फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) झूठ बोलने में माहिर संघ प्रशिक्षित पूर्व सीएम खट्टर अपने पूरे शासनकाल में जनता को मूर्ख बनाने के लिए चिल्लाते रहे कि वे हर जिले में एक-एक मेडिकल कॉलेज खोलेंगे। इसे लेकर उन्होंने दसियों जिलों में मेडिकल कालेज के नाम पर पंचायती जमीने तों जरूर कब्जा लीं लेकिन अब तक केवल दो ही मेडिकल कालेज, एक भिवानी और एक नारनौल में खोले हैं। इन्हें फर्जी मेडिकल कॉलेज इसलिए कहा गया है कि एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) ने इनके मान्यता प्रदान करने वाले आवेदन को रद्द कर दिया था। जाहिर है सरकारी मेडिकल कॉलेज के आवेदन को एनएमसी यूं ही तो रद्द नहीं करता। निरीक्षण के वक्त जब उसे मेडिकल कॉलेज में कोई भी शर्त पूरी होती हुई न मिले तो आवेदन रद्द करना उसका वैधानिक कर्तव्य है जो उसने पूरा कर दिया। अब चूंकी एनएमसी भी तो भाजपाई सरकार के केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आता है, इसलिए डबल इंजन की सरकार के अवैध मेडिकल कॉलेज को चलाने की अनुमति भी उसे देनी पड़ी। नारनौल के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक भी मरीज इलाज के लिए नहीं आता, आकर करे भी क्या, क्योंकि वहां न तो कोई फैकल्टी है और न ही उपकरण -दवाएं आदि। हां, खानापूर्ति के लिए जरूर रोजाना 20-30 लोगों के नाम बतौर मरीज ओपीडी रजिस्टर में चढ़ा दिए जाते हैं। लगभग यही स्थिति भिवानी मेडिकल कॉलेज की भी है। खानापूर्ति के लिए तीन किलोमीटर दूर स्थित सिविल अस्पताल को इसके साथ जुड़ा हुआ दिखाया गया है। गौरतलब है कि इसी तरह की कारस्तानी कोई गैर भाजपाई सरकार के राज्य में होती तो एनएमसी कभी भी इस तरह के अवैध मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति प्रदान न करता।
कहा जा सकता है कि खट्टर सरकार ने एक मेडिकल कॉलेज तीन वर्ष पूर्व छांयसा में भी खोला था। दरअसल यह कॉलेज एक निजी ट्रस्ट द्वारा बना कर चलाया जा रहा था। असफल होने पर इसे मात्र 129 करोड़ रुपये में हरियाणा सरकार ने टेकओवर करके कुछ वर्षों तक बंद रख कर चालू किया था। इसमें भी एनएमसी ने कभी भी पात्रता के आधार पर मान्यता नहीं दी थी। लेकिन डबल इंजन सरकार होने के नाते एनएमसी पर दबाव डाल कर इसे मान्यता दिला दी गई थी। मजे की बात तो यह है कि अब एमबीबीएस का चौथा बैच आ गया है, लेकिन अब भी यहां पर न तो पूरी फैकल्टी है और न ही उपकरण व दवाएं आदि। ऐसे में भला ओपीडी में मरीज क्या लेने आएंगे? जब ओपीडी में ही मरीज न हों तो आईपीडी में (दाखिल मरीज) कहां से आएंगे।
यह कहानी तो रही खट्टर के तीन मेडिकल कॉलेजों की। इससे भी भयंकर हालात राज्य में पहले से चल रहे रोहतक, अगरोहा, करनाल, खानपुर व नूंह स्थित मेडिकल कॉलेजों के हैं। इन सभी संस्थानों में फैकल्टी सहित तमाम चिकित्सीय सुविधाओं का भयंकर अकाल है। वैसे इन सब मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों की जरूरत ही क्या है जब रामजी का मंदिर बना दिया है और मथुरा में कृष्ण भगवान तथा बनारस में शंकर भगवान का मंदिर की मांग जारी है। इसके अलावा देश भर की तमाम मस्जिदों के नीचे से मंदिर खोजने का प्रोजेक्ट भी जारी है। इतना ही नहीं संघी भाइयों की लूट कमाई के लिए फरीदाबाद में हैप्पी कार्ड, आईडी बनाने व क्रिकेट स्टेडियम बर्बाद करने के नाम पर सैंकड़ों करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं।