहे हैं। सडक़ जाम कर धरने पर बैठे किसानों के बीच पुलिस दल के साथ पहुंचे खरीद एजेंसी के अधिकारी को किसानों ने खूब खरी खरी सुनाई। किसानों ने आरोप लगाया कि जिस रेट पर किसानों की धान खरीदी जा रही है उन्हें उसी रेट की पर्ची काट कर दी जानी चाहिए, लेकिन किसानों की धान को कागजों में एमएसपी पर खरीदी करने की पर्ची काट कर दी जा रही है। जो किसानों के साथ धोखा है। किसानों ने कहा कि यदि किसानों की धान को नमी के नाम पर कटौती करके कम रेट पर खरीद हो रही है तो उन्हें उसी रेट की पर्ची देने की बजाय अधिक रेट की पर्ची देने के पीछे क्या घौटाला है।
उधर किसानों की मांग का समर्थन करते हुए भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने प्रदेश में धान खरीद करने में घोटाले का आरोप लगाकर सारे मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम खुला पत्र लिखकर धान खरीद में कट लगाने और दूसरे प्रदेशों से धान मंगवाकर गोलमाल करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द प्रदेश सरकार और सर्वोच्च अधिकारियों से बातचीत करवाने की मांग की है। इतना ही नहीं उन्होंने खुला पत्र मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, संबंधित विभाग के मंत्री, सभी विपक्षी दलों के नेता, सभी उपायुक्त, खाद्य आपूर्ति विभाग के जिला अधिकारी और सभी मंडी अधिकारियों के लिए भी लिखा है।
उन्होंने पत्र में कहा कि प्रदेश में धान खरीद में कई सौ रुपए प्रति क्विंटल कट लगाया जा रहा है। खरीद एजेंसी मंडी से नदारद होती है और पूरी खरीद राइस मिलरों के इशारे पर चल रही है। राइस मिलरों और अधिकारियों ने ऐसी व्यवस्था खड़ी कर दी है, एक ही राइस मिलर आढ़ती से उठान करता है। उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में धान प्रदेश में पहुंच रहा है। इन ट्रकों के कागजातों में भी भारी हेरफेर नजर आ रहा है। इस मामले को उठाने के बावजूद भी कोई कार्रवाई न होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। दूसरी तरफ धान में नमी के नाम पर काटौती कर धान खरीदी करने और किसानों को एमएसपी पर खरीदी करने का पर्ची देने को लेकर किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है, जो कभी भी विस्फोट का रूप धारण कर सकती है।
लूट लो देश के हर उस आदमी को जिसे जीएसटी सस्ता होने के बाद कुछ फायदा मिलना था पिछले साल मेरा हेल्थ इंश्यूरेंस का प्रीमियम 14340 था। उसके ऊपर कुल 1291+1291 त्रस्ञ्ज था जिसके बाद मैंने कुल प्रीमियम 16922 दिया था। इस साल सरकार ने त्रस्ञ्ज 18 प्रतिशत से 0 प्रतिशत कर दिया और मेरा बीमा प्रीमियम बढ़कर 16922 से बढ़कर सीधा 19926 हो गया जिसमें त्रस्ञ्ज शामिल नहीं है। क्या सरकार ने त्रस्ञ्ज पूंजीपतियों को अपनी कमाई बढ़ाने के लिए खत्म किया है ? क्या मिला मुझे क्या मिला आम आदमी को ? जो रुश्वष्ठ ऑनलाइन त्रस्ञ्ज कम होने से पहले अगस्त में मैंने 28387 ली थी वही रुश्वष्ठ त्रस्ञ्ज कम होने के बाद अब 31149 की है। मतलब सीधा और साफ है कि जनता एक बार फिर से मूर्ख बनी है। ये त्रस्ञ्ज सिर्फ आम लोगो को लूटने के लिए कम हुआ क्योंकि सरकार का इस पर कोई नियंत्रण ही नहीं है। आपको त्रस्ञ्ज कम होने से सरसो के तेल से लेकर देसी घी तक क्या कुछ सस्ता मिला ? चिप्स के पैकेट से बर्तन तक क्या क्या सस्ता मिला ? क्या फायदा हुआ आपको इस झुनझुने का जिसके प्रचार में सरकार से करोड़ो अरबों खर्च कर दिए लेकिन पूंजीपति कम्पनियों ने इसका सीधा फायदा ग्राहक की जगह खुद को पहुंचाया, उदाहरण आपके सामने है। इसी खुलासे के साथ सबको ॥ड्डश्चश्च4 ष्ठद्ब2ड्डद्यद्ब…. लूट लो देश के हर उस आदमी को जिसे त्रस्ञ्ज सस्ता होने के बाद कुछ फायदा मिलना था।