लक्ष्य, उद्देश्य, वर्तमान पदाधिकारियों की सूची व आमदनी-खर्च की सूचना भी उपलब्ध नहीं
चंडीगढ़।(पीपी कपूर) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने से इनकार के बाद अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के रजिस्ट्रेशन की कॉपी को भी निजी सूचना बता कर सूचना का अधिकार के तहत सार्वजनिक करने से मोदी सरकार ने इनकार कर दिया है। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर को उनके आरटीआई आवेदन के जवाब में भारत सरकार नीति आयोग के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी दीपक नेलवाल ने 16 सितंबर 2025 के पत्र में बताया कि आरटीआई एक्ट 2005 के सेक्शन 8 (जे) के तहत निजी सूचना होने के कारण आरएसएस के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की कॉपी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। यह भी बताया कि आरएसएस के उद्देश्यों व लक्ष्य के बारे भी कोई सूचना भारत सरकार के पास नहीं है और न ही आरएसएस के वर्तमान पदाधिकारियों की कोई सूची उपलब्ध है। इतना ही नहीं ये भी सूचित किया कि आरएसएस के सालाना आय व्यय, ऑडिट रिपोट्र्स, बैलेंस शीट्स का कोई लेखा जोखा भी सरकार के पास उपलब्ध नहीं है।
कपूर ने बताया कि आरएसएस बारे सूचना जानबूझ कर छिपाई जा रही हैं। असलियत में तो आरएसएस बिना रजिस्ट्रेशन अवैध रूप से चल रहा एक संगठन है जोकि सरकार को रिमोट कंट्रोल से चला कर बिना किसी जवाबदेही के सत्ता सुख ले रहा है। गत 15 अगस्त को 79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में आरएसएस को एक गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) बताते हुए उसकी प्रशंसा की थी। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 75 वें जन्मदिवस पर मीडिया में आर्टिकल लिख कर स्तुतिगान भी किया, लेकिन इस आरटीआई खुलासे से स्पष्ट है कि आरएसएस बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा एक अवैध संगठन है। हैरानी की बात है कि जो संगठन (आरएसएस) पूरे देश की सरकार को रिमोट कंट्रोल से चला रहा है, अपने गठन की 100वी जयंती मना रहा है, पीएम मोदी जिसका गुणगान कर रहे हैं और जिसके प्रमुख मोहन भागवत को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है, वह संगठन बिना रजिस्ट्रेशन अवैध रूप से कार्यरत है। आरएसएस का कोई रिकॉर्ड ही सरकार के पास न होना देश के लिए अत्यंत घातक है।