करनाल (जेके शर्मा) इन्द्री में सरकारी कार्यालयों खुलेआम भ्रष्टाचार चल रहा है। कार्यालयों में भ्रष्टाचार का इतना भयंकर बुरा हाल है कि अधिकारी को छोड़ों कर्मचारी भी बिना रिश्वत के काम नहीं करते। खुलेआम ली जा रही रिश्वत ने कईयों के चेहरे से उस समय नकाब उतार दिया, जब पंचायत सचिव अमित कुमार 20 हजार रूपए की रिश्वत सहित रंगे हाथों पकड़ा गया। विजिलैंस की टीम ने जैसे ही नगरपालिका परिसर से ग्राम सचिव को दबोचा तो इस की सूचना मात्र से सरकारी दफ्तरों में हडक़ंप मच गया। कई सरकारी कार्यालयों में तो अधिकारियों की रिश्वतखोरी की कहानियां किस्से सुनाय जाने लगे। तहसील कार्यालयों में तो कई दिन से जनता धक्के खाती फिरती रहती और अधिकारी सीट पर मिलते ही नहीं। यह हालत एक दिन की नहीं है, यह तो हर रोज की दास्तान बन चुकी है। बड़े अधिकारी व सत्तासीन नेता आंखों पर पट्टी बांधकर जनता को लूटते हुए देखकर रहे है और जनता की इस लूृटाई का उन्हें जरा भी दर्द नहीं हो रहा है।
आज दोपहर को नगरपालिका दफ्तर परिसर में ग्राम सचिव अमित को मांगी जा रही रिश्वत की राशि लेने के लिए बुलाया गया। बताते है कि ग्राम सचिव एक गांव में कैमरे लगवाने का बिल पास करवाने के लिए कैमरे लगाने वाले ठेकेदार को घटिया कैमरे लगाने की बात कहकर 20 हजार की रिश्वत मांग रहा था। रिश्वत की मांग से तंग आकर ठेकेदार ने विजिलैंस विभाग से सम्पर्क कर शिकायत कर दी। शिकायत के बाद विजिलैंस ने योजनाबद्ध तरीके से ग्राम सचिव को 20 हजार की राशि सहित रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। बताते है कि गांव में हो रहे विकास कार्यो के नाम पर विभाग के अधिकारी व कर्मचारी खुलेआम रिश्वत ले रहे है और रिश्वत देने में आनाकानी करने वालों के काम को घटिया बताकर उसे तंग करते है। गांव में हो रहे कामों में कितना घटिया काम अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है, इसका प्रमाण गांवों में विकास कार्यो की निष्पक्ष जांच से सामने आ जाएगा।