पहले निगमायुक्त, मेयर आवास का अतिक्रमण तोड़ो फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के संयुक्त आयुक्त (टाउन) हितेंदर कुमार ने बीते दिनों शहर की सभी आरडब्ल्यूए और हाउसिंग सोसायटियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में सबको चेतावनी दी गई है कि अगर किसी घर के आगे सरकारी जमीन पर लोहे की ग्रिल व अन्य किसी भी तरह का अतिक्रमण या कब्जा है तो उसे दस दिन के भीतर खुद हटा लें। यदि नहीं हटाया गया तो तोडफ़ोड़ और चालान की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अवैध कब्जाधारियों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। जुर्माना नहीं भरने पर हाउस टैक्स में जोड़ कर वसूला जाएगा। बड़ी अच्छी बात है यदि ईमानदारी से लागू हो जाए तो।
लगता है कि नगर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते की ऊपरी कमाई कम हो गई है जो संयुक्त आयुक्त महोदय को यह फरमान जारी करना पड़ा। यदि वह सच में गंभीर हैं तो सबसे पहले ग्रीन बेल्ट पर कब्जा कर बनाए गए निगमायुक्त के कैंप आवास का अवैध हिस्सा गिराएं। मेयर आवास के सामने की ग्रीन बेल्ट उजाड़ कर ग्रिल से घेर कर जो नई पार्किंग बनाई गई है, उस ग्रिल को उखाडऩे के लिए कहें। यदि ये लोग न हटाएं तो खुद तोडफ़ोड़ की कार्रवाई करें और जुर्माने की रकम वसूल करें। नोटिस जारी होने के बाद से सैनिक कॉलोनी में चर्चा हो रही है कि यदि संयुक्त आयुक्त महोदय में हिम्मत है तो कॉलोनी के एफ ब्लॉक 1722 में विधायक धनेश अदलखा के ससुराली रिश्तेदारों द्वारा कब्जाई गई ग्रीन बेल्ट खाली करवाएं। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने अदलखा के पार्षद बनते ही सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया था, तब से सैकड़ों बार जिला प्रशासन, नगर निगम सबसे शिकायत की गई लेकिन सत्ता की चाटुकारिता करने वाले अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। संयुक्त आयुक्त महोदय खैर, अब कार्रवाई की क्या हिम्मत जुटा पाएंगे जब विधायक अदलखा के सामने हाथ बांधे खड़े रहते हैं।
सैनिक कॉलोनी नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में ही आती है लेकिन संयुक्त आयुक्त महोदय की हिम्मत धनेश अदलखा के ससुरालियों से ग्रीन बेल्ट छुड़वाने की तो दूर कॉलोनी मेें बड़ी बड़ी गड़बडिय़ां और खेल करने वाले राकेश धुन्ना से भी सवाल पूछने तक की नहीं है। सीएम नायब सैनी की भाजपाई सरकार जिस तरह भ्रष्ट, हरामखोर नगीनों को चुन चुन कर सत्ता की माला में जड़ रही है, उसी कड़ी में राकेश धुन्ना को भी बडख़ल विधानसभा क्षेत्र में सीएम विंडो का एमिनेंट पर्सन चुना है। जाहिर है कि धुन्ना को यह झुनझुना विधायक अदलखा के चरणचुंबन करने के कारण थमाया गया है। ऐसे में जब एफ 1722 की रखवाली के लिए सीएम सैनी के दो चेले लगे हों तो कार्रवाई के नाम पर निगमायुक्त भी नोटिस फाड़ कर फेक देंगे।
निगम अधिकारियों की नजर उस ग्रिल पर तो है जो आम आदमी ने अपने घर के आगे आवारा घूमने वाले गोवंश और पशुओं से बचाव के लिए लगाई है, लेकिन उसे केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के आलीशान मॉल के सामने ग्रीन बेल्ट पर कब्जा करके बनाई गई पार्किंग नहीं नजर आती। बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद के परिवार द्वारा सेक्टर 11 और 46 में संचालित मिलन रेस्टोरेंट द्वारा ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन पर किया गया अतिक्रमण नजर नहीं आता। यह अतिक्रमण तो शहर के गण्यमान्य कहे जाने वालों ने कर रखे हैं, सत्ता पक्ष के सैकड़ों छुटभैये नेताओं ने तो अनेकों जगहों पर ग्रीन बेल्ट कब्जा कर किराए पर उठाई हुई हैं। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने सेक्टर नौ स्थित अपने मकान नंबर से सटी ग्रीन बेल्ट को न केवल कब्जा लिया बल्कि उसमें से अवैध रूप से रास्ता निकाल कर सड़क से जोड़ लिया है। यह काम यदि कोई और करता तो हूडा, निगम से लेकर जिला प्रशासन तक सब उसकी प्रॉपर्टी तक जब्त कर लेते। क्योंकि सत्ता पक्ष के लोगो ने हरित पट्टी कब्जा रखी है इसलिए निगमायुक्त से लेकर संयुक्त आयुक्त तक सबकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। इन अधिकारियों की आंखें तो केवल गरीब, मज़दूर, रेहड़ी पटरी दुकानदारों के लिए खुलती हैं या आम जनता केखिलाफ।
जानकारों का कहना है कि हितेंदर कुमार जानते हैं कि अधिकतर ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन पर किसका कब्जा है, और वे उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे। बहुत संभव है कि यह आदेश उन्होंने सत्ताधारियों के हुक्म पर दिया हो जिसका प्रयोग विरोधियों के खिलाफ किया जाएगा या फिर गरीब बेरसूख जनता पर। यदि संयुक्त आयुक्त सच में ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराना चाहते हैं तो एचसीएस अधिकारी होने के नाते नियम कानून का उल्लंघन करने वाले किसी को भी नहीं बख्शें, देखना है कि वह ऐसा करने की हिम्मत करेंगे या फिर सत्ताधारियों का मात्र प्यादा बनकर काम करेंगे।