अखबारों के बंडल चोरी, पुलिस सीसीटीवी फुटेज तक देखने में नाकाम रही

अखबारों के बंडल चोरी, पुलिस सीसीटीवी फुटेज तक देखने में नाकाम रही
October 05 07:30 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 19 की मार्केट में सांझा चूल्हा ढाबे के अगल-बगल अखबारों का वितरण केन्द्र है। यहां विभिन्न अखबारों के पांच वितरक वितरण करते हैं। प्रात: करीब दो बजे से दिल्ली, नोएडा आदि से विभिन्न गाडिय़ों द्वारा अखबारों के बंडल लाकर रख दिए जाते हैं, जिसे वितरक तीन-चार बजे तक आकर सम्भाल लेते हैं। करीब पांच बजे से सात बजे तक वितरण कार्य समाप्त हो जाता है। जाहिर है कि इस कारोबार से मार्केट के दुकानदारों विशेष कर सांझा चूल्हे वाले को किसी भी प्रकार की कोई असुविधा होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। अखबार वितरकों ने काम समाप्त होने के बाद यहां सफाई का भी पूरा इंतजाम कर रखा है।

बीते करीब 25 वर्षो से यहां कारोबार चलता आ रहा है। यहां कभी किसी प्रकार की चोरी-चकारी की शिकायत सुनने में नहीं आई। हां, कुछ वर्ष पूर्व वाधवा नामक एक वितरक के तमाम अखबारों को किसी खुंदकी ने आग जरूर लगा दी थी। उसके बाद अब दिनांक 24 को 26 सितम्बर की मध्य रात्रि को महेन्द्र शर्मा नामक वितरक के राष्ट्रीय सहारा हिंदी 65 उर्दू 32 सत्यजय टाइम्स 75 सोका टाइम्स 150 अखबार चोरी होने पर उन्होंने सेक्टर 19 की पुलिस चौकी में जाकर बाकायदा इस बाबत लिखित शिकायत दी थी। दो दिन तक कोई कार्रवाई न होने पर महेन्द्र ने इस बाबत ‘मज़दूर मोर्चाÓ सम्पादक से बात की। सम्पादक ने थाना ओल्ड के एसएचओ साहब से 27 सितंबर को सुबह दस बजे इस बाबत कार्रवाई करने का निवेदन किया। कोई कार्रवाई न होने पर अगले दिन 28 सितंबर को सुबह 11:25 बजे सम्पादक ने एसएचओ से कार्रवाई कराने हेतु पुन: निवेदन किया।

इसका असर ये हुआ कि पुलिस चौकी से एएसआई अरविंद ने शिकायतकर्ता महेंद्र को फोन करके चौकी बुला लिया। उनकी गाड़ी में लदकर एएसआई रमेश साहब ने मौका-मुआयना तो किया लेकिन वहां ढाबे वाले के लगे सीसीटीवी फुटेज को नहीं देख सके क्योंकि, ढाबे मालिक के अनुसार,सीसीटीवी का जानकार उनका मैनेजर अभी यहां नहीं है। वह दशहरे बाद आएगा। विदित है कि ढाबे का सारा फर्नीचर बरामदे व खुले आंगन में ही अवैध रूप से रहता है। इसकी रखवाली के लिए वहां एक गार्ड भी रखा हुआ है, जिससे पूछताछ करने की एएसआई ने कोई जरूरत नहीं समझी। इसके अलावा बगल की एक और दुकान वाले का सीसीटीवी कैमरा भी वहां लगा हुआ है, उसने भी पुलिस को फुटेज दिखाने से मना कर दिया।

इस पूरी कवायद के बाद महेन्द्र पुन: एएसआई को लादकर चौकी छोडऩे गया तो एएसआई ने शिकायतकर्ता को अपनी चौकी इंचार्ज के सामने पेश किया। इंचार्ज ने पूछा कि तू सतीश कुमार है? शिकायतकर्ता ने जवाब में कहा कि मैं महेंद्र शर्मा हूं और मैने ही शिकायत दी है। इंचार्ज महोदय ने कहा कि खुले में कोई सामान रखे हों तो चोरी हो ही जाती है। पहले कभी नहीं होती थी वह जमाना अच्छा था अब तो बहुत बुरा हाल है। यह भी कहा कि अखबार लाने वाली गाड़ी के ड्राइवर को चार जूत मारेंगे तो सब कुछ सच-सच बक देगा। इस पर अपना सा मुंह लेकर शर्मा जी घर लौट आए।
संदर्भवश सुधी पाठक सांझा चूल्हा के बारे में जान लें कि बिना पुलिस सहयोग के उसे कारोबार चलाना दूभर हो जाता है, इसलिए उसे पुलिस की नियमित सेवा आदि करनी होती है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि किसी मामले की तफ्तीश करने आया पुलिस अधिकारी उसके सामने कतई लंबा लेट जाए।

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Mazdoor Morcha
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